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इन 5 सलाह को अमल में लाकर वायु प्रदूषण पर लगा सकते हैं लगाम

भारत की आबादी में करीब 66 करोड़ से अधिक लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां पीएम 2.5 देश के मानक से अधिक है.

Updated On: Sep 06, 2018 09:09 PM IST

FP Staff

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इन 5 सलाह को अमल में लाकर वायु प्रदूषण पर लगा सकते हैं लगाम

वायु प्रदूषण आज के दौर में एक प्रमुख समस्या बनती जा रही है. इससे सांस संबंधी कई बीमारियों भी लोगों को हो जाती है. भारत में कई ऐसे शहर है जहां की हवा काफी दूषित हो चुकी है और वहां रहना खुद की जान को जोखिम में डालने से कम नहीं है. भारत की आबादी में करीब 66 करोड़ से अधिक लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 देश के मानक से अधिक है. पीएम 2.5 वायुमंडलीय कण हैं, जो इंसानी बाल से 30 गुना महीन होते हैं. अगर ये कण फेफड़ों में प्रवेश कर लें तो लोगों को बीमार कर सकते हैं और इससे जान भी जा सकती है.

भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पांच 'सबूत-आधारित' सलाहों में से दो को शिकागो विश्वविद्यालय के 'एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के शोधकर्ताओं और बोस्टन में हार्वर्ड केनेडी स्कूल में 'एविडेंस फॉर पॉलिसी डिजाइन' के शोधकर्ताओं ने साल 2018 के पॉलिसी ब्रीफ में जगह दी है. इसके बाद 16 अगस्त 2018 को जारी पॉलिसी ब्रीफ में तीन सलाह और जोड़ी गई हैं. एक नजर इन पॉलिसी ब्रीफ पर..

रियल-टाइम डेटा

उद्योगों का चिमनी प्रदूषण पर गुणवत्ता के आंकड़ों की कमी के कारण प्रदूषणकारी उद्योगों के विनियमन में बाधा पहुंचती है. ऐसे में कई एसपीसीबी को डेटा जांचने, कैलब्रैशन की निगरानी और प्रवर्तन के लिए डेटा का उपयोग करने के लिए पर्याप्त क्षमता निर्माण प्रयासों की आवश्यकता होती है. ताकि वास्तविक समय की निगरानी में उपयोग लिए माप उपकरण की सटीकता का मूल्यांकन और समायोजन किया जा सके.

उत्सर्जन निगरानी में सुधार

उद्योग वायु प्रदूषण मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) जैसे नियामक उद्योग के चिमनी के मैन्युअल निरीक्षण पर विश्वास करते हैं. कई बार देखा गया है कि उद्योग खुद के प्रदूषण जांच के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को खुद बुलाते हैं और भुगतान करते हैं. जिसमें काफी घपला होता है. इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदूषण की जांच के लिए उद्योगों को रैन्डम्ली बांटा जाना चाहिए और उन्हें शामिल उद्योगों से स्वतंत्र निधि से भुगतान होना चाहिए. अगर फिर भी किसी तरह का कोई पक्षपात दिखे तो उन्हें सजा दी जानी चाहिए.

जुर्माना

अगर उद्योगों के जरिए किसी तरह का कोई अतिरिक्त उत्सर्जन किया जा रहा है उन पर जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान होना चाहिए. इससे संदेश जाएगा कि नियामकों ने पर्यावरण के खिलाफ अपराधों पर कार्रवाई की है. इससे आगे की राह काफी आसान हो जाएगी.

उत्सर्जन का व्यापार

सिफारिशों में बताया गया है कि सीमाओं के साथ उद्योगों को अपने उत्सर्जन का व्यापार करने की अनुमति दी जानी चाहिए. इसके अलावा औद्योगिक बाजारों में व्यापार बाजार स्थापित किए जाने चाहिए.

जनता को प्रदूषकों की जानकारी

जनता के लिए उत्सर्जन डेटा को समझना मुश्किल हो सकता है लेकिन फिर भी लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जाना जरूरी है. इससे जितने लोगों को भी इसकी जानकारी मिलेगी, वो जरूरत पड़ने या किसी तरह के उल्लघंन किए जाने पर प्रदूषण की शिकायत भी कर सकते हैं.

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