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नोटबंदी से उपजे हालात अभी नहीं होंगे सामान्य: एसबीआई

नोटबंदी के कारण पैदा हुए हालात में फरवरी के अंत या मार्च के शुरू तक ही सामान्य हो पाएंगे.

Updated On: Jan 02, 2017 11:24 PM IST

IANS

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नोटबंदी से उपजे हालात अभी नहीं होंगे सामान्य: एसबीआई

आम लोगों को अभी भी नोटबंदी से उपजे हालातों से राहत नहीं मिलेगी. एसबीआई की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि नोटबंदी के कारण पैदा हुए हालात में फरवरी के अंत या मार्च के शुरू तक ही सामान्य हो पाएंगे.

बैंक लोन की दरों में 0.9 फीसदी की कमी करने के बाद एसबीआई की चेयरमैन ने संकेत दिया कि जमा की दरों पर भी विचार किया जा सकता है. इसकी वजह यह कि नोटबंदी के बाद जमा किए गए धन को लोग फिर से निकाल सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के कारण लोगों ने भारी मात्रा में धन बैंकों में जमा किया, जिसके जल्द ही बाहर निकल जाने का अनुमान है. हालांकि हमें उम्मीद है कि लगभग 40 फीसदी धन बैंकों के पास ही रहेगा. बैंकिंग प्रणाली की फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत तक सामान्य अवस्था में लौटने की उम्मीद है.’

अनुमान के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को की गई नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंकों में 14.9 लाख करोड़ की रकम जमा की गई है. इस वजह से बैंकों के पास भारी धनराशि जमा हो गई है.

उद्योग जगत पर भी पड़ा असर 

दूसरी ओर सरकार के हाल के नोटबंदी के कदम का प्रमुख उद्योगों पर असर नजर आने लगा है. देश के 8 प्रमुख उद्योगों के विकास दर नवंबर में बढ़कर 4.9 फीसदी रही, लेकिन पिछले महीने की तुलना में इसमें गिरावट देखी गई.

अक्टूबर में इसकी विकास दर 6.6 फीसदी थी. हालांकि साल 2015 के नवंबर में उद्योगों की विकास दर सिर्फ 0.6 फीसदी ही थी. इस लिहाज से यह बहुत बड़ी वृद्धि है.

औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़ों में 8 प्रमुख उद्योगों (ईसीआई) का 38 फीसदी योगदान है. इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल है.

प्रमुख उद्योगों से जुड़े इन आंकड़ों को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने जारी किया है.

ईसीआई के अंतर्गत स्टील, रिफाइनरी उत्पादों और सीमेंट में अच्छी वृद्धि देखी गई, जबकि कच्चा तेल, कोयला और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट देखी गई.

नोटबंदी के कारण जीडीपी के अनुमानित दर में भी कमी आई है. नोटबंदी से पहले इस दौरान जीडीपी के 7.7 फीसदी रहने की उम्मीद थी. लेकिन नोटबंदी की वजह से यह 6.8 फीसदी ही रही.

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