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देश में और ग्राम न्यायालयों की जरूरत लेकिन जवाबदेही पर होना चाहिए जोर: जस्टिस लोकूर

उन्होंने कहा, ‘ग्राम न्यायालयों को लेकर पहले से ही कानून मौजूद है और कुछ (अदालतें) काम भी कर रही हैं, लेकिन उनके असर, निपटने वाले मामलों की संख्या और प्रकार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है’

Updated On: Dec 15, 2018 10:28 PM IST

Bhasha

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देश में और ग्राम न्यायालयों की जरूरत लेकिन जवाबदेही पर होना चाहिए जोर: जस्टिस लोकूर

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के एक जस्टिस ने देश में और ग्राम न्यायालयों के गठन का समर्थन किया. हालांकि इसी के साथ उन्होंने कहा कि ग्राम न्यायालयों  के कामकाज में अधिक जवाबदेही लाने की जरूरत है. जस्टिस मदन बी लोकूर ने यह बात कही.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकूर ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में ग्राम न्यायालयों के गठन की जरूरत है. उनका कहना था कि ये अदालतें देश के हर कोने में न्याय पहुंचाने के उद्देश्य की पूर्ति में मदद करेंगी.

उन्होंने कहा, ‘ग्राम न्यायालयों को लेकर पहले से ही कानून मौजूद है और कुछ (अदालतें) काम भी कर रही हैं. लेकिन उनके असर, निपटने वाले मामलों की संख्या और प्रकार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.’ गौरतलब है कि जस्टिस लोकूर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) के प्रमुख भी हैं.

जस्टिस लोकूर ने इसी संस्था के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह की एक अदालत में करीब दो हजार मामले विचाराधीन हैं. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकूर 30 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं.

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