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आईबी-रॉ के नए प्रमुख: नए अधिकारी, नया साल, नई चुनौतियां

देश के दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों को नए प्रमुख मिल गए हैं

Updated On: Dec 18, 2016 05:25 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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आईबी-रॉ के नए प्रमुख:  नए अधिकारी, नया साल, नई चुनौतियां

देश के दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों को नए प्रमुख मिल गए हैं. मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अनिल कुमार धस्माना को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग(रॉ) का प्रमुख बनाया गया है. वहीं झारखंड कैडर के अधिकारी राजीव जैन को इंटेलिजेंस ब्यूरो(आईबी) का प्रमुख बनाया गया है. दोनों की नियुक्ति दो साल के लिए की गई हैं.

अनिल कुमार धस्माना

AnilDhasmana

1981 बैच के आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना रॉ में काफी सालों से काम कर रहे थे. धस्माना को बलूचिस्तान मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान मामलों में खासा अनुभव के कारण सरकार ने धस्माना को चुना है.

धस्माना लंदन, फ्रैंकफर्ट, सार्क और यूरोपिय डेस्क पर काम कर चुके हैं. उनकी नियुक्ति में एनएसए अजित डोभाल की भूमिका अहम मानी जा रही है. धस्माना पिछले 23 सालों से रॉ में काम कर रहे हैं.

सरकार की नई बलूचिस्तान नीति में धस्माना के अनुभव का फायदा लिया जाएगा. पाकिस्तान ने भी हाल ही में अपने नए आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति की है. वर्तमान रॉ प्रमुख राजिंदर खन्ना का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है.

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राजीव जैन

1980 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव जैन वर्तमान में आईबी में ही विशेष निदेशक के पद पर तैनात हैं. आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं. राजीव जैन आईबी में आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा के बाद नंबर दो की हैसियत पर थे.

राजीव जैन को राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है. राजीव जैन आईबी में पिछले काफी सालों से कश्मीर डेस्क पर काम कर रहे थे. राजीव जैन राजग सरकार के कश्मीर मुद्दे पर वार्ताकार केसी पंत के सलाहकार भी रह चुके हैं.

ऐसी खबर है कि एनएसए अजित डोभाल ने दिनेश्वर शर्मा के कार्यकाल को बढ़ाने की बात की थी, पर दिनेश्वर शर्मा ने एक्सटेंशन लेने में असमर्थता जाहिर कर दी.

राजीव जैन एक जनवरी को अपना पदभार संभालेंगे. राजीव जैन की नियुक्ति को नोटबंदी से जोड़कर भी देखा जा रहा है. राजीव जैन के बारे में कहा जाता है कि वह वित्तीय निगरानी का काम और तेज गति से करने में मददगार साबित होंगे.

1989 से आईबी में 

राजीव जैन सहायक निदेशक के रूप में 1989 में ही आईबी में शामिल हो गए थे. आईबी में पर्दे के पीछे रह कर राजीव जैन ने आईबी में अधिकारियों के काम करने के मसौदे पर काफी काम किया है. राज्यों की राजधानियों में आईबी की इकाई बनाने में भी अहम रोल अदा किया.

झारखंड के पूर्व डीजीपी वी डी राम फर्स्ट पोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'मेरी राजीव जैन से पहली मुलाकात 1981-82 में मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुई थी. जब मैंने एसपी के रूप में उनसे चार्ज लिया था. वे बहुत ही अच्छे आदमी हैं. मृदुभाषी हैं, और सलीके से पेश आते हैं.'

वीडी राम उनके बारे में आगे कहते है्,' झारखंड के साहेबगंज में भी उन्होंने एसपी के रूप में अच्छा काम किया था. उनकी नॉन कंट्रोवर्सियल इमेज है, और काफी सालों से आईबी में काम कर रहे थे. राजीव जैन के बारे में पहले सी ही उम्मीद की जा रही थी की ये आईबी के डायरेक्टर बनेंगे. इनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है.'

अनिल कुमार धस्माना और राजीव जैन के लिए नया साल नई चुनौती लेकर आने वाला है. नया साल मोदी सरकार के लिए भी कठिन चुनौती भरा साबित होने वाला है. नोटबंदी की जो सर्जिकल स्ट्राइक की गई है, उसका असर नए साल में भी देखने के मिलेगा और इन अधिकारियों के रोल भी अहम साबित होंगे.

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