S M L

डॉक्टरों की खराब लिखावट पर कोर्ट का आदेश, कहा, हाथ से लिखी रिपोर्ट के साथ प्रिंटेड प्रति भी दें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में खराब लिखावट को लेकर तीन डॉक्टरों पर हाल ही में 5,000-5,000 रुपए का जुर्माना लगाया था

Updated On: Nov 03, 2018 09:13 PM IST

Bhasha

0
डॉक्टरों की खराब लिखावट पर कोर्ट का आदेश, कहा, हाथ से लिखी रिपोर्ट के साथ प्रिंटेड प्रति भी दें
Loading...

डॉक्टरों के पर्चों पर उनकी लिखावट अक्सर इतनी बुरी होती है कि आम आदमी को समझने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़े. ऐसे में आपराधिक मामलों में पोस्टमार्टम या इससे संबंधी डॉक्टरों की रिपोर्ट में अगर उनकी लिखावट ना समझ आए तो कोर्ट तक के लिए यह परेशानी का सबब बन जाती है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में ना पढी जा सकने वाली डाक्टरों की मेडिको लीगल रिपोर्ट से परेशान होकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हाथ से लिखी मूल रिपोर्ट के साथ साथ कंप्यूटर से प्रिंट की गई प्रति भी मुहैया कराएं.

अदालत ने शुक्रवार को कहा कि कंप्यूटर से प्रिंट की गई रिपोर्ट पर संबंधित डाक्टर या किसी अन्य अधिकृत व्यक्ति के दस्तखत भी होने चाहिए. जांच पूरी होने के बाद प्रिंट रिपोर्ट भी पुलिस की रिपोर्ट का हिस्सा होना चाहिए.

न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति डी के सिंह की पीठ ने कहा कि कई डाक्टरों पर दंड लगाए जाने के बावजूद मेडिको लीगल रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऐसी आ रही हैं, जिन्हें पढ़ना मुश्किल होता है और रिपोर्ट पढ़ने के लिए संबंधित डाक्टर को अदालत में बुलाना पड़ता है.

अदालत ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी डाक्टर को अदालत में बुलाना कि उसकी रिपोर्ट पर लिखावट खराब है, प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है.

हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में खराब लिखावट को लेकर तीन डॉक्टरों पर हाल ही में 5,000-5,000 रुपए का जुर्माना लगाया था.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi