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'मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने से ज्यादा कानून लागू करने की जरूरत'

राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक के बाद एक कानून बनाना समाधान नहीं है क्योंकि देश में पहले ही पर्याप्त कानून हैं. असल मुद्दा उन्हें लागू करने के बारे में हैं

Bhasha Updated On: Jul 18, 2018 11:10 AM IST

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'मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने से ज्यादा कानून लागू करने की जरूरत'

मॉब लिंचिंग पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संसद में इसे लेकर कानून बनाने के लिए कहा है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अलग-अलग विशेषज्ञों की राय बंटती हुई दिखाई दे रही है.

जहां कुछ विशेषज्ञों ने ‘मॉब लिंचिंग’ से निपटने के लिए इसे अच्छा कदम बताया , वहीं अन्य ने मौजूदा कानूनों को ही लागू करने पर जोर दिया.

पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि इस तरह के अपराधों से ‘विशेष’ और ‘प्रतिरोधक कानून’ के जरिए निपटा जाना चाहिए. इन घटनाओं से दुनियाभर में देश की छवि प्रभआवित हुई है.

'कानून बनाना नहीं है समाधान'

हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक के बाद एक कानून बनाना समाधान नहीं है क्योंकि देश में पहले ही पर्याप्त कानून हैं. मुख्य मुद्दा उन्हें लागू करने के बारे में हैं.

द्विवेदी ने कहा , ‘भीड़ का लोगों को पीट - पीटकर मार डालना हत्या है और इससे आईपीसी के तहत निपटा जाना चाहिए. कानूनों को लागू करने के लिए इच्छाशक्ति की जरूरत है.

रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की. उन्होंने कहा कि यद्यपि भारतीय दंड संहिता में प्रावधान हैं , लेकिन विशेष समस्या पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा , ‘ऐसे अपराधों के जरिए को देश के कानून को कुचलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.’

फैसले के समर्थन में क्या कहा गया?

रोहतगी ने कहा , ‘यह अच्छा कदम है. समस्या खतरनाक स्थिति तक पहुंच गई है. हाल में इस तरह के अपराधों के कारण काफी लोग मारे गए हैं. यह अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भारत की छवि को प्रभावित कर रहा है. लोगों को बैठकर इस बारे में सोचना चाहिए.’

सिन्हा ने भी ऐसी ही राय रखी. उन्होंने कहा एक सख्त कानून न होने के चलते भीड़ बिना किसी डर के कानून अपने हाथ में ले लेती है, जो समाज के लिए बड़ी समस्या है.

उन्होंने कहा , ‘यही उचित समय है और इस तरह के मुद्दों से निपटने के लिए कुछ निर्देश की आवश्यकता थी.’ उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद कानून इतने निश्चित नहीं थे.

उन्होंने कहा , ‘बदलते समय के साथ नई उभरती समस्याओं से निपटने के लिए नए कानूनों की आवश्यकता थी.’

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