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PM मोदी की घोषणा से पहले थाईलैंड ने BIMSTEC Exercise को कहा था 'NO'

थाई रक्षा अधिकारियों ने आर्थिक कारणों का हवाला देकर पुणे में संपन्न हुए इस सैन्य अभियान से अपने पांव पीछे खींचने की बात कही थी

Updated On: Sep 19, 2018 01:47 PM IST

FP Staff

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PM मोदी की घोषणा से पहले थाईलैंड ने BIMSTEC Exercise को कहा था 'NO'

नेपाल के बाद थाईलैंड ने भी हाल ही में पुणे में संपन्न साझा सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास में हिस्सा नहीं लिया. सूत्रों के अनुसार थाईलैंड ने भारत को इस बात की पूर्व सूचना दे दी थी. उन्होंने कहा कि थाईलैंड के रक्षा मंत्री ने बीते 27 अगस्त को भारतीय रक्षा मंत्रालय को इसकी सूचना दे दी थी. थाई रक्षा अधिकारियों ने आर्थिक कारणों का हवाला देकर विदेश में होने वाले इस सैन्य अभियान से अपने पांव पीछे खींचने की बात कही थी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके 3 दिन पहले प्लेनरी अधिवेशन में साझा रूप से बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक कोऑपरेशन (बीआईएमएसटीईसी) सैन्य अभ्यास की घोषणा की थी.

सामान्य तौर पर, थाईलैंड के सुरक्षाबल द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लेते रहे हैं. लेकिन इसकी रूपरेखा साल भर पहले तय हो जाती है. सूत्रों ने कहा, सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लेने के लिए फंड पहले जारी हो जाते हैं. थाईलैंड की सिस्टम में इस तरह के सैन्य अभ्यास आखिरी समय में तय नहीं किए जा सकते.'

सूत्रों ने कहा, इस साझा सैन्य अभ्यास में थाईलैंड ने हिस्सा न लेने की प्रमुख वजह अपनी आर्थिक मजबूरियां गिनाई थीं. भारत ने यह जानते हुए भी 30 अगस्त को हुए प्लेनरी अधिवेशन में बीआईएमएसटीईसी सैन्य अभ्यास की घोषणा की. प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम में इसके इस वर्ष भारत में होने का स्वागत किया था.

पुणे में एक हफ्ते तक चला था 7 देशों का BIMSTEC सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास

बीआईएमएसटीईसी के 7 सदस्य देशों के लिए पुणे में 10 से 16 सितंबर तक सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित किया गया था. इसमें भारत के अलावा पड़ोसी देश श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और भूटान की टुकड़ी ने हिस्सा लिया था. हालांकि इसमें शरीक नहीं होने वाले नेपाल और थाईलैंड ने अपनी जगह अपने पर्यवेक्षकों को भेजा था.

इस साझा सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के जरिए एक्ट ईस्ट नीति पड़ोसी दक्षिण पूर्व एशियाई उप-क्षेत्र के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के माध्यम से भारत की ओर से अपने प्रभाव को बढ़ावा देने का प्रयास है.

बीआईएमएसटीईसी को मूल रूप से आर्थिक पहल के रूप में माना गया था, लेकिन इसने संवाद और सहयोग के लिए संस्थागत तंत्र की स्थापना समेत राजनीतिक, सामरिक और सांस्कृतिक आयाम हासिल किया है.

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