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क्या राहुल गांधी ने कभी खुद से सवाल पूछा है?

एक विपक्षी नेता के तौर पर राहुल सरकार से सवाल करेंगे इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन कम से कम उन्हें वो आरोप लगाने से बाज आना चाहिए जो पिछली कई सरकारों के भ्रष्टाचार के नतीजे हों

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Jan 23, 2018 10:54 PM IST

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क्या राहुल गांधी ने कभी खुद से सवाल पूछा है?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ट्विटर वॉल पर एक खबर ट्वीट कर पीएम मोदी से ये सवाल पूछा है कि आखिर देश की 1 प्रतिशत आबादी के पास 73 प्रतिशत संपत्ति क्यों है? राहुल गांधी ने पीएम पर तंज करते हुए ये ट्वीट किया है.

एक विपक्षी नेता के तौर पर राहुल गांधी का ये ट्वीट और उसमें निहित सवाल जायज हैं. लेकिन क्या राहुल गांधी ट्वीट करते हुए कभी इस बात का ख्याल करते हैं कि भारत की आजादी के 70 सालों में करीब आधे समय तक उनके परिवार के लोग ही देश में पीएम के पद पर रहे हैं. क्या ये 73 प्रतिशत संपत्ति 1 प्रतिशत लोगों के पास पिछले तीन सालों में ही पहुंची है या फिर ये प्रक्रिया पहले से चल रही थी? परिवार के अन्य लोगों की बात छोड़ भी दें तो राहुल गांधी के सांसद रहते हुए जो यूपीए की पिछली सरकार थी उसमें भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित हुए थे, क्या उसकी जिम्मेदारी से वो भाग जाएंगे? क्या लाखों करोड़ के घोटालों में देश की 73 फीसदी संपत्ति नहीं आती?

'जब केंद्र सरकार से एक 1 रुपए चलता है तो जरूरतमंद तक 15 पैसे ही पहुंचते हैं'. ये बात किसी और ने नहीं बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के स्व. पिता राजीव गांधी ने कही थी. राहुल गांधी ने ही इसमें एक डिग्री और बढ़ाते हुए कुछ साल पहले कहा था कि केंद्र सरकार से एक रुपए चलता है तो मात्र 5 पैसा जरूरतमंद तक पहुंचता है. तो राहुल गांधी को ये सवाल बजाए नरेंद्र मोदी से पूछने के खुद से भी पूछना चाहिए कि आखिर देश की ऐसी हालत क्यों हुई है? क्योंकि देश की संपत्ति किसी पार्टी के लिए नहीं है चाहे वो कांग्रेस हो या बीजेपी.

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वर्तमान सरकार की खामियों पर चर्चा होनी ही चाहिए लेकिन सालों से चले आ रहे एक भ्रष्टाचारी सिस्टम को किसी एक व्यक्ति पर मढ़कर खुद चालाकी से निकल जाने की कला को जनता बेहतर तरीके से जानती है. शायद यही कारण है कि अपने चुनावी दौरों के दौरान भी राहुल ऐसे सवाल लोगों के बीच फेस करते हैं.

खुद सालों जिम्मेदारी से बचते रहे राहुल

कोई नेता अपने सबसे प्रखर रूप में तब सामने आता है जब वो सत्तासीन होता है. शासन के दौरान उसके कई रूप निकल कर सामने आते हैं कहीं मजबूत तो कहीं कमजोर. जैसे जो इंदिरा गांधी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बेहद मजबूत नेता के तौर पर दिखाई देती हैं वहीं शिमला समझौते में एक कमजोर डिप्लोमैट साबित होती हैं. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि एक बेहतर नेता मौका मिलते ही मौके को लपकता है और जो कुछ कर सकता है अपनी पूरी ताकत के साथ करता है.

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तस्वीर राहुल गांधी की फेसबुक वॉल से साभार

राहुल गांधी भारतीय राजनीति के अलहदा नेता हैं जो 2004 से 2014 तक की अपनी दस साल की सरकार के दौरान कोई भी पद लेने से बचते रहे. वो इकलौते नेता हैं जिन्हें देश का एक बड़ा कांग्रेस प्रेमी वोटर समूह पीएम के तौर पर सालों से देखना चाहता है लेकिन वो नेपथ्य में ही रहकर निशाने साधते रहते हैं. दिलचस्प रूप से राहुल गांधी अपनी भी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं.

एक बार तो संसद की कार्रवाई के दौरान ही राहुल गांधी ने अपनी यूपीए सरकार पर आरोप मढ़ दिए थे. जब उन्होंने महाराष्ट्र की एक महिला कलावती का जिक्र कर अपनी ही सरकार को सकते में डाल दिया था. इसके बाद साल 2013 में दागी जनप्रतिनिधियों पर आए एक बिल को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फाड़ दिया था. तब भी पीएम मनमोहन सिंह की बहुत किरकिरी हुई थी. राहुल का ये कदम बेहतर तो था लेकिन इसके बाद वो फिर नेपथ्य में चले गए.

अच्छा, ऐसा भी नहीं है कि राहुल गांधी को सपोर्ट करने वालों की कमी हो. जब भी राहुल गांधी ने कुछ अच्छा बोला है तो मीडिया की तरफ से उन्हें बेहतरीन रिसेप्शन मिला है. कांग्रेस के एक बड़े वर्ग में भी ये बात लगातार उठती है कि राहुल गांधी को बैकफुट पर आकर नहीं खेलना चाहिए. सालों की राजनीति के बाद पिछले दिनों गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने बढ़िया चुनाव प्रचार किया और कांग्रेस ठीक-ठाक सीटें लेकर आई. लेकिन पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बीसियों मंदिर के चक्कर काटे. मतलब चुनाव में स्थिति तो मजबूत की लेकिन पूरा चुनाव हिंदुत्व को प्रतीक के तौर पर रखकर लड़ा.

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मतलब एक नेता के तौर पर जब राहुल ने खुद मैदान में आने की ठानी तो अपना एजेंडा छोड़कर बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे की तरफ जाना पड़ा! सालों की सेकुलरिजम की लड़ाई सिर्फ एक चुनाव जीतने में गंवाने की चिंता भी नहीं की. सोनिया गांधी के उस आह्वान को भी धूल-धुसरित कर दिया जब उन्होंने 2014 के चुनाव में तत्तकालीन बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को हराने के लिए सेकुलर वोटों के एकजुट होने की डिमांड की.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi arrives for a press conference over the claims by the four senior judges of Supreme Court at AICC in New Delhi on Friday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI1_12_2018_000224B)

एक विपक्षी नेता के तौर पर राहुल सरकार से सवाल करेंगे इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन कम से कम उन्हें वो आरोप लगाने से बाज आना चाहिए जो पिछली कई सरकारों के भ्रष्टाचार के नतीजे हों.

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