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क्या एक ‘बेरहम दिल’ मंत्री ने तौकीर अकरम को खुदकशी के लिए मजबूर किया?

तौकिर की निजी परेशानियों से लेकर एक मंत्री द्वारा की गई तथाकथित बेइज्जती को भी बताया जा रहा है हालांकि उन्होंने जो सुसाइड नोट लिखा है उसमें न तो उन्होंने कोई नाम लिया है और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया है

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Nov 20, 2017 08:11 PM IST

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क्या एक ‘बेरहम दिल’ मंत्री ने तौकीर अकरम को खुदकशी के लिए मजबूर किया?

अभी पिछले दिनों बिहार के एक अफसर तौकीर अकरम की मौत से पूरे बिहार  में सनसनी फैल गई है. हालांकि उन्होंने जो सुसाइड नोट लिखा है उसमें न तो उन्होंने कोई नाम लिया है और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया है. फिर भी इसको लेकर कई तरह का कयास लगाए जा रहे हैं.  इसके पीछे की वजहों में तौकिर की निजी परेशानियों से लेकर एक मंत्री द्वारा की गई तथाकथित बेइज्जती को भी बताया जा रहा है.

कहते हैं ईमानदार अफसर कभी भी अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं करता है. वह मर जाएगा, मिट जाएगा पर झुकना स्वीकार नहीं करेगा. इसको साबित किया बक्सर के भू-अर्जन पदाधिकारी सह डीएम के ओएसडी तौकीर अकरम ने जब एक घोषित ‘बेरहम दिल’ मंत्री ने बीते 2 नवबंर को कई लोगों के सामने उसे बिना मतलब बुरी तरह अपमानित किया.

मिजाज से स्वाभिमानी सरकारी मुलाजिम ने 19 नवबंर को सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर सिंलिग फैन से लटकर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली. बताते चले की दुर्योग और किसी दूसरे कारण से तीन महीने पहले ही बक्सर के डीएम मुकेश पांडेय ने भी नोएडा में ट्रेन से कटकर अपनी जान दे दी थी. तौकीर अकरम मुकेश पांडेय के ओएसडी थे.

क्या थी घटना?

महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर के रामरेखा घाट पर हर साल की तरह इस साल भी देव दीपावली को भव्य तरीके से मनाने को लेकर बैठक चल रही थी. मीटिंग में शिरकत कर रहे मंत्री वोट बढाने की खातिर चाह रहे थे कि इस बार बक्सर के हर घाट पर देव दीपावली कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा आरती हो.

अकरम का कहना था कि प्रशासन के सामने इतने बड़े आयेाजन के लिए धन नहीं है. मंत्री ने सुझाया कि ‘आप प्राइवेट पूजा कमिटी को इस कार्य के लिए चंदा बटोरने में मदद करे. वे लोग गंगा आरती कर-करा लेंगे.'

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बक्सर के दिवंगत डीएम मुकेश पांडेय, तौकीर अकरम इनके ओएसडी थे

जब तौकीर अकरम ने इस सुझाव का विरोध किया तो एक प्रत्यक्षदर्शी अफसर के अनुसार मंत्री जी अकरम की तरफ ऊंगली दिखाते हुए गरजे और अफसर के धर्म को टारगेट करके अनाप-शनाप बकने लगे. कहते हैं कि खून का घूंट पीकर अकरम बैठक से बाहर निकल गए और सीधे अपने आवास पहुंचे और इस भंयकर अपमान को दिमाग से हटाने के लिए तकिए से चेहरा छुपाकर काफी रोए.

उनके साथ काम करने वाले एक अधिकारी बताते हैं कि उस घटना के बाद अकरम बेहद असहज हो गए थे. अपने सहकर्मियों से अक्सर कहा करते थे कि इस तरह से उनको कभी किसी ने अपमानित नहीं किया है. घर के सदस्यों का भी कहना है कि पिछले 15 दिनों से अकरम काफी तनाव में रहते थे. लेकिन पूछने पर कहते थे कि कोई खास बात नहीं है.

परेशानी की ये वजहें भी थीं

बहरहाल, ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिनका मानना है कि पिछले एक वर्ष से पूरा सैलरी नहीं मिलने के कारण तौकीर अकरम मानसिक रूप से परेशान रहते थे. साथ ही 12 वर्ष शादी होने के बाद भी बाप नहीं बन पाने का टीस भी तन-मन को व्यथित करता था.

बक्सर जिले में बतौर डिप्टी कलेक्टर तौकीर की पदस्थापना 2013 में हुई थी. तेजतर्रार और ईमानदार प्रवृति के होने के कारण इन्हें भू-अर्जन विभाग दे दिया गया ताकि एन एच 84 को फोर लेन बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण में गति आए और किसानों को समय पर बिना परेशान हुए मुआवजा मिल जाए. तत्कालीन डीएम ने अकरम को अपना ओएसडी भी रख लिया. तब से ही अकरम दोनों पद संभाल रहे हैं.

इसी बीच वे एक पुराने मामले में फंस गए. 1972-73 में एक तटबंध बनाने के लिए किसानों का जमीन अधिग्रहण किया गया था. 1984 में तटबंध बनकर तैयार भी हो गया. लेकिन सदर प्रखंड के उमरपुर गांव के किसानों को मुआवजा नहीं मिला. सिक्किम हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस और उमरपुर निवासी विनोद कुमार राय इस मामले को कोर्ट ले गए. कोर्ट ने मुआवजा दिलवाने के अलावे भू-अर्जन विभाग को दोषी ठहराते हुए पदाधिकारी तौकीर अकरम का 70 प्रतिशत वेतन चालान के साथ कोर्ट में जमा करने आदेश दिया. बाकी 30 प्रतिशत गुजारा करने के लिए मिलता था.

कुछ दिन पहले पटना हाई कोर्ट ने विभाग को पूरा वेतन देने का आदेश दिया था. लेकिन इस आदेश के खिलाफ जस्टिस विनोद कुमार राय ने बीते 17 तारीख को पुनः वेतन रोकने के लिए अपील किया है. कहते हैं इसके चलते भी अकरम तनाव में रहते थे.

बहरहाल, जिला प्रशासन का कहना है तौकीर अकरम पर किसी भी प्रकार का वर्क लोड नहीं था. और न ही किसी नेता या बड़े अधिकारी का अनैतिक और अनुचित कार्य करने के लिये उनपर कोई दबाव था. अभी तीन दिन पहले ही अकरम अपने माता-पिता को पटना से लेकर बक्सर आए थे. दूसरी तरफ अकरम की मां नरगिस खातून का आरोप है अकरम अपना बदली कराना चाहते थे. प्रयास भी किया लेकिन सफल नहीं हुआ क्योंकि किसी बड़े अधिकारी ने ट्रांसफर के लिए 8 लाख रुपए के घूस की मांग की थी जिसे पूरा करना अकरम जैसे ईमानदार अफसर के लिए संभव नहीं था. इसको लेकर अकरम चिंतित रहता थे.

Patna: Bihar chief minister Nitish Kumar addressing a press conference in Patna on Monday. PTI Photo (PTI9_4_2017_000062B)

सीएम ने दिए जांच के आदेश, आरजेडी ने की सीबीआई जांच की मांग

इधर हृदय विदारक घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को जांच का आदेश दिया. आरजेडी ने भी इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है.

पटना सचिवालय के गलियारे में तैर रही हवा भी इस खबर को पुष्ट कर रही है कि अपमानित किए जाने के बाद से अकरम काफी तनाव में थे. जानकार तो यहां तक बता रहे हैं कि अकरम लगभग 3 बार पटना आकर एक उच्च पदाधिकारी से मिले और अपनी व्यथा का इजहार करते हुए उन्होंने तत्काल अपने ट्रांसफर की गुजारिश भी की थी.

बातचीत में बक्सर के कई असरदार लोगों ने कहा ‘बहुत ही काबिल, ईमानदार और कठजीव अफसर थे तौकीर अकरम. जरूर दिल व दिमाग पर किसी ने गंभीर गोला दागा है, मानसिक रूप से परेशान किया है जिसे ढोकर वो जिंदा नहीं रहना चाहते थे’.

जब निराशा हाथ लगी तो जमीर को गिरवी नहीं रखकर अपनी डयूटी करने वाला निडर अफसर तौकीर अकरम मौत से मिलना ही उचित समझा. कइयों की मानसिकता से भिन्न अकरम अपने खिलाफ ‘गुनाह’ करने वाले को भी माफीनामा दे दिया है. संभवतः उस नेक दिल स्वर्गवासी अफसर की ख्वाइश रही हो कि ‘गुनाहगार’ और ताकतवर मंत्री उसके खुदकशी से सबक लेकर अपनी मानसिकता को सुधारे. तभी तो उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘कोई जिम्मेवार नही, मैं खुद ही मौत से मिलना चाहता हूं’.

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