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जानिए पुराने नोटों से क्या कर रहे हैं तमिलनाडु के कैदी?

सजा काट रहे कैदियों को एक महीने में 25 दिन फाइल पैड बनाने का काम दिया जाता है. उन्हें आठ घंटे तक काम करने के लिए 160 रुपए से 200 रुपए तक मिलते हैं

FP Staff Updated On: Jan 07, 2018 10:43 PM IST

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जानिए पुराने नोटों से क्या कर रहे हैं तमिलनाडु के कैदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद लगातार पुराने नोटों के बारे में चर्चा शुरू हो गई थी. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय था कि पुराने नोटों का क्या किया गया है? अब शायद इस तरह से सवालों का जवाब मिल गया है. तमिलनाडु के चेन्नई स्थित पुजल सेंट्रल जेल के कैदी पुरानी करेंसी को ठिकाने लगा रहे हैं मतलब इस करेंसी से स्टेशनरी का सामान बनाया जा रहा है.

पीटीआई के मुताबिक राज्य सरकार और अन्य सरकारी दफ्तरों के लिए पुरानी करेंसी से स्टेशनरी बनाई जा रही है. रोजाना करीब 25-30 कैदी पुराने नोटों से स्टेशनरी का सामान बना रहे हैं. इन नोटों से फाइल पैड बनाए जा रहे हैं.

तमिलनाडु जेल विभाग के डीआईजी ए मुरुगेसन ने पीटीआई को बताया, 'भारतीय रिजर्व बैंक ने हमें चलन से बाहर हुए टुकड़े-टुकड़े में फटा हुआ 70 टन नोट देने की पेशकश की थी. पुजहल जेल को अब तक इनमें से नौ टन नोट मिले हैं. हम चरणबद्ध तरीके से इन नोटों को लाएंगे’ फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन प्रतिबंधित नोटों का इस्तेमाल हो चुका है.

Chennai: An inmate and a police person displaying file pads, made with demonetised notes, supplied by Reserve Bank of India, at Puzhal Central Prison in Chennai. PTI Photo by R Senthil Kumar (STORY MDS03) (PTI1_7_2018_000050B)

पुराने नोटों से बनी स्टेशनरी (फोटो: पीटीआई)

सजा काट रहे कैदियों को एक महीने में 25 दिन फाइल पैड बनाने का काम दिया जाता है. उन्हें यहां आठ घंटे तक काम करने के लिए 160 रुपए से 200 रुपए तक रोजाना मेहनताना दिया जाता है. मेहनताना इस बात पर निर्भर करता है कि वे कुशल हैं या अर्द्धकुशल हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि राज्य सरकार के विभागों और एजेंसियों में इन स्टेशनरी सामानों का उपयोग हो रहा है.

जेल अधिकारियों का कहना है कि इसका एक उद्देश्य हस्त-निर्मित स्टेशनरी को बढ़ावा देना भी है. इस प्रकार की स्टेशनरी बनाने वाला पुजल सेंट्रल जेल अकेला है. अन्य किसी भी जेल में पुराने नोटों की मदद से इस प्रकार की स्टेशनरी नहीं बनाई जा रही है.

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