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आखिर जंतर-मंतर पर किसान नरमुंड लिए प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

कर्ज की समस्या से तंग आकर नरमुंड लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं किसान

Updated On: Mar 25, 2017 01:15 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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आखिर जंतर-मंतर पर किसान नरमुंड लिए प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

तमिलनाडु में किसानों की लगातार हो रही मौतों की गूंज अब दिल्ली में भी सुनाई देने लगी है. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश की संसद तक किसानों की हो रहे मौतों पर चर्चा शुरू हो गई है.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के कई जिलों से आए किसान नरमुंड के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि सरकार उनका कर्जा माफ करे और तमिलनाडु को एक विशेष राहत पैकेज देने की घोषणा करे.

केंद्र से सूखा राहत पैकेज की मांग

लगभग 100 की संख्या में आए किसानों ने केंद्र सरकार से 40 हजार करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज देने की मांग की है. जंतर-मंतर पर धरना दे रहे किसानों का कहना है कि बैंकों और स्थानीय कर्जदाताओं की प्रताड़ना से तंग आकर तमिलनाडु के किसान अब आत्महत्या करने को विवश हो गए हैं. पिछले कुछ महीनों में लगभग 300 किसानों की मौत हो गई है.

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हरे रंग की लुंगी पहने तमिलनाडु के इन किसानों के विरोध करने के तौर-तरीके ने जंतर-मंतर को अचानक सुर्खियों में ला दिया है. जंतर-मंतर पर आने-जाने वाला हर शख्स किसानों के इस विरोध प्रदर्शन का सहभागी बन रहा है. पिछले 10 दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन को भारतीय मीडिया के साथ विदेशी मीडिया में भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है.

स्थानीय तमिल लोगों का साथ

tamilnadu farmers

प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली में रह रहे तमिल लोगों का भी साथ मिल रहा है. जंतर-मंतर पर किसानों को मदद के लिए पहुंचे जगदीश फर्स्ट पोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘इन किसानों की पहली जरूरत पानी है. तमिलनाडु में लोगों के लिए न तो पीने के लिए पानी है न ही खेती के लिए.

तमिलनाडु का एक बड़ा हिस्सा सूख चुका है. इन लोगों को पानी अगर मिल जाए तो ये लोग फिर से खेती-बाड़ी शुरू करेंगे और बैंक का कर्ज भी खुद ही चुका सकेंगे. ये कर्ज चुकाना बगैर केंद्र सरकार के सहयोग से संभव नहीं है, क्योंकि तमिलनाडु में न तो बरसात हो रही है और न ही पानी है.’

जगदीश आगे कहते हैं, ‘तमिलनाडु की हालात पिछले 100 सालों में सबसे ज्यादा खराब होने वाली है. सूखे और कर्ज के कारण पिछले चार महीनों में लगभग 300 किसानों की मौत हो गई है.

मरने वाले ज्यादातर किसानों ने या तो आत्महत्या की है या फिर सदमे के कारण उनकी मौत हुई है. क्योंकि, इन लोगों ने प्राइवेट बैंकों या सरकरी बैंकों में गहने और जमीन गिरवी रख कर लोन लिया है. वह लोन अब चुका नहीं पा रहे हैं.’

तमिलनाडु सरकार को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी तमिलनाडु के किसानों की लगातार हो रही मौतों पर चिंता जाहिर करते हुए तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है. हाल ही में तमिलानाडु के नए सीएम ई पलानीसामी ने 2 हजार 247 करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज देने की घोषणा की है. जिसको किसान नकाफी बता रहे हैं.

प्रदर्शन कर रहे एक किसान जी. महादेवन फर्स्ट पोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘हमलोगों के पास ज्यादा खेत नहीं हैं. हममें से ज्यादातर किसानों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. हमारी मांग है कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए. सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए राहत पैकेज देने का ऐलान करे.’

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जी. महादेवन आगे कहते हैं, ‘मेरी उम्र 62 साल है. पिछले साल मेरी पत्नी ने तब आत्महत्या कर ली थी, जब बैंक के कर्मचारी ने मेरे घर पर आ कर कहा था कि आपने 6 साल पहले जो एक लाख रुपए का लोन लिया था लेकि अब वो कई गुना बढ़ गया है. अगर पैसे जमा नहीं कराए तो जमीन और घर नीलाम कर दिए जाएंगे. यह बात सुन कर पत्नी सदमे में चली गई. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पत्नी को मृत घोषित कर दिया.’

दामोदरन की कहानी भी महादेवन जैसी

tamilnadu farmers

जंतर-मंतर पर ही एक और किसान दामोदरन ने बताया, ‘हमने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से साल 2006 में साढ़े चार लाख रुपए कर्ज लिया था. बैंक वालों ने सूद सहित साढ़े 13 लाख रुपए कर्ज बना दिया. बैंक वाले नोटिस लेकर पत्नी के पास आए और कहा कि जब आप लोग बैंक का कर्जा चुका नहीं पा रहे तो जिंदा क्यों हैं? इस बात से पत्नी डिप्रेशन में आ कर साल 2012 में आत्महत्या कर ली थी.’

दामोदरन को एक लड़का और एक लड़की है. पैसे के अभाव में दोनो बच्चों की पढ़ाई छूटने की कगार पर है. लड़की ने बारहवीं की परीक्षा दी है और लड़के ने दसवीं की. दामोदरन कहते हैं, ‘बेटी नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहती है लेकिन असमर्थ हूं.’

50 तोला सोना गिरवी रख कर ट्रैक्टर खरीदा

पलनीस्वामी ने बताय, ‘मेरे साढ़ू ने तीन साल पहले 50 तोला सोना गिरवी रख कर ट्रैक्टर खरीदा था. कर्ज न चुका पाने की वजह से बैंक ने वो सोना नीलाम कर दिया. मेरे साढ़ू ने सदमे में आकर आत्महत्या कर ली.’

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले ज्यादातर किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार राहत पैकेज देकर तमिलनाडु के किसानों को बचा सकती है. कावेरी नदी को सूखने से रोकने को लेकर कावेरी प्रबंधन समिति का गठन सहित नदियों को जोड़ने की मांग भी इनकी प्रमुख मांगो में शामिल हैं.

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