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ताजमहल विवाद: तुम हमें काज दो, हम तुम्हें ताज देंगे...

राजनीति की अपनी सीमाएं हैं लेकिन जोगी सिर्फ राजनीतिज्ञ नहीं हैं, वह गोरखनाथी परंपरा के उत्तराधिकारी भी हैं. जो हिंदू-मुस्लिम में फर्क नहीं करता.

Nazim Naqvi Updated On: Oct 19, 2017 12:05 PM IST

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ताजमहल विवाद: तुम हमें काज दो, हम तुम्हें ताज देंगे...

अरे अब मीडिया का क्या है उसे तो नुक्कड़ और चौराहों की बहस तक अपने आपको पहुंचाना है. उसका बाजार ही वही है. पिछले सप्ताह सांसद संगीत सोम का एक बयान आया. मीडिया के मंच पर पहुंचा. सोशल मीडिया ने लपका और नुक्कड़ पर खड़े होरी की हथेली से चिपके छोटे से स्क्रीन पर चमका.

चलो प्लास्टिक की थैली में अभी-अभी आई, खौलती हुई चाय में कुछ तो स्वाद आया. चर्चा तो उसी बात पर की जा सकती है जिससे कोई पास का सम्बन्ध हो. अब अपने कुर्बान अली, टांग को साइकिल का स्टैंड बनाए, खोखे के दुकादार से गुफ्तुगू में हुए ये थोड़े ही कह रहे होंगे कि लाला आज दुकान वक़्त पर बंद कर लेना, नार्थ-कोरिया के किम जोंग ने अमरीका को धमकी दे दी है कि वह न्यूक्लियर हमला, कभी भी कर सकता है.

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हां ये जरूर कह सकता है कि 'लाला हम टमाटर के भाव पूछ रहे हैं, तुम ताज महल के बताय रहे हो'. कुलमिलाकर स्कूल के बस्ते से लेकर होरी के मोबाईल तक, मंच तैयार है. अचानक लालकिला और हैदराबाद लेकर ओवैसी मैदान में कूद पड़े. पूरी खबर को एक और राउंड मारने का मौका मिल गया. इसी बीच कुछ पुराने बयान (आजकल सोशल मीडिया ने इसमें महारत हासिल कर ली है) विवाद के तालाब में उतराने लगे, इनमें योगी आदित्यनाथ और सुब्रमण्यम स्वामी से लेकर न जाने कौन-कौन, क्या-क्या बोल रहा है और किन-किन स्थितियों में बोल रहा है.

Yogi Adityanath

बहरहाल योगी ने यह कहकर कि ताज महल भारत की संतानों ने अपने खून-पसीने से बनाया है, ये भारत का है, और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है, सारा मजा किरकिरा कर दिया. कुछ लोग तो अभी जल्दी-जल्दी इतिहास के पन्ने ही पलट रहे थे कि कोई नया शोशा ढूंढ लाएं कि कथा ही समापन पर आ गई.

योगी आदित्यनाथ ने बिल्कुल सही कहा, ताज महल शाहजहां ने नहीं बनाया, उसने तो इसे बनवाया. बनाया तो इसे, उन हजारों मजदूरों और सैकड़ों कारीगरों ने है जो इस देश के पूत हैं. उनके हुनर का शाहकार है ताज-महल.

वक्त की भूख ने वक्त के शहंशाह से कहा, हमें खाना दो, हम तुम्हें इसके बदले में ताज महल देंगे. दरअसल, एक सच बात कहकर योगी ने उस परंपरा का निर्वाह किया है जो गोरखनाथ की परंपरा है. वह परंपरा जिसका दर्शन अपने मानने वालों को यह इजाजत ही नहीं देता कि वह नफरत की सियासत फैला सकें. इस संबंध में मनोज सिंह ने एक पत्रिका में गोरखनाथ और उनकी नाथ परंपरा को जमीन पर उतर कर समझा है और लिखा है. इसके अलावा हजारी प्रसाद द्विवेदी ने 'नाथ-संप्रदाय' पर लिखी अपनी पुस्तक में भी काफी जानकारियां दी हैं.

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इतिहास किस्से-कहानियों जैसा जरूर होता है लेकिन सिर्फ किस्सा-कहानी नहीं होता. इतिहास दरअसल वो है जिसे बदला नहीं जा सकता. योगी सच बोल रहे हैं तो देश के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी भी उसी सुर में उसका समर्थन करते हुए दिखते हैं, जब वो ट्वीट करते हैं, 'कोई भी देश विकास की कितनी भी चेष्टा करे, लेकिन वो तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक वो अपने इतिहास, अपनी विरासत पर गर्व करना नहीं जानता. अपनी विरासत छोड़कर आगे बढ़ने वाले देशों की पहचान खत्म होनी तय है'.

नाथ-संप्रदाय का जन्म आदिनाथ से होता है, यानी शिव जी ने मतस्येंद्र नाथ को ज्ञान दिया. उन्हें मीननाथ या मछिन्दरनाथ भी कहते हैं. आठवीं और नवीं सदी के बीच जन्मे, आचार्य मत्स्येन्द्रनाथ को हठयोग का परम गुरु माना जाता है. उनके सबसे विश्वस्त और करीबी शिष्य, जो बारह वर्ष की आयु से उनके ही साथ रहे, गोरखनाथ कहलाए.

गोरखनाथ से बारह पंथी मार्ग, नाथ संप्रदाय चला, और इतना लोकप्रिय हुआ कि देश में जगह-जगह फैल गया. इस नाथ संप्रदाय की यह खास विशेषता थी कि इसमें मुस्लिम-जोगियों का भी एक बड़ा तबका शामिल था, और अभी भी है. इतिहासकार लिखते हैं कि गोरखनाथ ने ब्राह्मणवाद, बौद्ध परंपरा में अतिभोगवाद व सहजयान में आई विकृतियों के खिलाफ और समाज में फैले आडंबरों का विरोध किया और हिन्दू-मुस्लिम एकता की नीवं रखी. इसीलिए हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग बल्कि कहीं-कहीं तो मुसलमान बड़ी संख्या में, नाथ सम्प्रदाय में शामिल हुए.

gorakhnath mandir

गोरखनाथ मंदिर

जोगी-मुस्लिम, गेरुए कपड़े पहनते हैं. यह लोग घूम-घूम कर, गोरखनाथ-मछिन्दर संवाद, गोरखबानी, राजा भर्तहरि और गोपीचन्द्र की कथाएं गाते हैं, कुछ कबीर और ऐसे सूफी संतों को भी गाते हैं जिनपर गोरखनाथ का प्रभाव पड़ा. उत्तर-प्रदेश में गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बलरामपुर में इनके गांव हैं. शोध बताता है कि देश भर में इन जोगियों का जमावड़ा है. सिर्फ एक ही जनगणना (1921 की) में मुस्लिम जोगियों का हवाला, अलग से मिलता है जिसमें उनकी आबादी लगभग तीस हजार है.

योगी आदित्यनाथ जिस परंपरा को लेकर चल रहे हैं, उस परंपरा पर मनोज सिंह ने अपने लेख में रजनीश (ओशो) और सुमित्रानंदन पंत के बीच का एक संवाद शामिल किया है जिसमें रजनीश कहते हैं, 'गोरखनाथ से इस देश में नया सूत्रपात्र हुआ. गोरख के बिना न कबीर हो सकते हैं, न नानक, न दादू, न वाजिद, न फरीद न मीरा. भारत की सारी संत-परंपरा गोरख की ऋणी है. गोरख ने जितना आविष्कार मनुष्य के भीतर-खोज के लिए किया उतना शायद किसी ने नहीं'.

शोध लेखों में यह भी मिलता है कि देश का अकेला गोरखनाथ मंदिर जिस जमीन पर बना है उसे अवध के नवाब आसिफ-उ-दौला ने दान किया था. आज भी इस मठ में मुस्लिम जोगी, इसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. एक विवरण अकबर के जमाने का भी मिलता है, 'आगरा शहर के बाहर अकबर ने दो स्थानों का निर्माण कराया एक था 'खैरपुरा' जहां गरीब मुस्लिमों को और दूसरा 'धरमपुरा' जहां गरीब हिंदुओं के भोजन की व्यवस्था थी. लेकिन जल्दी ही, जोगियों की तादाद देखते हुए उसे एक तीसरा स्थान बनाना पड़ा, जो 'जोगीपुरा' कहलाया. यह आज भी नजीबाबाद के पास है और शिया संप्रदाय की आस्था का केंद्र है.

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इतिहासकार गोरखनाथ का समय 13वीं और 14वीं शताब्दी बताते हैं. गोरखनाथी जो सबद गाते हैं उनमें एक सबद का उल्लेख 'वेरोनिक बोइलियर' अपने लेख में इस तरह करते हैं – सबद 14: जन्म से हिंदू हूं, समझ से योगी और बुद्धि से मुस्लिम. यानी ये वह समय था जब एक व्यक्ति आस्था और धर्म के तीन रंग ओढ़ सकता था.

Patna: Prime Minister Narendra Modi addressing at the Centenary Celebrations of Patna University, in Patna, Bihar on Saturday. PTI Photo (PTI10_14_2017_000043B)

दरअसल ये है वो भारत जो हमारी विरासत है और बकौल नरेंद्र मोदी- ये है वो विरासत, जिसपर गर्व किए बगैर हम आगे नहीं बढ़ सकते. इससे पहले भी हमारे पास इतिहास था, उससे पहले भी कोई विरासत जरूरत रही होगी. ये भी सच है कि गोरखनाथ तक आते-आते उस इतिहास, उस विरासत में परिवर्तन आए होंगे, खुद गोरखनाथ ने कई परंपराओं का विरोध किया, लेकिन वह परिवर्तन, सहज था, ठूंसा हुआ नहीं था.

गोरखनाथ के समय में जो इस्लाम भारत पहुंचा, उसके पास नैतिकता का दिशासूचक था. तब तक उस इस्लाम में अरब का ठूंसा हुआ 'अहम्' नहीं शमिल हुआ था. तब तक इस्लाम को हुकूमत करने की जिद नहीं हुई थी. इसीलिए उसे आदर मिला, सम्मान मिला.

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उसी परंपरा से आते हैं योगी. इसलिए सच कहते हैं कि इसी मिट्टी से बने हाथों ने दुनिया का ये अजूबा 'ताजमहल' बनाया. राजनीति की अपनी सीमाएं हैं लेकिन जोगी सिर्फ राजनीतिज्ञ नहीं हैं, वह गोरखनाथी परंपरा के उत्तराधिकारी भी हैं. जो हिंदू-मुस्लिम में फर्क नहीं करता. योगी को सच तो बोलना ही पड़ेगा.

वैसे इन सब बातों से अलग, कहानी तो सिर्फ इतनी है, अगर उत्तर-प्रदेश की पर्यटन-विकास मंत्री रीता बहगुणा की बात को समझा जाय तो. रीता बहुगुणा ने ताज विवाद पर कहा, 'जबसे हमारी सरकार आई है हम ताज महल के लिए 156 करोड़ स्वीकृत कर चुके हैं.(उसका सौन्दर्यीकरण, वहां पार्किंग सुविधा और उसे पुराने किले से जोड़ने के लिए, वहां एक मुगल म्यूजियम बन रहा है), इसके लिए हमने वर्ल्ड बैंक ने भी हमें लोन दिया है, जिससे और भी काम शुरू होने हैं'.

Tags: Taj Mahal
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