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पहले शाहजहां का सिग्नेचर लाइए, फिर कीजिएगा ताजमहल पर दावाः SC

सीजेआई ने पूछा, 'भारत में इस बात का यकीन कौन करेगा कि ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है

Updated On: Apr 11, 2018 02:50 PM IST

FP Staff

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पहले शाहजहां का सिग्नेचर लाइए, फिर कीजिएगा ताजमहल पर दावाः SC

सुप्रीम कोर्ट ने मुगल बादशाह शाहजहां का दस्तखत मांगा है. ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाले सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट ने दिलचस्प आदेश दिया है. कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से मुगल शहंशाह शाहजहां का दस्तखत लाने को कहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शाहजहां का दस्तखत लाने के लिए वक्फ बोर्ड को एक हफ्ते का समय दिया गया है.

बता दें कि दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को बनाने के 18 साल बाद शाहजहां की मौत हो गई थी. उन्होंने अपनी पत्नी मुमताज की याद में यह मकबरा बनवाया था.

2010 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में जुलाई 2005 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ताजमहल को वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति बताया गया था.

इस ऐतिहासिक मकबरे का इतिहास खंगालते हुए सीजेआई ने पूछा, 'भारत में इस बात का यकीन कौन करेगा कि ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है? शाहजहां ने वक्फ़नामा पर दस्तख़त कैसे किए? यह आपको कब दिया गया?'

बोर्ड ने सीनियर एडवोकेट वीवी गिरी के जरिए दावा किया कि शाहजहां के दौर से ताजमहल पर वक्फ़ का हक़ है और वक्फ़नामे के तहत यह उनकी संपत्ति है. इसी दावे को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने चुनौती दी थी.

एएसआई की तरफ से एडवोकेट एडीएन राव ने कहा, 'उस वक्त वक्फ़नामा नहीं हुआ करता था.'

कोर्ट ने पूछा नजरबंदी में शहाजहां ने कैसे दस्तखत किए 

एडवोकेट राव ने कहा, '1858 की घोषणा के मुताबिक, ब्रिटिश महारानी ने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से यह संपत्ति ले ली थी. 1948 एक्ट के तहत, बाद में भारत सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया.'

सीजेआई, जस्टिस ए एम खावलंकर और डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने बोर्ड को याद दिलाया कि मुगल शासन खत्म होने पर ईस्ट इंडिया कंपनी को स्मारक का अधिकार मिल गया था. आजादी के बाद यह आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के नियंत्रण में आया.

सीजेआई दीपक मिश्रा ने शाहजहां द्वारा लिखे गए डॉक्युमेंट्स की मांग करते हुए कहा, 'नजरबंदी के दौरान शाहजहां आगरा किले की कोठरी से ताजमहल देखा करते थे. नजरबंदी में रहते हुए उन्होंने वक्फनामा साइन कैसे किया? हमें बादशाह द्वारा साइन किए गए कागज़ात दिखाइए.'

बता दें कि इससे पहले भी यूपी का एक शख्स खुद को मुगल वंशज बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया था. उसका दावा था कि वह ताजमहल का केयरटेकर है.

(साभारः न्यूज 18)

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