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इतिहास को एक ठुमके लगाने वाला तैमूर भी चाहिए!

सैफ-करीना का बच्चा तैमूर नया इतिहास भी तो लिख सकता है

Updated On: Dec 24, 2016 07:51 AM IST

Tarun Kumar

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इतिहास को एक ठुमके लगाने वाला तैमूर भी चाहिए!

किसी के घर जब किसी मासूम का आगमन होता है तो खुशियों से आस-पास माहौल चहक उठता है. किलकारियां गूंजते लगती हैं. पर एक मासूम ऐसा भी है जिसके इस जमीं पर आते ही कत्लो-गारत का इतिहास विवादों के कुलांचे भरने लगा.

सैफ-करीना के घर तीन किलो का एकफुटिया मासूम मेहमान क्या आया, सदियों पहले धरती को इस्लाम की तलवार से लाल करने वाला दुर्लभ लंगड़ा कातिल तैमूर लंग सनसनीधर्मी मीडिया की सुर्खियों में स्पेस बटोरने लगा.

सोशल नेटवर्क पर सक्रिय लाखों लोगों को तैमूर-सैफ-करीना प्रकरण पर लिखते-लिखते गश आने लगा है! तैमूर नामकरण के लिक्खाड़ विरोधियों और समर्थकों के बीच डिजिटल स्पेस में पानीपत, प्लासी, खानवा, तराइन की खूनी जंग जारी है. तैमूर ज़िंदा होता तो उसे सोशल मीडिया का रक्तरंजित मैदान देखकर खुद गश आने लगता!

तैमूर पर इतना हंगामा, हाय-तौबा, हाथमपाई, लानत-मलानत क्यों? क्या मध्यकालीन बर्बरता की एकरस घिनौने तैमूरी इतिहास की रुग्ण ऊब से मुक्ति के लिए एक ऐसे तैमूर की जरूरत नहीं है, जो अपने इश्किया अंदाज, पप्पी-झप्पी, लवेरिया अदाओं, नाच-गान, ठुमका-तड़का, डायलॉगबाजी, स्टंट आदि से हमें थ्रिल और रोमांच की दुनिया में ले जाए?

बड़ा होकर यही तैमूर बदलेगा इतिहास

kareena saif son taimur

जरा सोचिए, खून से सना बोझिल मुर्दा इतिहास सैफ-करीना को कितनी दुआ देगा, जिस दिन तैमूर बड़ा होकर लड़कियों पर चुंबन उड़ाएगा, अपने चाहने वालों को ऑटोग्राफ देगा, हवा में हाथ लहराकर फैन्स पर अभिवादन की बारिश करेगा, कयासधर्मी मीडिया को टीआरपीवर्धक मसाला परोसेगा.

उस दिन इतिहास कितना हल्का और फारिग महसूस करेगा, जब खून की नदियां बहाने वाले बर्बर तैमूर के उलट यह तैमूर हॉल में बैठे मनोरंजन और तफरीह प्रेमी लोगों से तालियों की उम्मीद में उनके सामने पेशेवर नचनिया-बजनिया की तमाम खूबियां पेश करेगा! भला ऐसा तैमूर किसे नहीं चाहिए!

तैमूर! यानी इतिहास का दुर्जेय दुर्दांत विनाशकारी विजेता, जिसने अपनी समकालीन दुनिया की 5 फीसदी बेगुनाह आबादी को मौत की नींद सुला दिया. जिसकी रक्तपिपासा ने 1.70 करोड़ आबादी को मौत की ऐसी सजा दी, जिसकी मिसाल दुर्लभ है. जिसकी विनाशलीला की टीस आज भी बगदाद, दमिश्क, भटनेर, जम्मू से लेकर दिल्ली तक की मानव सभ्यता महसूस करती है.

taimur

वह तैमूर जिसने दिल्ली के सुल्तान नसीरुद्दीन-महमूद शाह तुगलक और मल्लू इकबाल की सेना को परास्त कर दिल्ली में लाखों बेगुनाहों को मौत बख्श दी. वह तैमूर जिसके दुर्दांत अभियान में हिंदू-मुसलमान सभी तबाही के गर्त में जा गिरे. भला ऐसे इतिहास से निजात के लिए तैमूर के सिने अवतार की तमन्ना क्यों न की जाए?

जरा सोचिए तब इतिहास किस कदर मंद-मंद मुस्काएगा

मध्यकालीन तैमूर तलवार के बल पर दुनिया जीतने के लिए पश्चिम, दक्षिण, मध्य एशिया की खाक छानता था, जबकि बीस साल बाद सैफ-करीना का तैमूर इन्हीं इलाकों की खूबसूरत वादियों में फिल्म शूटिंग में बिजी दिखाई देगा!

सड़कों और खेतों में कैमरे के सामने ठुमके लगाएगा. जिन इलाकों में तैमूर का खूनी इतिहास आज भी सांस लेता है, वहां हमारे तैमूर की रूमानी फिल्मों पर तालियां बजेंगी. तैमूर नाचेगा, डायलॉग मारेगा, टिकट पर रोकड़ा खर्च करने वाले तालियां पिटेंगे. बाद में तैमूर, उसके मैनेजर और मम्मी-पापा बॉक्स ऑफिस के कलेक्शन के हिसाब में मशगूल दिखेंगे, उस तैमूर से उलट जो बेगुनाहों के कलम किए गए सिर की गिनती में ताउम्र मशगूल रहा. जरा सोचिए तब इतिहास किस कदर मंद-मंद मुस्काएगा!

इतिहास बताता है कि मध्यकालीन तैमूर इस्लाम की तलवार से दुनिया को खूनी बादशाहत की जद में लाने से पहले एक मामूली लेकिन दुस्साहसिक चोर था.

एक गड़ेरिए ने उसे तब तीर मारकर लंगड़ा कर दिया था जब वह भेड़ चुरा रहा था. खुदा के चाहने से भी हमारा तैमूर भेड़ चोर नहीं बनेगा, दिलचोर बनेगा इसकी गारंटी हर कोई दे सकता है. वह अपने बाप और मां की तरह दिल चुराने से बाज तो कतई नहीं आएगा.

इस तैमूर को क्यों न हासिल हो सौभाग्य

मीडिया यह लिखते-लिखते जरूर अघा जाएगा कि तैमूर को अमुक लड़की के साथ बीच पर मौज-मस्ती करते देखा गया, अमुक पार्टी में अमुक हीरो-हीरोइन की बेटी के दिल में सेंध लगाते देखा गया, अमुक बॉलीवुड किड को चुंबन लेते देखा गया आदि-आदि.

आज अगर हम शाहरुख की संतानों आर्यन-सुहाना, श्रीदेवी की जान्हवी-खुशी, अनुराग कश्यप की आलिया कश्यप, आमिर की संतान जुनैद खान, बिग बी की नातिन नव्या नवेली नंदा की अदाओं पर लट्टू हैं, तो कल तैमूर को यह सौभाग्य हासिल क्यों नहीं होगा?

मध्यकालीन तैमूर अपने शिकार को फॉलो करते हुए पूरी दुनिया में भागा-फिरता था, वहीं हमारे तैमूर को लाखों फैन्स ट्वीटर, फेसबुक, इस्टाग्राम आदि-आदि अनंत नेटवर्क पर फॉलो करेंगे.

हम सभी को सैफ-करीना का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उन्होंने अपने मासूम बच्चे को कलंकित तैमूरी दरिंदगी के इतिहास से जोड़ने का जोखिम लेकर समाज को एक मनोरंजक तैमूर दिया है, जिसके नामकरण पर आज हम माथा धुन रहे हैं, पर चंद सालों बाद सिने पर्दे पर उसे ठुमके मारते देख खुद ठुमका मारने लगेंगे. इब्ने-बतूता वाली स्टाइल में बबुआ!!

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