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तैमूर से परहेज तो सिकंदर, स्टालिन, रॉबर्ट और ईरानी से क्यों नहीं? 

एक सिकंदर ने यूनान से आकर भारत पर हमला किया था और एक सिकंदर वो था, जो बाद में सिकंदर लोधी के नाम से जाना गया.

Updated On: Dec 22, 2016 03:10 PM IST

Mridul Vaibhav

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तैमूर से परहेज तो सिकंदर, स्टालिन, रॉबर्ट और ईरानी से क्यों नहीं? 

फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर और सैफ अली खान ने अपने बेटे का नाम तैमूर अली खान पटौदी रखा है. इस पर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर विवाद भड़का दिया है.

उनका तर्क है कि तैमूर लंग एक विदेशी क्रूर शासक और बेगैरत हमलावर था. करीना कपूर और सैफ अली खान को चाहिए कि वे अपने बेटे का नाम बदल दें.

यह तालीम का शोर हो या तहजीब का गुल. लेकिन हर मां-बाप को अपने बच्चे का नाम मर्जी से रखने का पूरा हक है. सैफ और करीना एक कला संसार और कला प्रेमी परिवारों से हैं.

इसलिए यह तो नहीं लगता कि तैमूर नाम उन्होंने तैमूर लंग नामक आक्रमणकारी की याद दिलाने के लिए रखा होगा. नाम रखने की वजह तैमूर शब्द का अर्थ ही रहा होगा, जो लोहा या फौलाद होता है.

हंगामा है क्यों बरपा 

एक छोटे से शब्द भर पर इतना हंगामा हो रहा है. लेकिन यह देखने की जरूरत है कि देश का माहौल जब ऐसा हो तो एक नाम किसी बच्चे को परेशानी में नहीं डाल दे. वह स्कूल पढ़ने जाए तो उसे मजाक का पात्र नहीं बनना पड़े, मां-बाप को यह भी देखना चाहिए.

आजकल माहौल ऐसा है कि इंसान तो इंसान, शब्द तक जैसे इतिहास के बंधक हो गए हैं. मामूली उर्दू पढ़ा-लिखा इंसान जानता है कि तैमूर का अर्थ लोहा होता है. फौलाद.

एक तैमूर ही क्यों. देश में कितने ही लोगों के ऐसे नाम मिलेंगे. जो इतिहास में खलनायक रहे पात्रों से जुड़ते हैं.

देश में जयचंद असंख्य लोगों का बहुत लोकप्रिय नाम रहा है. सब जानते है कि जयचंद कौन था. राजनीतिक शब्दावली में जयचंद दगाबाज आदमी के लिए इस्तेमाल होता है. कांग्रेस छोड़कर वीपी सिंह ने अलग मोर्चा बनाया. राजीव गांधी को बोफर्स में दोषी बताया. तब लोगों ने वीपी सिंह को जयचंद कहा था.

दरअसल जयचंद बारहवीं शताब्दी में हुआ एक शासक था. उसने गंगा प्रदेश के वाराणसी और कान्यकुब्ज इलाकों पर शासन किया था. मोहम्मद गौरी ने जब पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण किया तो जयचंद ने गौरी का साथ दिया. पृथ्वीराज चौहान का नहीं.

वह पृथ्वीराज का बहुत नजदीकी रिश्तेदार भी था और ससुर भी. जयचंद की बेटी संयुक्ता ने पृथ्वीराज से स्वयंवर किया था. लेकिन आज भी लोग अपने बच्चों का नाम बड़े प्रेम और गर्व से जयचंद रखते हैं.

चलिए जयचंद को छोड़ए. नाथूराम नाम तो आपको हर गली और मोहल्ले में मिल जाएंगे. यह बताने की जरूरत नहीं कि नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी का हत्यारा था. वह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक कुख्यात पात्र है.

रावण से दुर्योधन तक सब हमारे

आपने देखा होगा कि हमारे शहरों में बहुत सी आवासी कॉलोनियों के नाम दैत्य नगरी होते हैं. दैत्य यानी राक्षस.

हमारे यहां कुम्भकर्ण और मेघनाद रावण परिवार के खलनायक रहे हैं. कोई भी इन्हें अच्छी निगाह से नहीं देखता. लेकिन इसके बावजूद ये हमारे यहां लोकप्रिय नाम रहे हैं.

हमारे देश के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक मेघनाद साहा थे. वे भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे. उनके नाम से साहा आयोनाइजेशन बहुत प्रसिद्ध है. सितारों की रासायनिक और भौतिक स्थितियों का वर्णन करने के लिए यह इक्वेशन काम में ली जाती है. मेघनाद वस्तुत: रावण और मंदोदरी के उस बेटे का नाम था, जो राम और लक्ष्मण के खिलाफ लड़ा था.

हमारे यहां कुछ शताब्दी पहले तक कुम्भकर्ण कई राजाओं का नाम रहा है. मेवाड़ के महाराणा कुम्भा का पूरा नाम भी कुम्भकर्ण सिंह था.

महाभारत काल के खलनायकों में दुर्योधन प्रमुख रहे हैं. हम जब इतिहास के पन्ने टटोलते हैं तो दुर्योधन सिंह, दु:शासन सिंह, युयुत्सु, चित्रसेन, दुर्धर्ष, दुर्जय, सुबाहु जैसे कितने ही नाम मिलते हैं. ये सबके सब एक नजरिए से खलनायक थे.

माना जाये तो कर्ण ने भी अधर्म का साथ दिया, लेकिन लोग आज भी अपने बच्चों का नाम बड़े गर्व से कर्ण रखते हैं.

भीष्म भी कौरवों के साथ रहे, लेकिन राजनीति में भीष्म पितामह एक बहुत सम्मानजनक मुहावरा है, जो किसी बेहद प्रभावशाली राजनेता के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

'स्मृति' भी तो 'ईरानी' हैं

कुछ लोग औरंगजे़ब, अकबर, हुमायूं आदि नामों को बहुत हिकारत से देखते हैं. लेकिन देश में कितने ही गर्वीले और अच्छे लोगों के नाम ऐसे ही हैं.

हैरानी तो यह है कि भारत पर हमला करने वाले सिकंदर के नाम वाले तो भाजपा के ही एक नेता रहे हैं. क्या आप भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सिकंदर बख्त को भूल गए हैं?

एक सिकंदर ने यूनान से आकर भारत पर हमला किया था और एक सिकंदर वो था, जो बाद में सिकंदर लोधी के नाम से जाना गया.

SmritiIrani

भारतीय जनता पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तो अपने नाम के साथ ईरानी शब्द लगाती हैं. प्रश्न उठता है कि क्या इस शब्द के लगाने भर से भारत के प्रति उनकी निष्ठा संदिग्ध हो जाती है?

स्मृति ही नहीं, हमारे देश के कितने ही नागरिक ईरानी जैसे शब्द अपने नामों के साथ जोड़ते हैं और ये सभी ईरान से नहीं, भारत से प्रेम करते हैं.

साम्यवाद के ढहने के बाद रूस में और रूस से बाहर स्टालिन खलनायक हो चुके हैं. उन पर लाखों लोगों की नाहक हत्याओं के आरोप हैं. लेकिन हमारे देश में द्रमुक के बड़े नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे का नाम एमके स्टालिन रहा है.

हरियाणा में एक स्थानीय नेता हुए हैं, जो बड़े गर्व से अपने नाम के साथ हिटलर लगाते थे. वे नाम लिखते थे ओमप्रकाश हिटलर. कुछ साल पहले तक ओमप्रकाश नाम का कोई आदमी हरियाणा, पंजाब या राजस्थान में आता था तो बड़े-बुजुर्ग बोल देते थे : आ भाई हिटलर.

सद्दाम हुसैन को आप भले ही खलनायक मानें, लेकिन भारतीय मुस्लिमों में यह आज भी एक लोकप्रिय नाम है.

ब्रिटिश सैन्य अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव ने ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत को 200 साल गुलाम बनाने की नींव रखी. लेकिन क्या कारण है कि रॉबर्ट नाम से वह नफरत क्यों नहीं पैदा होती जो तैमूर या नादिरशाह से होती है?

तैमूर क्रूर लेकिन बहादुर था

जहां तक तैमूर लंग का सवाल है, तो उसकी भी एक रोचक कहानी है. तैमूर उज्बेकिस्तान में पैदा हुआ था. वह पेशे से कुख्यात चोर था. कहा जाता है कि चोरी भी वह भेड़ों की किया करता था. एक भेड़ चुराते समय किसी भेड़ मालिक ने उस पर तीर चलाये. तीर उसके कंधे और कमर पर लगे और वह हमेशा के लिए अपाहिज हो गया.

सिकंदर महान

सिकंदर महान

तैमूर की क्रूरता और आक्रामणकारिता नफरत पैदा करती है. लेकिन आप कल्पना करें कि कोई व्यक्ति अपाहिज हो और वह चोरी छोड़ कर किसी दूसरे देश पर आक्रमण करने लायक एक नकारात्मक योद्धा बन जाये?

लोग विकलांग होकर जीवन से हताश होने लगते हैं, लेकिन तैमूर ने जीवन से हताश होने के बजाय शासक बनने की सोची और बन भी गया.

युद्ध के मैदान में न तैमूर को तुर्की के शासक हरा पाए और ना बगदाद के. हम हिंदुस्तानी भी बंटे रहे और वह अपनी विकलांगता के बावजूद अपनी क्रूरता का निशाना हमें बना गया.

तैमूर ने विकलांगता को कभी भी अपनी शारीरिक दुर्बलता नहीं माना. वह घोड़े पर भी लड़ा और जमीन पर भी. उसने लोगों से सीधे दो-दो हाथ भी किए.

तैमूर चौदहवीं शताब्दी के शक्तिशाली शासकों में रहा. तैमूर ने दिल्ली सल्तनत के समय मोहम्मद शाह तुगलक पर आक्रमण किया था. वह सिन्धु नदी को पार करते हुए मुल्तान तक आ डटा. तैमूर ने मोहम्मद शाह तुगलक को हरा कर दिल्ली पर कब्जा किया था.

सिकंदर के बाद यह भारत पर सबसे बड़ा हमला था. लेकिन यह काम एक अपाहिज ने किया था. आप कह सकते हैं कि उसने अपनी क्रूरता कारण ऐसा किया.

क्या करें महौल ही ऐसा है

आजकल देश में माहौल ही ऐसा है कि कोई किसी भी बात पर भड़क सकता है. विवाद भी बेवजह ही भड़का दिए जाते हैं.

खाने-पीने तक को लेकर ही बवाल हो जाता है. हर कोई सूंघ रहा है कि आपके रसोईघर में क्या पक रहा है. आप क्या ओढ़ और क्या पहन रहे हैं, यह भी आजकल देखा जा रहा है.

कहा जा रहा है कि अभद्र और अश्लील वस्त्र मत पहनो. नागा बाबाओं और दिगंबर जैन साधुओं के इस देश में तरुणियों को तो उपदेश दिए जा रहे हैं. लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि वस्त्र नहीं, अभद्र और अश्लील तो निगाहें होती हैं.

kareena taimur

ऐसे में अगर आप अपने बच्चे का नामकरण संस्कार कर रहे हैं तो लोगों की निगाहें और कान भी आपके घर पर टिके हैं.

अब वह दौर है जब कान सुरों को नहीं सुनते और साज अनमने होकर बज्म की तरफ पीठ किए बैठे हैं. अब नामों की सबा गुलों के पास नहीं, विवादों के कांटों का रुख करती है.

 

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