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अमेजन विवाद: क्या सुषमा स्वराज के लिए बस यही बचा है?

माल्या, मोदी और दाऊद इब्राहिम चैन की सांस ले सकते हैं. विदेश मंत्रालय के पास जिम्मेदारियों की नई लिस्ट तैयार है.

Sandipan Sharma Updated On: Jan 13, 2017 08:29 AM IST

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अमेजन विवाद: क्या सुषमा स्वराज के लिए बस यही बचा है?

अगर आप इस बात को लेकर परेशान हैं कि क्रिकेट में घोटाले के आरोपी ललित मोदी को सरकार इंग्लैंड से वापस नहीं ला पा रही है, तो फिक्र मत कीजिए. आप इस बात की भी चिंता न करें कि हजारों करोड़ का कर्ज लेकर देश छोड़कर भागे विजय माल्या, विदेश में मजे से रह रहे हैं. और इस बात की चिंता में मत पड़िए कि दाऊद इब्राहिम का प्रत्यर्पण तो दूर हम उसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी संपत्ति जब्त करने जैसी फर्जी खबर के भरोसे हैं.

आप तो ये जानकर खुश हो जाएं कि हम कनाडा में चटाई और गलीचे बेचने वाली किसी कंपनी को धमकाकार इसे बेचने से रोक सकते हैं. और ये दावा कर सकते हैं कि हमारी राजनयिक ताकत की धाक पूरी दुनिया में है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को बहुत-बहुत बधाई कि उन्होंने कनाडा में सामान बेचने वाले एक रिटेलर को 'समझा' दिया. अब पूरी दुनिया में हमारा तिरंगा शान से लहरा रहा है. सभी लोग इसके आगे घुटने टेक रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारत से निकाले जाने का डर है. धमकियां मिल रही हैं.

बुधवार की रात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिकी ऑनलाइन रिटेल कंपन अमेजन को धमकी दी कि वो अमेजन के भारत आने वाले कर्मचारियों को वीजा नहीं देंगी, अगर वो कनाडा में तिरंगे वाली चटाई और कालीन बेचना बंद नहीं करेगी. सुषमा स्वराज ने ये भी धमकी दी कि वो भारत में काम कर रहे अमेजन के विदेशी कर्मचारियों का वीजा रद्द कर देंगी.

भारत की विदेश मंत्री ने जो किया उसका ये मतलब है-सुषमा स्वराज ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को एक तीसरे देश में, तीसरे साझीदार को विदेश में एक सामान बेचने से रोका. क्योंकि सुषमा स्वराज की नजर में इससे भारतीयों की भावनाएं आहत हो रही थीं. अमेजन की कनाडा इकाई ने भारत के तिरंगे का अपमान किया था.

इस घटना ने एक नई मिसाल कायम कर दी है. सुषमा स्वराज ने ऐसा कदम उठाकर बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है.

खाली समझने के लिए सोचिए कि अगर अमेरिका को भारत में भारतीयों को बेचे जाने वाले किसी सामान को लेकर ऐतराज हो तो? फिर क्या वहां के विदेश मंत्री, ये सामान बेच रही कंपनी को धमकाएंगे. ये कहेंगे कि अगर आपने फलां सामान बेचना बंद नहीं किया तो, आपके कर्मचारियों का वीजा कैंसिल कर दिया जाएगा. आपके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

क्या होगा अगर हर देश ऐसा करे. सभी देशों को दूसरे देश में बेचे जा रहे सामान से दिक्कत हो जाए. तो क्या हम ऐसे युग में पहुंच जाएंगे जहां तमाम देशों के विदेश मंत्री ऐसी ही धमकियां देने लगेंगे? मोजाम्बिक में क्या सामान बिकेगा ये दूसरे देश के विदेश मंत्री तय करने लगेंगे.

अच्छी बात ये है कि दुनिया की बड़ी शक्तियों का स्वाभिमान इतनी छोटी बातों से नहीं आहत होता. वो खुले बाजार की नीतियों के समर्थक हैं. इसलिए किसी और देश में क्या सामान बेचा जा रहा है, इससे उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. ताकतवर देशों के विदेश मंत्री, ऐसी बात पर धमकियां नहीं देने लगते. वो इस बात से परेशान नहीं होते कि उनके झंडे की तस्वीरें लगाकर सामान बेचा जा रहा है.

मिसाल के तौर पर ब्रिटेन का झंडा, यूनियन जैक हर रंग रूप में उपलब्ध है. अमेजन भी कनाडा के अलावा कई और देशों में ब्रिटिश झंडे वाली चीजें बेचती है. यूनियन जैक, कालीन में, चटाई में तो प्रिंट के तौर पर मिलता ही है. महिलाओं के अंत:वस्त्रों तक पर ब्रिटेन के झंडे की तस्वीरें होती हैं. लेकिन ब्रिटेन ने तो कभी किसी कंपनी को इसके लिए धमकी नहीं दी. न तो वीजा रद्द करने की और न ही किसी कंपनी के कर्मचारी अपने देश आने से रोकने की.

इसी तरह अमेरिका को भी इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि उसके झंडे की तस्वीरें लगाकर सामान बेचे जा रहे हैं. अमेरिका में झंडे के नियम इस बात की इजाजत देते हैं कि उसकी तस्वीरों वाले कपड़ों से लेकर चटाई तक बेची जा सकती है. अमेजन भी ऐसे उत्पाद बेचती है. नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ऐसा कोई कदम उठाने के संकेत फिलहाल नहीं दिए हैं.

लेकिन भारत तो अलग ही तरह का देश है. यहां देशभक्ति और राष्ट्रवाद का निर्वाह परंपरा की तरह किया जाता है. प्रतीकात्मक कार्यों के जरिए हम अपनी देशभक्ति जाहिर करते हैं. हमे इसे न तो विचारधारा मानते हैं और न ही जिंदगी जीने का तरीका. भारत के लोगों के लिए तो देशभक्ति और राष्ट्रवाद, नुमाइश की चीजें हैं. जैसे हम नया मोबाइल या नई कार खरीदकर उसे दिखाते फिरते हैं. हम इन्हें एक अच्छा गुण मानकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कतई नहीं शामिल करते. आप इसे 'पॉप देशभक्ति' कह सकते हैं. ऐसे हालात मे हमारा झंडा एक पवित्र चीज में तब्दील हो जाता है. ऐसे में अगर ये किसी और देश में पायदान या चटाई पर छापकर बेचा जाता है तो इससे हमारी भावनाएं आहत हो जाती हैं. फिर हमारे राजनयिक, दूसरी कंपनियों को धमकियां देकर सम्मान चाहते हैं. जबकि सच तो ये है कि हम सम्मान अपने बर्ताव से ही पा सकते हैं, धमकियों से नहीं.

indian flag

शायद सुषमा स्वराज ये नहीं जानतीं, न ही ट्विटर पर उन्हें किसी ने जानकारी दी. बहुत से खुदरा कारोबारी हमारे तिरंगे का इस्तेमाल करते हैं. सिर्फ तिरंगे का नहीं, बल्कि कई और सामान भी वो बेचते हैं, जिसमे भारत का राष्ट्रीय चिह्न होता है. यहां तक कि महिलाओं के अंत:वस्त्र भी तिरंगे की छाप के साथ बेचे जाते हैं.

ब्रिटेन के झंडे की तरह ही इसे महिलाओं के इनरवियर से लेकर, बीयर मग, व्हिस्की की बोतल तक में देखा जा सकता है. इसमें कई बार ऐसे शब्द छपे होते हैं जिससे संस्कारी भारतीयों को तो सदमा ही लग जाए. मजे का सवाल तो तब होगा कि कोई शख्स तिरंगे की छाप वाले अंडरवियर पहने होगा. तो क्या उससे इसे उतारने को कहा जाएगा. या तिरंगे के सम्मान की खातिर उसे पहने रहना होगा.

तो क्या अब विदेश मंत्रालय इंटरनेट खंगालेगा? ये तलाश करेगा कि कहीं तिरंगे के छाप वाले साामान तो नहीं बिक रहे. ऐसा है तो विदेश मंत्रालय कंपनी को ऐसे उत्पाद वापस लेने का दबाव डालेगा. क्योंकि इससे हमारी भावनाएं आहत होंगी. और सिर्फ ऑनलाइन तक ही क्यों? भारत ऐसे खास दस्ते बनाकर दूसरे देशों को भेज सकता है. इस दस्ते का काम ये पता लगाना होगा कि कहीं उस देश में भारत के सरकारी प्रतीकों वाले सामान तो नहीं बेचे जा रहे. ये दस्ता हर देश जाकर वहां का बाजार खंगालेगा! ये देखेगा कि छोटी-बड़ी दुकानों में तिरंगा या और कोई भारतीय प्रतीक तो नहीं बेचा जा रहा. तो क्या हमारे पास ऐसी पुलिस होगी जो ये देखेगी कि कहीं तिरंगे की तस्वीरों वाले अंडरवियर या डोरमैट तो नहीं बेचे जा रहे.

तब तक माल्या, मोदी और दाऊद इब्राहिम, चैन की सांस ले सकते हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के पास जिम्मेदारियों की नई लिस्ट तैयार है. तो अगर कोई सोमालिया के मोगादिशू में भी तिरंगे की छपाई वाले अंडरवियर बेच रहा होगा तो उसकी खैर नहीं. विदेश मंत्रालय की नजर उस पर भी होगी.

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