S M L

बकवास है भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह बताने वाला रॉयटर्स का सर्वे

हमें अपनी आंखें बंद करने के बजाए वास्तविकता को समझते हुए लड़ाई जारी रखनी चाहिए. और हमें ये भी याद रखना होगा कि रॉयटर्स का सर्वे कोई धार्मिक वाक्य नहीं है.

Updated On: Jun 26, 2018 10:16 PM IST

FP Staff

0
बकवास है भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह बताने वाला रॉयटर्स का सर्वे
Loading...

इस बात से कोई असहमति हो ही नहीं सकती कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा की प्रत्येक घटना देश की सवा करोड़ आबादी के लिए शर्मसार करने वाली बात है. लेकिन पाकिस्तान, सोमालिया, अफगानिस्तान और सीरिया से भी ऊपर महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश का दर्जा चस्पा किया जाना बेहद अहमकाना है. थॉमसन रायटर्स के एक सर्वे में ऐसा ही किया गया है.

मालूम नहीं है कि इस सर्वे के लिए क्या मानक तैयार किए गए हैं और इसका सैंपल साइज क्या है? दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां महिलाएं बिना आज्ञा के सांस भी नहीं ले सकती हैं. तो हमें अपनी स्वनिंदा की आदत पर बहुत ज्यादा जोर नहीं डालना चाहिए.

हमारे भीतर ये आदत है कि पश्चिमी आंकलनों को सही मान लेते हैं. यही वजह है कि बीबीसी अक्सर हमें अपनी क्रूर डाक्यूमेंट्री के जरिए बरगलाता है. याद कीजिए एक डाक्यूमेंट्री जो उसने ताज होटल पर बनाई थी?

नि:संदेह हमारे यहां कई समस्याएं हैं. हमारी जनसंख्या बड़ी है और लैंगिक पूर्वाग्रह खूब  हैं और अब इनके लिए संकल्प लिए जाने का समय आ चुका है. लेकिन इस पर काम चल रहा है. अगर संख्या के आधार पर देखेंगे तो हम उस देश के तौर पर दिखाई देंगे जो महिला सशक्तिकरण करने के प्रतिबद्ध देश के तौर पर दिखाई देंगे न सशक्तिकरण को रियायत की तरह पेश करने वाले देश के तौर पर.

हमारे किशोर तो महिला और पुरुष के बीच कोई लैंगिक भेदभाव नहीं रखते. हम तेजी से शैक्षिक समाज की तरफ बढ़ रहे हैं जहां आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ व्यक्ति भी अपनी जगह बना रहा है. लड़कियां परीक्षाओं में टॉप कर रही हैं और ओवर ऑल भी बेहतर परफॉर्मेंस कर रही हैं. लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और उनकी आवाज भी मजबूती के साथ सुनी जा रही है.

रॉयटर्स ने जैसा सर्वे किया है इस तरह के सर्वे पूरी तरह से लापरवाही में बनाए गए होते हैं जो तकलीफ तो पहुंचाते ही हैं गलत निष्कर्ष भी निकालते हैं. भारत में हर थोड़े समय के बाद कुछ भयानक घटनाएं हमें डराती तो हैं लेकिन ये कहना ठीक होगा कि मोटा-मोटी तौर पर 95 प्रतिशत भारतीय पुरुष महिलाओं की इज्जत करते हैं. अपने परिवार का खयाल रखते हैं और यथासंभव भरण-पोषण करते हैं. दहेज और हिंसा के एक मामले पर हजारों ऐसे भी मामले मौजूद हैं जहां एक पुरुष अपनी पत्नी और बच्चियों के भरण पोषण के लिए सुबह-सुबह ही घर से निकल जाता है. लाखों बेटे खाड़ी देशों में काम करते हैं जिससे वो अपने घर पर बीमार मांओं और बहन की शादी के लिए पैसे भेज सकें.

महिलाएं राजनीति, मीडिया, बिजनेस, सेनाओं और किसानी के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. हमारी ज्यादातर फायरब्रांड नेता महिलाएं हैं. यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी कोटा सिस्टम महिलाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है और सशक्तिकरण भी प्रदान कर रहा है. और ये सिर्फ कामचलाऊ ढंग से नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन के तौर पर किया जा रहा है. खेल में, विज्ञान में, सिनेमा और थियेटर में महिलाएं टॉप की पोजीशन पर हैं.

भारत में महिलाएं सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं. इस वजह से ये खतरनाक देश वाली जो लिस्ट जारी की गई है वो हास्यास्पद लगती है. खासतौर पर जब आप प्रतिबंधित समाज से तुलना करें तो कई मायनों में महिलाओं की स्थिति बेहतर लगती है. नि:संदेह हम परफेक्ट स्थिति से बहुत दूर हैं लेकिन हम उस दिशा में काम कर रहे हैं.

हमें एक देश दिखाइए जहां महिलाओं के साथ कोई हिंसा नहीं होती. हमें एक देश दिखाइए जहां महिलाएं भारत की तरह प्रगति कर रही हों. हालांकि कोई व्यक्ति सर्वे में आधार बनाए गए विषयों जैसे हिंसा, तस्करी, सांस्कृतिक स्थिति, हेल्थकेयर, लैंगिक भेदभाव और यौन हिंसा जैसे मामलों पर आंकड़े दिखा सकता है. और बहुत संभव है कि ये वैलिड पॉइंट भी हों लेकिन इसमें इतना रक्षात्मक होने वाली क्या बात है?

सच्चाई ये है कि पश्चिम में बनाए गए ऐसे अहमकाना सर्वेक्षणों के अपने उद्देश्य होते हैं. वो करोड़ो लोगों के प्रयास पर पानी फेरने की कोशिश करते हैं. हमें अपनी आंखें बंद करने के बजाए वास्तविकता को समझते हुए लड़ाई जारी रखनी चाहिए. और हमें ये भी याद रखना होगा कि रॉयटर्स का सर्वे कोई धार्मिक वाक्य नहीं है.

( फ़र्स्टपोस्ट पर प्रकाशित विक्रम बोहरा के लेख से इनपुट्स के साथ )

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi