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यूपी में एनकाउंटर राज: अपराध के बजाए अपराधी खत्म करने की घातक नीति

योगी सरकार आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस बिल्कुल नए अवतार में अवतरित हुई है. एक के बाद एनकाउंटर सवालों के घेरे में आ गए हैं

Updated On: Feb 05, 2018 07:06 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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यूपी में एनकाउंटर राज: अपराध के बजाए अपराधी खत्म करने की घातक नीति

पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में हो रहे ताबड़तोड़ एनकाउंटरों पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपराधियों पर नकेल कसने के लिए इन एनकाउंटरों को सही ठहरा रही है, वहीं दूसरी तरफ विधि-व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर हो रहे एनकाउंटरों पर अब सवाल भी उठने लगे हैं. दो दिन पहले ही नोएडा में एक कथित एनकाउंटर ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यूपी पुलिस पर निजी दुश्मनी को एनकाउंटर की शक्ल देने का आरोप लगा है. इस एनकाउंटर में एक जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को गोली लगी है. नोएडा के सेक्टर-122 में कार में सवार जितेंद्र और उसके साथियों से एक प्रशिक्षु दारोगा से नोक-झोंक के बाद एनकाउंटर की बात सामने आई है. इस नोकझोंक और गाली-गलौच के बीच प्रशिक्षु दारोगा विजय दर्शन ने जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को गले में गोली मार दी.

बताया जा रहा है कि जितेंद्र को गोली लगने के बाद उसके साथियों ने प्रशिक्षु दारोगा और तीन पुलिस वालों के सामने हाथ-पैर पकड़ कर जितेंद्र यादव को अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई. लेकिन वर्दी के नशे में धुत इन पुलिसकर्मियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ. पुलिसवालों ने जितेंद्र के साथियों की गुहार मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया.

इस कथित एनकाउंटर ने एक बार फिर से यूपी पुलिस को सवालों के घेरे में ला दिया है. जितेंद्र यादव के परिवारवालों ने घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. परिवार वालों का कहना है कि अगर जितेंद्र को होश नहीं आता है और किसी तरह की कोई अनहोनी होती है तो वे प्रदर्शन के लिए मजबूर हो जाएंगे. जितेंद्र यादव के परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि दारोगा ने तीन पुलिस वालों के साथ मिलकर नोकझोंक की इस घटना को एनकाउंटर की शक्ल दे दी.

UP Police

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारी हंगामे के बाद फिलहाल आरोपी दारोगा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और घटना में शामिल तीन अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. यूपी पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए चार पुलिसवालों को सस्पेंड कर मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. लेकिन इन कवायदों के बीच माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में मानवाधिकार संगठनों और कोर्ट के सवाल-जवाब से भी यूपी पुलिस को दो-चार होना पड़ सकता है. आपसी दुश्मनी और प्रमोशन के लिए किया गया यह फर्जी एनकाउंटर यूपी पुलिस के दामन में एक बदनुमा दाग से कम नहीं है.

पिछले दिनों ही इस प्रशिक्षु दारोगा को एक फैक्ट्री में गार्ड की हत्या और लूट का मामला सुलझाने के लिए सम्मानित किया गया था. कुछ महीने पहले भी नोएडा पुलिस पर एक और कथित मुठभेड़ का आरोप लगा था. बागपत के एक लड़के को ग्रेटर नोएडा में एनकाउंटर में मार गिराने पर काफी बवाल मचा था.

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हाल के दिनों में यह दूसरा मौका है जब गौतमबुद्ध जिले की पुलिस पर इस तरह के संगीन आरोप लगे हैं. जिले के एसएसपी लव कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह घटना पुलिस मुठभेड़ नहीं थी. इस घटना में शामिल आरोपी दारोगा और मुठभेड़ में शिकार हुआ लड़का आपस में परिचित थे. घटना के कारणों की जांच की जा रही है. सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. चारों पुलिसवालों के खिलाफ हत्या के प्रयास और लूट का मुकदमा दर्ज किया गया है.'

पिछले 9 महीने से यूपी में एनकाउंटर करने के तरीके को लेकर पुलिस की खूब आलोचना हुई है. नोएडा पुलिस के इस कथित एनकाउंटर ने उत्तर प्रदेश के आलाधिकारियों की खासकर, यूपी के नए डीजीपी ओपी सिंह की भी नींद गायब कर दी है.

पिछले 9 महीनों में उत्तर प्रदेश में लगभग 900 एनकाउंटर के मामले सामने आए हैं. यूपी में सुलखान सिंह के डीजीपी बनते ही एनकाउंटर की रफ्तार ने जोर पकड़ ली थी. लेकिन, कुछ एनकाउंटरों को लेकर सवालों में घिरी यूपी पुलिस की अपराधियों के खिलाफ छेड़ी गई ये खास मुहिम थोड़ी ठंडी पड़ गई थी. थोड़े दिनों के विराम के बाद एक बार फिर से पुलिस एनकाउंटर की तादाद में तेजी आ गई है.

यूपी के नए डीजीपी ने भी प्रदेश में हो रहे इन एनकाउंटरों पर अपनी सहमति दी है. हम आपको बता दें कि कुछ महीने पहले ही नोएडा में हुए सुमित गुर्जर एनकाउंटर के विरोध में बागपत में महापंचायत हुई थी. इस महापंचायत में समाजवादी पार्टी के एमएलसी राम शक्ल गुर्जर, रालोद महासचिव जयंत चौधरी के साथ बीजेपी के कैराना सांसद हुकुम सिंह ने भी शिरकत की थी. हुकुम सिंह का दो दिन पहले ही निधन हो गया.

SUMIT GURJAR

महापंचायत में पहुंचे तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक सुर में आवाज उठाते हुए सुमित को न्याय दिलाने की मांग की थी. विभिन्न दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला था. साथ ही इस एनकाउंटर की जांच सीबीआई से भी कराने की मांग की गई थी.

बागपत की महापंचायत मे पहुंचे नेताओं ने एनकाउंटर मे शामिल नोएडा पुलिस टीम पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने की भी मांग उठाई थी. मामला इतना बिगड़ गया था कि सरकार का पक्ष रखने पहुंचे बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने लोगों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था.

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कुल मिलाकर पिछले कुछ महीनों से एक के बाद एक हो रही मुठभेड़ पर अब राजनीतिक रंग भी चढ़ना शुरू हो गया है. जिस तरह से युपी पुलिस के द्वारा मुठभेड़ को अंजाम दिया जा रहा है, वह भी सवालों के घेरे में है. कुछ ऐसी तस्वीर भी सामने आई है जिसमें गोली लगने के बाद अपराधी जमीन पर बेसुध पड़ा है और उसके बाद भी अपराधी के हाथ में पिस्टल है.

अपराधी से पिस्टल छीनने के बजाए तस्वीर ली गई. तस्वीर देख कर ऐसा लगता है कि पिस्टल जानबूझ कर हाथ में रखी गई हो. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि प्रदेश में अपराधियों पर नकेल कसने लिए ऐसे एनकाउंटर सच में हो रहे हैं या फिर इसके पीछे कहानी कुछ और है. यूपी में बढ़ते एनकाउंटरों पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भी भेज दिया है.

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