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सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह विवादों में फंसी, जावड़ेकर ने कहा यह सिर्फ सुझाव है

यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’ के तौर पर मनाया जाए

Updated On: Sep 21, 2018 02:50 PM IST

FP Staff

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सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह विवादों में फंसी, जावड़ेकर ने कहा यह सिर्फ सुझाव है

सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह फिलहाल विवादों में घिरती नजर आ रही है. सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने पर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमने कुछ भी अनिवार्य नहीं किया है. सिर्फ सुझाव दिया है और एजवाइजरी जारी की है. इसमें कोई राजनीति नहीं है, यह सिर्फ देशभक्ति है. मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह पर हमने कॉलेजों को कहा है कि वह आर्मी के पूर्व अधिकारियों से छात्रों को लेक्चर देने का कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं. इस लेक्चर में छात्रों को कैसे रक्षा बल देश की रक्षा करते हैं और किस तरह सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया इस बारे में चर्चा की जाएगी.

उन्होंने साफ कहा कि कॉलेजों को कोई प्रेशर नहीं दिया गया है जो कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं केवल वही करें. उन्होंने कहा कि हमने किसी भी संस्थान या छात्रों को कोई आदेश नहीं दिया है. हमने केवल कई छात्रों और टीचरों के सुझाव को ध्यान में रखते हुए सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह मनाने के बारे में सोचा है. इसके लिए 29 सितंबर को कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में निर्णय लिया गया है. वहीं कपिल सिब्बल ने कहा- ये बिल्कुल हैरान करने वाला है. असल में मुझे नहीं लगता कि स्वतंत्रता के बाद से यूजीसी ने विश्विद्यालयों को इस प्रकार के निर्देश दिए हैं. यूजीसी द्वारा इस तरह के निर्देश दिए जाने का मतलब है कि हमारे विश्वविद्यालय प्रणाली की स्वतंत्रता खत्म की जा रही है.

दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि 29 सितंबर 2018 को ‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’ के तौर पर मनाया जाए. सिर्फ इतना ही नहीं यूजीसी ने इस दिन को विशेष रूप से मनाने के लिए सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में पूर्व सैनिकों से डिस्कशन, विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भेजने जैसे कई कार्यक्रम शामिल करने की बात कही है.

आयोग ने सभी वाइस चांसलर को भेजे गए पत्र में कहा- सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर 2018 को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए. इसके बाद एनसीसी के कमांडर छात्रों को सरहद की रक्षा के बारे में संबोधित करें. विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके एक संवाद सत्र का आयोजन भी कर सकते हैं.

उस पत्र में कहा गया है- ‘इंडिया गेट के पास 29 सितंबर 2018 को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा. इसी तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, देश की कई छावनियों में किया जा सकता है. इन संस्थानों को छात्रों को प्रेरित करना चाहिए. आपको बता दें कि भारत ने 29 सितंबर 2016 को एलओसी के पार आतंकवादियों के 7 अड्डों पर निशाना बनाकर हमले किए थे. सेना ने कहा था कि विशेष बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की तैयारी में जुटे आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाते हुए ढेर कर दिया था.

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