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सूरत के लिए बुलेट ट्रेन से पहले विकास जरूरी

यह वही रुट है, जिसे भारत के पहले बुलेट ट्रेन के लिए चुना गया है.

Updated On: Dec 04, 2016 08:01 AM IST

Aakar Patel

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सूरत के लिए बुलेट ट्रेन से पहले विकास जरूरी

मैं यह लेख अपने गृह नगर सूरत से लिख रहा हूं. यह भारत के सबसे पुराने और बड़े शहरों में से एक है. भारत के दूसरे बड़े शहरों जैसे मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और नई दिल्ली की तरह सूरत को अंग्रेजों ने नहीं बसाया है. इसे भारतीयों ने बसाया है, जिसका इतिहास सदियों पुराना है.

प्राचीन शहर सूरत

दिल्ली सल्तनत के दौरान सूरत पहले से बसा हुआ शहर था, मुगल शासनकाल के दौरान उप-महाद्वीप में यहां से सबसे ज्यादा टैक्स आता था. 1608 में जब ब्रिटिश सबसे पहले यहां पहुंचे, तब जहांगीर के शासनकाल में ये काफी बड़ा व्यापार केंद्र और मशहूर बंदरगाह था. तीन सौ साल बाद, बंदरगाह मुंबई ले जाए जाने के बाद भी सूरत दुनियाभर में मशहूर है, इसने लियो टॉलस्टॉय को ‘द कॉफी हाउस ऑफ सूरत’ नाम से कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया. सूरत की पहचान आज दुनिया के सबसे बड़े हीरा पॉलिश केंद्र के तौर पर है (दुनिया भर के दो तिहाई हीरे सूरत से ही पॉलिश होकर जाते हैं). इसके अलावा, यह दुनियाभर में कपड़ा उद्योग के लिए भी प्रसिद्ध है.

सूरत-गुंबद

सूरत की 18 वीं सदी में निर्मित गुंबद

 

आवागमन की बदतर स्थिति

सूरत की आबादी लगभग लंदन जितनी है, यहां की प्रति व्यक्ति आय भारत के किसी भी दूसरे शहर की तुलना में सबसे ज्यादा है. मैं यह सब इसलिए बता रहा हूं क्योंकि मेरे लिए मेरा घर आना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है. बेंगलुरु, जहां मैं अब रहता हूं वहां से सूरत के लिए कोई उड़ान नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि सूरत शहर का एयरपोर्ट चालू नहीं है. कोई भी प्राइवेट एयरलाइंस वहां के लिए उड़ान नहीं भरता है.

सरकार द्वारा एयरपोर्ट को अपने अधिकार में लेने के कुछ समय बाद एक भैंस अंदर घुस आई थी, जिससे एक विमान का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया था. सूरत को मुंबई और बेंगलुरु को जोड़ने वाले इस इकलौते विमान की सेवाएं रोक दी गईं. मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने बताया कि दीवार में छेद होने से जानवर एयरपोर्ट के अंदर घुस गया. दीवार की मरम्मत करने के उनके आदेश देने के बाद भी एयरलाइंस कंपनी को सरकार पर भरोसा नहीं हुआ. इस वजह से पिछले 2 साल से वहां के लिए सीधी उड़ान बंद है. सूरत पहुंचने के लिए पहले मुझे फ्लाईट लेकर मुंबई जाना पड़ता है, फिर वहां से पांच घंटे की सड़क-यात्रा करनी पड़ती है.

सूरत-गौरव पथ

यह दूरी 300 किलोमीटर की है और इसे जोड़ने वाली सड़क, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत भारत की सबसे बेहतरीन हाईवे नेटवर्क है. लेकिन इस दूरी को तय करने में पांच घंटे क्यों लगते हैं ? इसकी वजह है मुंबई से बाहर निकलते ही फाउंटेन होटल के पास टूटा-फूटा फ्लाईओवर का होना है. ऐसे में फ्लाईओवर पर दोनों ओर से ट्रैफिक को इजाजत देना खतरनाक हो सकता है. इस वजह से जब एक ओर से गाड़ियां जाती हैं तो दूसरी ओर से आने वाली गाड़ियों को एक घंटे से ज्यादा समय के लिए रोक दिया जाता है. यह काफी व्यस्त हाईवे है, शायद भारत का सबसे व्यस्ततम. इस वजह से सड़क पर कारों और ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं.

बुनियादी ढांचे का अभाव बनाम बुलेट ट्रेन

टैक्सी चला रहे ड्राइवर से मैंने पूछा- ऐसा कब से चल रहा है, तो उसने बताया, कम से कम चार महीने से. फ्लाईओवर के मरम्मत का काम अब तक नहीं शुरू हुआ है. सूरत पहुंचने पर मैंने देखा, मेरे पिछली बार यहां आने के वक्त जिस फ्लाईओवर के गिरने की वजह से नीचे दबकर 11 लोगों की मौत हो गई थी, उसे अब तक नहीं बनाया गया है. यह एक नवनिर्मित ढांचा था, जिसके सपोर्ट देने वाले पिलर को हटा लेने से दो साल पहले इसका एक हिस्सा ढह गया था. फ्लाईओवर के इस हिस्से को तब से आज तक फिर से नहीं बनाया गया. जिसके चलते सूरत शहर के सबसे मुख्य सड़क या लाइंस पर चलना नामुमकिन है.

बुलेट ट्रेन

मैं जो कहने की कोशिश कर रहा हूं उसे समझने की जरूरत है. यह वही रुट है, जिसे भारत की बुलेट ट्रेन के लिए चुना गया है. अहमदाबाद से चलने वाने वाली हाई स्पीड रेल नेटवर्क सूरत आती है, यह अहमदाबाद से मुंबई पहुंचने की लगभग आधी दूरी है. गुजरातियों की बुलेट ट्रेन की ऐसी कोई मांग नहीं है. वे चाहते हैं कि एयरपोर्ट फिर से खुले, जहां जानवर अंदर नहीं घुसें. वे ऐसे फ्लाईओवर वाले नेशनल हाईवे चाहते हैं जो रोजमर्रा के ट्रैफिक झेल सके. वे चाहते हैं कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो और यह बनने से पहले टूटे नहीं और दो साल तक यूं ही वैसे का वैसा न पड़ा रहे.

जरुरत ऐसी ‘बोझिल सरकार’ की है जो आधारभूत सुविधाओं को ठीक करे, न कि बुलेट ट्रेन बनाने वाली ‘समझदार सरकार’ की. मेरे लिए यह आश्चर्य की बात है कि इस ऐतिहासिक शहर के विकास को लेकर लापरवाह रवैया अपनाया जा रहा है. खासकर वैसा शहर जो लंदन के आकार का है. वह सफल शहर जहां की प्रति व्यक्ति आय भारत में सबसे ज्यादा है. मेरे लिए लंदन उड़कर जाना ज्यादा आसान है लेकिन बेंगलुरु से सूरत पहुंचना ज्यादा मुश्किलों से भरा है.

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