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जजों की चिट्ठी: CJI बराबरी के लोगों में सिर्फ पहले नंबर पर होता है, उससे ज्यादा कुछ नहीं

चारों जजों ने मुख्य न्यायाधीश के अधिकारों की याद भी दिलाई है

Updated On: Jan 12, 2018 04:13 PM IST

FP Staff

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जजों की चिट्ठी: CJI बराबरी के लोगों में सिर्फ पहले नंबर पर होता है, उससे ज्यादा कुछ नहीं
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सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को खत लिखकर कुछ सवाल किए हैं. जजों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए कुछ न्यायिक आदेशों की वजह से न्याय प्रक्रिया की पूरी कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ेगा.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर उंगली उठाने वाले इन चार जजों के नाम हैं जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ.

जजों की चीफ जस्टिस को लिखी मीडिया में आ चुकी है. चिट्ठी में बाकी बातों के अलावा लिखा गया है कि सैद्धांतिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के पास ही रोस्टर बनाने का अधिकार होता है. चीफ जस्टिस ही तय करते हैं कि कौन सा केस  कोर्ट में कौन देखेगा.

इन चारों न्यायाधीशों के मुताबिक चीफ जस्टिर को यह अधिकार इसलिए दिया गया है जिससे देश की सर्वोच्च अदालत सुचारू रूप से काम कर सके.

वरिष्ठ जजों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि चीफ जस्टिस सिर्फ 'सभी समान लोगों में पहले नंबर पर आते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं'. अंग्रेजी में लिखे खत में इसके लिए जजों ने लिखा है.‘Chief Justice is only the first amongst the equals — nothing more or nothing less’.

जजों ने चिट्ठी में लिखा है कि हमें यह बताते हुए काफी दुख हो रहा है कि नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है. जजों ने यह भी दुख जाहिर किया है कि कई ऐसे मामले हैं, जिनमें बड़े स्तर पर राष्ट्रीय हित जुड़े हुए होते हैं. लेकिन चीफ जस्टिस ने इन मामलों को अपनी पसंदीदा बेंचों को ही ट्रांसफर कर दिया.

जजों ने यह भी कहा कि हम उन मामलों का नाम इसलिए सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं क्योंकि इसे सर्वोच्च न्यायालय के सम्मान पर ठेस पहुंच सकती है. खत के मुताबिक जजों ने तुरंत इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की है.

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