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दिल्ली-NCR में 40 लाख गाड़ियों की स्क्रैपिंग के फैसले में क्या है गड़बड़झाला?

क्या वाकई में दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली पुरानी गाड़ियां स्क्रैपिंग यार्ड में जाएगी? क्या वाकई में दिल्ली परिवहन विभाग के पास पंजीकृत वाहनों का एक निश्चित डेटा उपल्ब्ध है?

Updated On: Nov 03, 2018 04:31 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh, Pankaj Kumar

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दिल्ली-NCR में 40 लाख गाड़ियों की स्क्रैपिंग के फैसले में क्या है गड़बड़झाला?
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को बैन करने का आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद दिल्ली परिवहन निगम ने भी लगभग 40 लाख पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

दिल्ली परिवहन विभाग की मजबूरी कहें या फिर सुप्रीम कोर्ट का डंडा दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए यह कदम अब लाजिमी हो गया था. लेकिन, सवाल ये उठता है कि 40 लाख गाड़ियों को जब्त कर स्क्रैपिंग करना कितना मुमकिन है और यह कम समय में संभव कैसे हो पाएगा? सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग की तैयारी कितनी है? क्या वाकई में 40 लाख गाड़ियों को दिल्ली सरकार मान्यता प्राप्त स्क्रैपिंग यार्ड में नष्ट करवा सकेगी या फिर इसके लिए दूसरे राज्यों या दूसरी एजेंसियों की मदद ली जाएगी? ये कुछ सवाल हैं जिसको समझना इस समय काफी जरूरी हो गया है.

पुराने पार्ट्स को ही फिर सड़कों पर उतारने का चल रहा है काला कारोबार

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में मेरठ, मायापुरी, बवाना और ईस्ट दिल्ली का सुंदर नगर ही ऐसा एरिया है, जहां पर गाड़ियों की स्क्रैपिंग बड़े पैमाने पर की जाती है. इन जगहों पर गाड़ियों को काटा जरूर जाता है पर इनके पार्ट्स को रिसाइकिल नहीं किया जाता है. स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोग पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स को फिर से अवैध तरीके से मार्केट में बेच देते हैं. नतीजा यह निकलता है कि रोड पर दौड़ रही अधिकांश गाड़ियों में वही पुराने पार्ट्स नजर आते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि स्क्रैंपिग करने वाले ये कारोबारी दिल्ली, यूपी या फिर अन्य राज्यों के परिवहन विभागों के नाक के नीचे फल और फूल रह रहे हैं. इन जगहों पर बेशक गाड़ियों की स्क्रैपिंग का काम चलता है, लेकिन हकीकत में पुरानी गाड़ियों के सभी पार्ट्स निकाल कर एक बार फिर से बाजार में उतारने का काला कारोबार चल रहा है.

फ़र्स्टपोस्ट को अपनी इस तहकीकात में पता चला कि दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश स्क्रैपिंग यार्ड रिहायशी इलाकों में चल रहे हैं. इन जगहों पर पुरानी गाड़ियों के स्क्रैपिंग में भी खूब प्रदूषण निकल रहे हैं. इन इलाकों के रहने वाले लोगों का बुरा हाल है. इन जगहों पर कारोबारियों और प्रशासन की मिलीभगत से पर्यावरण के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. बता दें कि लुधियाना, सूरत या फिर देश के दूसरे हिस्सों में ही पुरानी गाड़ियों को रिसाइकिल का काम होता है.

40 लाखों गाड़ियों को दिल्ली में स्क्रैप करने से उल्टे दिल्ली पर ही पड़ेगा असर

स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोगों को मानना है दिल्ली में एशिया के सबसे बड़े स्क्रैंपिग यार्ड मायापुरी और सुंदर नगरी और बवाना जैसे इलाकों में भी गाड़ियों का काटने का काम धड़ल्ले से चल रहा है. देशभर की गाड़ियां यहां पर लाकर काटी जाती हैं. पर्यावरण के जानकारों का मानना है कि अगर 40 लाख गाड़ियों को दिल्ली के इन इलाकों में काटा जाएगा तो उल्टे दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और भयावह होने वाला है.

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली की आबो-हवा बिगड़ने के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने लगभग 40 लाख गाड़ियों की स्क्रैपिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है. परिवहन विभाग ने एक नोटिस जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश के खिलाफ जो भी व्यक्ति 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल और 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर चलाएंगे, उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया जाएगा.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली पुरानी गाड़ियां स्क्रैपिंग यार्ड में जाएगी? क्या वाकई में दिल्ली परिवहन विभाग के पास पंजीकृत वाहनों का एक निश्चित डेटा उपल्ब्ध है?

फ़र्स्टपोस्ट की पड़ताल में परिवहन विभाग के ही एक अधिकारी नाम नहीं बताने के शर्त पर कहते हैं, ‘दिल्ली-एनसीआर में कितने लोग पुराने वाहन चला रहे हैं, इसके बारे में कोई आंकड़ा दिल्ली परिवहन विभाग के पास नहीं हैं. हमारे पास जो स्क्रैपिंग के वाहनों की लिस्ट है, उनमें से कई गाड़ियों का पिछले काफी सालों से कोई हिसाब-किताब नहीं है. हमारे पास गाड़ी मालिक गाड़ी को स्क्रैप करने के बाद आते हैं. वे दिल्ली परिवहन विभाग के सक्रैपिंग रूल्स को फॉलो नहीं करते.' अधिकारी कहते हैं इन वाहनों को या तो स्क्रैप कर दिया जाता है या फिर उनको बिहार, बंगाल, मध्यप्रदेश और यूपी के ग्रामीण इलाकों में बेच दिया जाता है.’

परिवहन विभाग के नियमों की उड़ रही हैं धज्जियां

दिल्ली-एनसीआर में परिवहन विभाग के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. पुरानी गाड़ियों को कबाड़े के भाव में खरीदकर बेचने वाला इंदिरापुरम का कारोबारी गुलफ़ाम फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहता है, 'देखिए इंदिरापुरम में ही कम से कम रोजाना 100-150 गाड़ियां रोड से उठती हैं. हमलोग गाड़ी मालिक की मर्जी से ही दूसरे राज्यों में गाड़ियों को बेचते हैं. दूसरे राज्यों में बेचने के लिए मालिक से सेल लेटर में साइन करवाते हैं. अगर मालिक कहता है कि वह गाड़ी को स्क्रैप ही कराएगा तो हमलोग मालिक से गाड़ी की आरसी की कॉपी और फाइनेंस के कागजात ले लेते हैं. फिर बाद में उसका चेचिस और नंबर प्लैट काट कर दे देते हैं. मैं आपको बता दूं कि तीन तरह से पुरानी गाड़ियों को हमलोग निपटारा करते हैं. सबसे पहले पुरानी गाड़ियों को मशीन से काटते हैं. दूसरे स्टेप में पार्ट्स को अलग-अलग हिस्से में कर देते हैं और थर्ड स्टेप में रिसाइकिल का काम होता है. रिसाइकिल का जो पार्ट्स है उसको पंजाब, हरियाणा, गुजरात या महाराष्ट्र में भेज देते हैं.'

लेकिन,असल में स्क्रैप डीलर्स का असली खेल तब शुरू होता है जब पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स को वह नए गाड़ियों के खराब पार्ट्स में अदला-बदली करता है और उसके एवज में पैसे भी लेता है. गाड़ी मालिक को नए पार्ट्स खरीदने में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं और पुराने गाड़ियों के वही पार्ट्स उनको स्क्रैप डीलर्स के यहां सस्ते दामों में मिल जाता है.

दिल्ली के सुंदर नगरी में स्क्रैप डीलर्स का काम करने वाले एक कारोबारी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहता है, ‘देखिए, हमलोग बिल्कुल परिवहन विभाग के रूल्स को फॉलो करते हैं. 2003 से पहली मारुति जैन, मारुति स्टीम, मारुति वैगनआर, सैंट्रो, कोई-कोई मारुति की स्विफ्ट या फिर होंडा-सिटी वाली पुरानी गाड़ियों को ही हमलोग ज्यादा स्क्रैप करते हैं. हम लोग मायापुरी से माल लाते हैं और सुंदर नगरी में बेचते हैं. सुंदर नगरी में स्क्रैपिंग के कम से कम 100-150 दुकानें हैं. यहां पर रोजाना 300 से 400 पुरानी गाड़ियां आती हैं. हमलोगों का मायापुरी में बड़े स्क्रैप डीलर्स से संपर्क कर फिर वहां पर इन गाड़ियों को भेजते हैं. मायापुरी में बीट ऑफिसर्स की मंजूरी के बाद सीसीटीवी मॉनिटरिंग के बीच गाड़ियों को काटा जाता है.’

यहां पर यह बता दूं कि सुंदर नगर का यह कारोबारी बड़ी होशियारी से अपने कारोबार का बचाव कर रहा था. दिल्ली के सुंदर नगरी में बड़े पैमाने पर अवैध स्क्रैपिंग का कारोबार सालों से चल रहा है. यहां पर इन कारोबारियों का खौफ ऐसा है कि आप गाड़ियों के स्क्रैपिंग करते फोटो नहीं ले सकते. कारोबारी मीडिया के सामने बात करने से साफ मना करते ही हैं साथ में यह भी कहते हैं कि यहां से जल्दी निकल जाओ.

स्कैप डीलर्स का पूरा नेक्सस कर रहा है काम

सुंदर नगरी के कारोबारी बेशक सिर्फ पुराने पार्ट्स बेचने की बात करते हैं पर इस जगह पर मायापुरी के बाद सबसे ज्यादा गाड़ियां कटती हैं. स्क्रैप डीलर्स का यहां पर एक बड़ा नेक्सस है, जिस पर जल्द लगाम नहीं लगाया गया तो पॉल्यूशन पर कंट्रोल की बात बैमानी होगी. एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में रोजाना हजारों गाड़ियां नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर स्क्रैपिंग की जा रही है. लेकिन, परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस इस पर कोई कार्रवाई करने से या तो डरती है या फिर इस कारोबार में हिस्सेदारी लेती है. इन जगहों पर पॉल्यूशन का स्तर काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. रिहायशी इलाकों में गाड़ियों का स्क्रैपिंग का कारोबार दिल्ली में पिछले कई सालों से चल रहा है.

बता दें कि भारत में वाहनों की स्क्रैपिंग नीति कम से कम तीन साल चर्चा और योजना के तहत रही है. अगस्त 2015 में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था, 'हम ऐसी योजना ला रहे हैं, जिससे आप अपना पुराना वाहन बेचते हैं तो आपको एक प्रमाणपत्र मिलेगा. जिसके चलते नई खरीद के समय आपको 50 हजार रुपए तक की छूट मिल जाएगी. कारों जैसे छोटे वाहनों के लिए यह 30 हजार रुपए तक होगी. इसके अलावा करों में छूट होगी और ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए यह 1.5 लाख रुपए तक होगा.

वहीं, इस साल के शुरुआत में दिल्ली परिवहन विभाग ने पुराने और अनधिकृत वाहनों को स्क्रैप करने के आदेश भी जारी किए थे. इस नीति के तहत, जो लोग अपने वाहनों को छोड़ना चाहते हैं उन्हें मंजूरी और मोटर लाइसेंसिंग अधिकारी क्षेत्र से प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है.

दिल्ली परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक, पुराने वाहनों को स्क्रैप करने और नए वाहनों की खरीद पर किसी भी तरह का कोई इंसेंटिव नहीं मिलता है. दुनिया के दूसरे देशों में जैसे अमेरिका और ब्रिटेन ने 2009 में नीतियों के तहत लोगों को पुराने वाहन स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहित किया था. इन नीति का लक्ष्य मोटर उद्योग की बिक्री को बढ़ाना भी था.

क्या हैं स्क्रैपिंग रूल्स?

दिल्ली-एनसीआर में कागजों पर नए स्क्रैपिंग रुल्स के मुताबिक कोई भी गाड़ी ओनर कबाड़े के दुकान में यूं ही अपनी गाड़ी नहीं बेच सकेगा. परिवहन विभाग जिसे लाइसेंस देगा वही पुराना वाहन कबाड़े के दुकान में बेच सकेगा. स्क्रैपिंग रुल्स में साफ कहा गया है कि जहां पुराना गाड़ी स्क्रैप किए जाते हैं वहां पर सीसीटीवी के जरिए परिवहन विभाग के अधिकारी मॉनिटर करेंगे. हर वाहन का स्क्रैप करते हुए फुटेज और पूरा रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा.

व्हीकल स्क्रैपिंग रुल्स में साफ कहा गया है कि अगर एनफोर्समेंट एजेंसी 15 साल पुराने गाड़ी को जब्त करती है तो उसे स्क्रैप डीलर तक पहुंचा देगी. बाद में एनफोसर्मेंट एजेंसी वाहन मालिक को स्क्रैप करने की सूचना देगी. स्क्रैप डीलर के पास वाहन का पूरा रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा. एक निश्चित समय अवधि में गाड़ी मालिक को स्क्रैप डीलर के पास आकर गाड़ी की कीमत का मोलभाव कर सकता है. डीलर के द्वारा पेमेंट करने के बाद स्क्रैपिंग प्रोसेस शुरू हो जाएगा.

परिवहन विभाग ही स्क्रैपिंग डीलर को स्क्रैपिंग का लाइसेंस देती है. परिवहन विभाग यह ध्यान में रखती है कि बैटरी हटाने, गैस टैंक और कई गाड़ियों के कई ज्वलनशील वस्तुओं को सुरक्षित रखने की यार्ड में व्यवस्था होनी चाहिए. गाड़ियों के अलग-अलग पार्ट्स जो रिसाइकिल होने में दिक्कत होती है उसका निपटारा किया जा सके. लेकिन, दिल्ली-एनसीआर में इन नियम-कायदों की किसी की भी फिक्र नहीं है.

परिवहन विभाग कर रहा है ऐसी तैयारियां

लेकिन, बीते कुछ दिनों से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की सख्ती के बाद प्रदूषण को रोकने के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग ने कमर कस लिया है. दिल्ली-एनसीआर में कई ऐसे सेंटर बनाए गए हैं जहां पर गाड़ियों के चेकिंग का काम चल रहा है. नोएडा और गाजियाबाद परिवहन विभाग ने भी 100 से अधिक ऐसे सेंटर बनाए हैं जहां पर चेकिंग का काम चल रहा है. नोएडा में ही सिर्फ 48 सेंटर चेकिंग के बनाए गए हैं. दरअसल जिन गाड़ियों की समय अवधि पूरी हो चुकी है परिवहन विभाग ने उसकी सूची संबंधित विभाग सौंप दी है. कोर्ट के देश पर समय सीमा पार कर चुकी गाड़ियों को सीज करने का अभियान चलाया जा रहा है.

दिल्ली-एनसीआर में जनसंपर्क अधिकारियों के मुताबिक, 12 सितंबर को अखबार के माध्यम से लोगों को सूचित किया जा चुका है. उनसे अनुरोध किया गया है कि 10 और 15 साल की अवधि पार कर चुकी गाड़ियों के ओनर 3 महीने के अंदर परिवहन विभाग से संपर्क करें. एनसीआर से बाहर ले जाने वाले इच्छुक लोग परिवहन विभाग को सूचना देकर एनओसी ले जा सकते हैं. जिन्होंने ऐसा नहीं किया उनका आरसी तीन महीने बाद रद्द कर दिया जाएगा और 6 महीने के बाद उनका पंजीयन नंबर भी विभाग द्वारा खत्म कर दिया जाएगा. ध्यान रहे पंजीयन रद्द हो जाने के बाद गाड़ी का नो तो इंश्योरेंस संभव हो पाएगा और न ही वो गाड़ी अन्य जिला या राज्यों में इस्तेमाल करने लायक रह जाएगी.

दरअसल, एनजीटी के आदेश के बाद दिल्ली और एनसीआर में दस साल पुरानी 10 और 15 साल पुरानी पेट्रोल कार चलाने की अनुमति नहीं है, लेकिन दिल्ली और एनसीआर के बाहर इन गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इतना ही नहीं सीज की हुई गाड़ियों को डंप करने के लिए नोएडा के सेक्टर 62 में नोएडा अथॉरिटी द्वारा जगह भी मुहैया करा दिया गया है.

एआरटीओ एके पांडे के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर जिले में समय अवधि पार कर चुकी गाड़ियों की संख्या लगभग 54 हजार है, लेकिन इनमें से ज्यादातर गाड़ियां ऑफ रोड हो चुकी हैं. परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक, समय सीमा पार कर चुकी गाड़ियों की संख्या 5 से 7 हजार होंगी और ऐसे में गाड़ियों के ओनर विभाग द्वारा दिए गए सूचना के बाद परिवहन विभाग से संपर्क कर रहे हैं. नोएडा में फिलहाल 4 गाड़ियां सीज हुई हैं और जिले में न्यायालय के आदेश के मुताबिक परिवहन विभाग पुरानी गाड़ियों पर नजर बनाए हुए है गाजियाबाद के भी एआरटीओ वीपी सिंह का मानना है कि ज्यादातर गाड़ियां नष्ट की जा चुकी हैं, लेकिन कई वजहों से पुरानी गाड़ियों के ओनर परिवहन विभाग को सूचित नहीं कर पाए हैं.

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