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समलैंगिकता अपराध है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट में कल होगा तय

सुनवाई करने वाली बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल हैं

Updated On: Sep 05, 2018 07:19 PM IST

FP Staff

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समलैंगिकता अपराध है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट में कल होगा तय
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धारा 377 की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगा. यह धारा समलैंगिकता को अपराध की कैटेगरी में रखती है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के नेतृत्व में पांच जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है. कोर्ट ने 17 जुलाई को इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई करने वाली बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल हैं.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया था कि समलैंगिकता को अपराध के दायरे में रखा जाए या नहीं. कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने धारा 377 पर कोई स्टैंड नहीं लिया था. केंद्र का कहना था कि कोर्ट ही तय करे कि 377 के तहत समलैंगिक संबंध बनाना अपराध है या नहीं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने दो बालिगों के बीच सहमति से संबंध बनाने को अपराध की कैटेगरी से बाहर कर दिया था वहीं 2013 के सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसमें समलैंगिकता को अपराध माना गया था.

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