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SC जानना चाहता है कि क्या अगस्ता वेस्टलैंड डील में कोई हेरा फेरी हुई है

कोर्ट ने कहा कि यदि यह लगा कि इसमें कोई गड़बड़ी हुई है तो वह इसकी जांच का आदेश दे सकता है

Updated On: Nov 23, 2017 09:31 PM IST

Bhasha

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SC जानना चाहता है कि क्या अगस्ता वेस्टलैंड डील में कोई हेरा फेरी हुई है

सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाहता है कि क्या अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील मामले में कोई हेरा फेरी हुई है. कोर्ट छत्तीसगढ़ सरकार से इस मसले पर जवाब चाहता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर की पसंद के बारे में सवाल नहीं कर रहा है क्योंकि यह सरकार का कार्यकारी फैसला है परंतु वह हेलीकॉप्टर के लिये बोली के बारे में स्पष्टीकरण चाहता है.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की पीठ ने कहा कि इस मामले में कुछ सवाल हैं जिनके जवाब राज्य सरकार को देने हैं. यदि कोर्ट को यह लगा कि इसमें कोई गड़बड़ी हुई है तो वह इसकी जांच का आदेश दे सकता है.

पीठ ने कहा कि आपको (राज्य सरकार) कुछ सवालों, जैसे कथित छद्म बोली, सिर्फ वही हेलीकॉप्टर क्यों, बोली की प्रक्रिया के दौरान ही मुख्यमंत्री के पुत्र द्वारा विदेशी बैंक में खाता खोलना, के जवाब देने होंगे. पीठ ने कहा कि यदि उसे लगा कि इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं है, तो वह मामले को बंद कर देगा.

कोर्ट इस हेलीकॉप्टर की खरीद में कथित अनियमितताओं और उसी दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र का विदेशी बैंक में खाता खुलने के कथित संबंध की जांच के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

मामले की सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन स्वराज अभियान और विपक्ष के नेता कांग्रेस के टीएस सिंहदेव की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि यद्यपि बेल हेलीकाप्टर को बोली लगाने की अनुमति नहीं दी गई थी परंतु सरकार उसे ही किराये पर ले रही थी. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार के हलफनामे पर जवाब दायर करना चाहते हैं.

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और हरीश साल्वे ने कहा कि बोली प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं था. इस समय देश में 24 अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर उड़ रहे हैं.

जेठमलानी ने बोली की प्रक्रिया को न्यायोचित बताते हुए कहा कि राज्य सरकार 14 जुलाई, 2007 की स्थिति के अनुसार ही यूरोकॉप्टर से संतुष्ट नहीं थी. यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इसमें दो पायलट मारे गए थे. उन्होंने कहा कि उस समय उपलब्ध हेलीकॉप्टर चार साल पुराना था. इसके रखरखाव तथा पुर्जों को बदलने पर बहुत अधिक खर्च हो रहा था.

पीठ ने कहा कि वह कार्यपालिका की पसंद पर भरोसा कर रही है परंतु सिर्फ यही जानना चाहती है कि क्या इसके चयन के पीछे कोई अन्य वजह तो नहीं थी. कोर्ट ने भूषण को राज्य सरकार के हलफनामे का जवाब देने की अनुमति देते हुए इसकी सुनवाई 18 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी.

सुनवाई के अंतिम क्षणों में साल्वे ने कहा कि हालांकि उन्होंने सरकार के रिकॉर्ड याचिकाकर्ता को सौंप दिए हैं ताकि वे जवाब दाखिल कर सकें परंतु ये दस्तावेज मीडिया तक नहीं पहुंचने चाहिए. जस्टिस ललित ने भूषण को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि ये दस्तावेज किसी अन्य के हाथ नहीं लगने चाहिए.

इस बीच, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यदि ये दस्तावेज सूचना के अधिकार के तहत राज्य सरकार ने उपलब्ध कराए हैं, तो वह अपनी आपत्तियों पर जोर नहीं देना चाहते हैं. वेणुगोपाल ने सुनवाई की पिछली तारीख पर जनहित याचिका के साथ कैबिनेट नोट संलग्न करने पर आपत्ति जताई थी.

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