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सबरीमाला मंदिर: महिलाओं के प्रवेश मामले पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

संविधान पीठ ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिस पर अब 28 सितंबर को फैसला आना है.

Updated On: Sep 27, 2018 04:00 PM IST

FP Staff

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सबरीमाला मंदिर: महिलाओं के प्रवेश मामले पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने गलत माना है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का मानना है कि देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है. यह सार्वजनिक संपत्ति है. इसमें यदि पुरुष को प्रवेश की इजाजत है तो फिर महिला को भी जाने की अनुमति मिलनी चाहिए. संविधान पीठ ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिस पर अब शुक्रवार 28 सितंबर को कोर्ट की तरफ से फैसला आना है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या महिलाओं को उम्र के हिसाब से प्रवेश देना संविधान के मुताबिक है? सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अनुच्‍छेद 25 सभी वर्गों के लिए समान है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि मंदिर किसी वर्ग विशेष के लिए खास नहीं होता, यह सबके लिए है.

वहीं इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने त्रावणकोर देवासम बोर्ड से सवाल किया था कि इस बात को साबित किया जाए कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी धार्मिक विश्वास का एक अभिन्न हिस्सा है. मामले की आखिरी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महज माहवारी के कारण महिलाएं के इस मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी लगा देना महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है.

क्या है मौजूदा नियम?

फिलहाल इस मंदिर में 10 साल से लेकर 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. इस प्रतिबंध पर ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की एक बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. इस बेंच में जस्टिस आरएफ नरिमन, एएम खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदू मल्होत्रा शामिल हैं.

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