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खतना प्रथा पर SC सख्त, कहा- महिला की निजता का है उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट में बोहरा मुस्लिम समाज महिलाओं में हलाला और खतना जैसी प्रथा के खिलाफ याचिका दायिर की गई है जिसपर सुनवाई जारी है

FP Staff Updated On: Jul 31, 2018 10:20 AM IST

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खतना प्रथा पर SC सख्त, कहा- महिला की निजता का है उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने बोहरा मुस्लिम समुदाय में बच्चियों और नाबालिग लड़कियों के खतना प्रथा पर आज यानी मंगलवार को भी सुनवाई होगी. अदालत ने सोमवार को खतना के विरोध में दाखिल की गई याचिका पर हुई सुनवाई में सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि महिलाओं का खतना सिर्फ इस वजह से नहीं किया जाना चाहिए कि उन्हें शादी करनी है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सिंह की बेंच ने सुनवाई में कहा, महिला की जिंदगी सिर्फ पति और बच्चों के लिए नहीं होती. महिला का कर्तव्य केवल पति के प्रति समर्पण ही नहीं है. किसी भी समाज में ऐसी रूढ़िवादिता का चलन निजता का उल्लंघन हैं.

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है और स्वास्थ्य ने लिए खतरनाक भी हो सकता है. अदालत ने कहा कि यह किसी भी व्यक्ति के पहचान का केंद्र बिंदु होता है और यह कृत्य (खतना) उसके पहचान के खिलाफ है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट

बता दें कि याचिकाकर्ता सुनीता तिवारी ने महिलाओं में हलाला और खतना जैसी प्रथा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इस केस की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह पैरवी कर रही हैं.

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपालन ने इस याचिका का समर्थन किया.

क्या होता है महिलाओं में खतना?

खतना की प्रक्रिया में महिलाओं के क्लिटोरिस का उभरा हुआ हिस्सा काट दिया जाता है. यह हिस्सा बच्चे पैदा करने से नहीं जुड़ा है लेकिन सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान महिला की संतुष्टि में इसकी अहम भूमिका होती है. यह एक उभरा हुआ हिस्सा होता जो वजाइना से जुड़ा रहता है.

बोहरा समाज में बच्चियों और लड़कियों के खतना से उनके शरीर और मन पर काफी बुरा असर पड़ता है. वो इस दर्द को सह नहीं पातीं और हर वर्ष बहुत सी बच्चियां इस वजह से कोमा में चली जाती हैं. कई मामलों में इससे उनकी मौत तक हो जाती है.

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