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SC ने RBI से जवाब मांगा- बैंकों से घटी ब्याज दर का लाभ लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?

सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से फ्लोटिंग दर पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों को ब्याज दर में कमी का लाभ देने में देरी के खिलाफ की गई शिकायत पर भारतीय रिजर्व बैंक से जवाब देने को कहा

Updated On: Oct 09, 2018 09:13 AM IST

Bhasha

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SC ने RBI से जवाब मांगा- बैंकों से घटी ब्याज दर का लाभ लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?

सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से फ्लोटिंग दर पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों को ब्याज दर में कमी का लाभ देने में देरी के खिलाफ की गई शिकायत पर भारतीय रिजर्व बैंक से जवाब देने को कहा है.

6 हफ्तों में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने आरबीआई को लोक न्यास (पब्लिक ट्रस्ट) 'मनीलाइफ फाउंडेशन' को छह सप्ताह के भीतर उसकी शिकायत पर जवाब देने को कहा है. ट्रस्ट ने अपनी दायर की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि रेपो दर और रिवर्स रेपो दर को लेकर आरबीआई के फैसले के बावजूद बैंक और वित्तीय संस्थाएं ब्याज दरों में कमी लाने में सुस्त रुख अपनाते हैं. ग्राहकों को दर में कमी का लाभ देने में देरी की जाती है.

रिजर्व बैंक हर दो महीने पर अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है और रेपो रेट तय करता है. केंद्रीय बैंक रेपो दर के आधार पर ही बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है. इसी दर से बैंकों में आगे ब्याज दर की दिशा तय होती है. रेपो दर में घटबढ से मकान एवं वाहनों के कर्ज सहित अन्य कर्ज के ईएमआई पर असर पड़ता है.

क्या कहा कोर्ट ने

पीठ ने कहा, 'चिकाकर्ता के मुताबिक इस विषय में लिए गए निर्णय के नतीजे के बारे में उसे जानकारी नहीं दी गई. इसके बाद याचिकाकर्ता के पास इस कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. हमारा मानना है कि, इस स्तर पर रिजर्व बैंक को यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह याचिकाकर्ता के दिनांक 12-10-2017 के पत्र, ज्ञापन में दिए गए मामले पर अपने फैसले की जानकारी याचिकाकर्ता को छह सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराए.'

न्यायालय ने याचिकाकर्ता ट्रस्ट और अन्य से कहा है कि अगर वह रिजर्व बैंक के जवाब से संतुष्ठ नहीं हो तो वह फिर से न्यायालय के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं. जनहित याचिका में देश में बैंकिंग कंपनियों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (कर्ज पर ब्याज दर) मास्टर निर्देशन 2016 को लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी.

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