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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में फरियाद लगाएं कठुआ कांड के गवाह

कठुआ कांड के तीन गवाहों ने एसआईटी पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी

Bhasha Updated On: Jul 02, 2018 05:14 PM IST

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में फरियाद लगाएं कठुआ कांड के गवाह

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ बलात्कार और हत्याकांड की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले तीन गवाहों से कहा कि वे शिकायतों को लेकर जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट जाएं.

तीन गवाहों- साहिल शर्मा, सचिन शर्मा और नीरज शर्मा ने एसआईटी पर उनका उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था और उसकी स्वतंत्र जांच की मांग की थी. तीनों कठुआ कांड के मुख्य आरोपियों में एक के साथ पढ़ाई कर चुके हैं.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने गवाहों के आरोपों की जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया. गवाहों ने पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराने के दौरान जोर जबर्दस्ती किए जाने का आरोप लगाया है.

पीठ ने उन्हें अपनी शिकायतों के साथ हाई कोर्ट जाने की छूट देते हुए उनकी याचिका का निपटारा कर दिया. कोर्ट एक घुमंतू अल्पसंख्यक समुदाय की आठ साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के मामले की सुनवाई कर रहा था. जम्मू में कठुआ के एक गांव में दस जनवरी को यह लड़की अपने घर के पास से लापता हो गई थी. एक हफ्ते बाद उसका शव मिला था.

गवाहों का दोबारा हुआ टेस्ट

जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम और वकील सुहैब आलम ने पीठ को बताया कि गवाहों का फिर से टेस्ट हो गया है और उनके बयान फिर से रिकार्ड किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों गवाहों को पुलिस की आगे की पूछताछ में अपने रिश्तेदारों के साथ जाने की इजाजत दी थी. पीठ ने पुलिस से कहा कि इस मामले की निष्पक्ष से जांच की जाए. शीर्ष अदालत ने पहले ही गवाहों की पूछताछ की वीडियोग्राफी कराने से मना कर दिया था.

जबरन दिलाई गवाही

आरोपी विशाल जंगोत्रा के इन तीन कॉलेजे मित्रों पर जांच को संभवत: गुमराह करने आरोप लगाया गया था जिसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को इस कांड की जांच पर स्थिति रिपोर्ट देने को निर्देश दिया था. जम्मू के ये तीनों छात्र उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक कॉलेज में बीएससी कर रहे हैं और वे विशाल जंगोत्रा के साथ पढ़ते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उलटा बयान देने के लिए मजबूर किया गया कि जंगोत्रा सात जनवरी -10 फरवरी के दौरान मुजफ्फरनगर में था. उस दौरान उसने उनके साथ परीक्षा दी और प्रैक्टिल पेपर भी दिए. उन्होंने अपनी अर्जी में दावा किया कि 19-31 मार्च के दौरान पुलिस ने उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया.

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