S M L

पारसी विवाह और तलाक कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

एक पारसी महिला ने इस कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करते हैं

Bhasha Updated On: Dec 01, 2017 08:43 PM IST

0
पारसी विवाह और तलाक कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पारसी विवाह और तलाक कानून में स्वतंत्रता मिलने से पहले के चुनिंदा प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा. न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से कहा कि वह 1936 के पारसी विवाह और तलाक कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करे. यह प्रावधान तलाक के मामले में ज्यूरी प्रणाली जैसे हैं.

एक पारसी महिला ने इस कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 (समता) और 21 (जीने के अधिकार और निजी स्वतंत्रता) का उल्लंघन करते हैं.

याचिका में कहा गया है कि यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि इस कानून के ये प्रावधान पुरातन हैं जो आजादी से पहले के दौर के हैं. यही नहीं, हमारी अपराध न्याय व्यवस्था में 1960 में ज्यूरी प्रणाली खत्म किए जाने से पहले की तारीख के हैं. याचिका में कहा गया है कि भारत में ज्यूरी व्यवस्था खत्म कर दी गई है और इसलिए ये सिर्फ एक समुदाय के लिए रखी नहीं जा सकती.

इससे पहले, याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा था कि शीर्ष अदालत को इस पर विचार करना होगा. साथ ही उसने अपनी दलील के पक्ष में संविधान पीठ के एक हालिया फैसले का भी हवाला दिया था.

शीर्ष अदालत ने 24 नवंबर को याचिका पर सुनवाई के दौरान इसकी एक प्रति अतिरिक्त सालिसीटर जनरल को भी सौंपने का निर्देश देते हुए कहा था कि उसे इस मामले में सरकार का दृष्टिकोण भी जानना है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
International Yoga Day 2018 पर सुनिए Natasha Noel की कविता, I Breathe

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi