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SC/ST एक्ट संशोधन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस कानून में किए गए संशोधन को निरस्त करने के लिए दायर याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया है

Updated On: Sep 07, 2018 03:27 PM IST

Bhasha

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SC/ST एक्ट संशोधन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के मार्च के फैसले को निष्प्रभावी बनाने और एससी/एसटी (अत्याचारों की रोकथाम) कानून की पहले की स्थिति बहाल करने के लिए इसमें किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. एससी/एसटी एक्ट में संसद के मॉनसून सत्र में संशोधन करके इसकी पहले की स्थिति बहाल की गई है.

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस कानून में किए गए संशोधन को निरस्त करने के लिए दायर याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया है. केंद्र को छह सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है.

इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संसद के दोनों सदनों ने ‘मनमाने तरीके’ से कानून में संशोधन करने और इसके पहले के प्रावधानों को बहाल करने का ऐसे निर्णय किया ताकि निर्दोष व्यक्ति अग्रिम जमानत के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सके.

9 अगस्त को संसद में पारित हुआ था विधेयक

संसद ने इस कानून के तहत गिरफ्तारी के खिलाफ चुनिंदा सुरक्षा उपाय करने संबंधी शीर्ष अदालत के निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के लिए 9 अगस्त को विधेयक को मंजूरी दी थी. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) संशोधन विधेयक लोकसभा में 6 अगस्त को पारित हुआ था.

विधेयक में एससी/एसटी के खिलाफ अत्याचार के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत के किसी भी संभावना को खत्म कर कर दिया. इसमें प्रावधान है कि आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और इस कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है.

शीर्ष अदालत ने इस कानून का सरकारी कर्मचारियों के प्रति दुरूपयोग होने की घटनाओं का जिक्र करते हुए 20 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि इस कानून के तहत दायर शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी.

कोर्ट ने इस संबंध में अनेक निर्देश दिए थे और कहा था कि एससी/एसटी कानून के तहत दर्ज ममलों में लोक सेवक को सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बाद ही गिरफ्फ्तार किया जा सकता है.

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