S M L

पति-पत्नी अब समाज नहीं बल्कि अपनी मर्जी के मालिक बने

अदालत ने यह भी कहा कि पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति समर्पित रहना आदर्श स्थिति है लेकिन समाज की अपेक्षाओं को किसी पर थोपा नहीं जा सकता

Updated On: Sep 27, 2018 04:01 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
पति-पत्नी अब समाज नहीं बल्कि अपनी मर्जी के मालिक बने

पति-पत्नी का रिश्ता आपसी प्रेम, ईमानदारी और समझ से मजबूत होता है, किसी कानून के डर से नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एडल्ट्री की वजह से शादी खराब नहीं होती बल्कि, शादी के रिश्ते में प्रेम ना होने की वजह से एडल्ट्री होती है. अदालत ने यह भी कहा कि पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति समर्पित रहना आदर्श स्थिति है लेकिन समाज की अपेक्षाओं को किसी पर थोपा नहीं जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ है कि किसी कानून या समाज की निगरानी की वजह से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम बनाकर नहीं रखा जा सकता. इसके लिए दोनों के बीच आपसी समझ होना सबसे ज्यादा जरूरी है. आईपीसी के सेक्शन 497 पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने कानून को बदल दिया. 1860 में अंग्रेजों ने यह कानून बनाया था. इस कानून में पत्नी को पति की जायदाद माना गया था.

इस कानून में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे शख्स की पत्नी के साथ उसके पति की मंजूरी के बगैर संबंध बनाता है तो वह जुर्म माना जाएगा. इसमें उस औरत की सहमति के कोई मायने नहीं हैं जिसके साथ वह शख्स संबंध बनाता है.

सेक्शन 497 को इस उदाहरण से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है. मान लें A नाम का शख्स B की पत्नी के साथ B की सहमति से संबंध बनाता है तो वह अपराध नहीं है. अगर B की सहमति के बगैर उसकी पत्नी से रिश्ता जोड़ता है तो वह अपराध है. इसमें शिकायत करने का हक सिर्फ B के पास होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया कि महिला और पुरुष का अलग-अलग अस्तित्व है. महिला किसी पुरुष की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है.

सिर्फ पुरुष अपराधी क्यों?

सेक्शन 497 कानून की एक मुश्किल यह थी कि इसमें सिर्फ पुरुषों को ही अपराधी माना जाता था. यानी A नाम का शख्स B की पत्नी C के साथ संबंध बनाता है तो इस मामले में A अपराधी है लेकिन C की कोई गलती नहीं मानी जाती थी. इस कानून का विरोध लंबे समय से होता आ रहा है.

मौजूदा कानून के मुताबिक, इस तरह के अपराध में पुरुष को 5 साल तक की सजा हो सकती थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अब एडल्ट्री एक्ट या व्याभिचार को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है. यानी पति-पत्नी के रिश्ते से बाहर जाकर किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाना अनैतिकता हो सकती है लेकिन अपराध नहीं होगा.

इस कानून के क्या मायने हैं?

देश में अभी भी 158 साल पुराना कानून चल रहा था. समाज और परिवार का गठन जिस तरह से हुआ है उसमें स्त्री और पुरुष को खासतौर पर एडल्ट्री के पैमाने पर बराबर माना बहुत बड़ा कदम है. ऐसा नहीं है कि एडल्ट्री कानून को अपराध की सीमा से बाहर रखने से पहले पुरुष दूसरी शादीशुदा महिलाओं के साथ संबंध नहीं रखते थे. लेकिन अब यह फैसला पति-पत्नी को करना है कि उन्हें अपना संबंध आदर्श बनाकर रखना है या फिर अपनी मर्जी का करना है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi