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गैरकानूनी टेलीफोन एक्सचेंज प्रकरण सुप्रीम कोर्ट ने मारन की याचिका खारिज की

विशेष सीबीआई अदालत ने 14 मार्च को इस मामले में मारन बंधुओं और पांच अन्य को आरोपमुक्त करते हुए कहा था कि पहली नजर में उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है.

Updated On: Aug 17, 2018 08:40 PM IST

Bhasha

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गैरकानूनी टेलीफोन एक्सचेंज प्रकरण सुप्रीम कोर्ट ने मारन की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने 'गैरकानूनी' टेलीफोन एक्सचेंज लगाने से संबंधित मामले में मारन बंधुओं और अन्य को आरोप मुक्त करने पर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर उद्योगपति कलानिधि मारन की याचिका खारिज कर दी है. मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करने का फैसला दिया था.

जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ द्वारा कलानिधि मारन की याचिका खारिज करने के साथ ही मारन बंधुओं और अन्य के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमे का रास्ता साफ हो गया. कलानिधि मारन को अब अपने भाई एवं पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन और अन्य के साथ निचली अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले, 30 जुलाई को पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन की याचिका भी खारिज कर दी थी. उन्होंने भी हाई कोर्ट के 25 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी. यह मामला यूपीए-1 के शासन के दौरान दयानिधि मारन के बतौर संचार मंत्री कार्यकाल से संबंधित है.

सीबीआई ने आरोप लगाया गया है कि दयानिधि मारन ने अपने पद का दुरूपयोग करके चेन्नई स्थित अपने रिहायशी परिसरों में निजी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित कराये थे और इनकी लाइनों का इस्तेमाल सन नेटवर्क के कारोबार के लिये किया गया था. सीबीआई के अनुसार चेन्नई में बोट क्लब और गोपालपुरम इलाकों में मारन के आवासीय परिसर पर लगी इन लाइनों का कोई बिल नहीं बना था. जिसकी वजह से 1.78 करोड़ रूपए के राजस्व का नुकसान हुआ.

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