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जानिए, Rafale Deal के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, नौ बड़ी बातें

जानिए, शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्या मुख्य बातें कहीं

Updated On: Dec 14, 2018 03:23 PM IST

FP Staff

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जानिए, Rafale Deal के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, नौ बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील पर शुक्रवार को फैसला सुना दिया. कोर्ट ने इस सौदे की जांच के लिए दाखिल की गई हर याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा है  कि इस मामले की जांच करना उसके न्यायक्षेत्र के अधिकार में नहीं है.

कोर्ट ने ये भी कहा कि 36 राफेल जेट की खरीद की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं और खरीद की कीमत की जांच करना कोर्ट का काम नहीं है.

कांग्रेस ने कहा है कि कोर्ट ने महीनों पहले कही गई उसकी बात ही दोहराई है, जब पार्टी ने कहा था कि इस मसले का हल सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो सकता.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को ही इस मामले की सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख लिया था. जानिए, शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्या मुख्य बातें कहीं-

- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस सौदे की जांच, खरीद प्रक्रिया और ऑफसेट पार्टनर चुनने की प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती.

- कोर्ट ने कहा कि उसे इस सौदे में व्यापारिक पक्षपात नहीं मिला.

- कोर्ट ने कहा कि उसे खरीद की प्रक्रिया में कोई संदेह नहीं है.

- कोर्ट ने कहा कि अब वो इस पर सवाल नहीं उठा सकती कि पूर्व में किए गए 126 राफेल जेट्स की बजाय 36 जेट क्यों खरीदे गए. ये एक मजबूत तथ्य है कि 126 जेट्स पर मामला नहीं बनने के बाद 36 जेट खरीदे गए.

- 36 जेट के सौदे के पत्र पर सितंबर, 2016 में हस्ताक्षर किया गया था. ये याचिकाएं ओलांद के इंटरव्यू और मीडिया कवरेज के बाद दाखिल की गई थीं. किसी की व्यक्तिगत विचारधारा पर कोर्ट रिव्यू नहीं दे सकता.़

- कॉन्ट्रैक्ट के कुछ अनुच्छेदों में थोड़े बदलाव का हवाला देकर इस सौदे को किनारे नहीं किया जाना चाहिए.

- सरकार की ओर से कहा गया है कि ऑफसेट पार्टनर को चुनने में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. दसॉ एविएशन ने खुद अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयंस को चुना.

- पहले और वर्तमान के राफेल सौदे की कीमत का हम अपनी पॉवर का इस्तेमाल करके रिव्यू नहीं कर सकते. इस पर सरकार की ओर से सफाई दी गई है कि ये डील देश के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है. और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर हम इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते.

- हमने भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है, जिन्होंने बताया है कि देश को चौथी और पांचवीं जेनरेशन के फाइटर जेट्स चाहिए. ये कोर्ट के लिए अच्छा नहीं है कि वो डील के हर पहलू पर याचिकाओं पर सुनवाई करे.

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