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4 राजनीतिक हत्याओं के दोषी की सजा राम नाईक ने की थी माफ, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मार्कंडेय शाही की याचिका को खारिज करते हुए इस बात पर हैरानी जताई और कहा कि राज्यपाल ने कैसे अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किसी ऐसे अपराधी को रिहा करने के लिए किया जो चार हत्याओं का दोषी है

Updated On: Dec 04, 2018 02:07 PM IST

FP Staff

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4 राजनीतिक हत्याओं के दोषी की सजा राम नाईक ने की थी माफ, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के एक फैसले को पलट दिया जिसमें उन्होंने गोरखपुर के रहने वाले 4 राजनीतिक हत्याओं के दोषी की सजा माफ कर दी थी. जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस एमएम शांतनागोडर की पीठ ने कहा कि राज्यपाल के इस फैसले से कोर्ट की चेतना हिल गई है, इसी कारण हमें मजबूरन इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ रहा है.

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, दो जजों की बेंच ने कहा कि दोषी को उम्र कैद की सज़ा हुई थी, तो आखिर क्या कारण है कि सिर्फ सात साल की सज़ा काटने के बाद ही उसे छोड़ने का फैसला लिया गया. कोर्ट ने कहा कि यह हमारे विवेक को झकझोरने वाला है. इसीलिए हमें अपने शक्ति का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने मार्कंडेय शाही की याचिका को खारिज करते हुए इस बात पर हैरानी जताई और कहा कि राज्यपाल ने कैसे अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किसी ऐसे अपराधी को रिहा करने के लिए किया जो चार हत्याओं का दोषी है. कोर्ट ने कहा, 'सिर्फ यही नहीं, ये फैसला राज्यपाल द्वारा तब लिया गया है जब उसको मिली सजा के खिलाफ मामला हाईकोर्ट में चल रहा है.' हमें नहीं पता कि यह क्यों किया गया. कोर्ट ने कहा कि हमें कुछ और नहीं कहना है.

जेल में रहने दीजिए, जरूरत पड़ने पर होगा इलाज

शाही के वकील अमरेंद्र शरन ने दलील दी कि राज्यपाल अपने द्वारा लिए गए संवैधानिक फैसलों का कारण बताने को बाध्य नहीं हैं, लेकिन इस दलील से कोर्ट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. कोर्ट ने कहा कि दोषी जमानत पर बाहर था उस वक्त उसने चार अलग-अलग आपराधिक मामलों को अंजाम दिया. आजीवन कारावास की सजा में से उसने सिर्फ 7 साल ही काटे थे. ऐसे आदमी को कैसे समयपूर्व रिहा किया जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में 10 साल की लीव ग्रांट कर देते हैं ताकि 10 साल बाद जब अपील आए तबतक वह सलाखों के पीछे ही रहे.

कोर्ट के इस सवाल पर शाही के वकील ने दोषी मार्कंडेय शाही के खराब स्वास्थ्य को जमानत की वजह बताई. इस पर बेंच ने पूछा कि क्या उन्हें बैक पेन है? उन्हें जेल में ही रहने दीजिए. वे लोग जरूरत पड़ने पर उनका इलाज करावाएंगे.

मार्कंडेय शाही ने ये हत्याएं 1987 में की थीं. उस वक्त पूरा पूर्वांचल में हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही के नियंत्रण में था. इन दोनों में राजनीतिक विरोध था. जहां ये अपराध किए गए थे वो जगह इस वक्त महाराजगंज ज़िले में पड़ती है.

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सितंबर 2017 में शाही की सज़ा माफ कर दी थी, जबकि एसएसपी और जिलाधिकारी ने शाही को समय पूर्व मुक्त किए जाने की सिफारिश नहीं की थी. ऐसे में राम नाईक ने संविधान में अनुच्छेद 161 के तहत दिए गए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शाही को मुक्त करने का फैसला लिया था.

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