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SC के निर्देश के मुताबिक मनाएं सेफ दिवाली, जानें क्या होते हैं ग्रीन पटाखे

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिवाली पर पटाखे जलाने पर रोक नहीं है लेकिन पटाखे रात 8 से 10 बजे के बीच सिर्फ 2 घंटे के लिए ही जलाए जा सकेंगे. साथ ही दिवाली पर सिर्फ ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है

Updated On: Oct 24, 2018 01:06 PM IST

FP Staff

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SC के निर्देश के मुताबिक मनाएं सेफ दिवाली, जानें क्या होते हैं ग्रीन पटाखे
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दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिवाली पर पटाखे जलाने पर रोक नहीं है लेकिन पटाखे रात 8 से 10 बजे के बीच सिर्फ 2 घंटे के लिए ही जलाए जा सकेंगे. साथ ही दिवाली या अन्य किसी त्योहार पर सिर्फ ग्रीन पटाखे यानी कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. सबसे पहला सवाल तो ये ही है कि आखिर क्या हैं ये ग्रीन पटाखें? ऐसे कौन से पटाखे हैं जिन्हें जलाने से प्रदूषण कम होता है?

ग्रीन पटाखों में धूल को सोखने की क्षमता होती है

दरअसल वैसे तो किसी भी पटाखे को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं बनाया जा सकता लेकिन CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने पटाखों का ऐसा फॉर्म्युला तैयार किया है जिसे ग्रीन पटाखों की कैटिगरी में रखा जा सकता है. इन पटाखों में धूल को सोखने की क्षमता होती है. साथ ही इन पटाखों से होने वाला उत्सर्जन लेवल भी बेहद कम है. इनमें पटाखों का एक फॉर्म्युला ऐसा भी है जिससे वॉटर मॉलिक्यूल्स उत्पन्न हो सकते हैं जिससे धूल और खतरनाक तत्वों को कम करने में बहुत मदद मिलती है.

ई-कैक्रर यानी इलेक्ट्रॉनिक पटाखों का प्रोटोटाइप भी तैयार है 

प्राप्त जानकारी के अनुसार ई-कैक्रर यानी इलेक्ट्रॉनिक पटाखों का प्रोटोटाइप भी तैयार है और अगर लोग चाहें तो दिवाली पर ई-पटाखों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. CSIR के NEERI इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए पटाखों के इन फॉर्म्युलों को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन PESO के पास भेजा जा चुका है और एक बार PESO इसे अप्रूव कर दे उसके बाद इन पटाखों का निर्माण तेजी से किया जाएगा ताकि दिवाली के मौके पर पटाखों की डिमांड को लोगों के लिए पूरा किया जा सके.

तमिलनाडु के सिवाकाशी में होता है सबसे ज्यादा पटाखा उत्पादन 

CSIR के इन ग्रीन पटाखों की मदद से खतरनाक नाइट्रस ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड के साथ ही छोटे-छोटे कणों के उत्सर्जन में भी 30 से 35 फीसदी की कमी लाई जा सकेगी. हालांकि इन पटाखों का उत्पादन कब शुरू होगा और ये ग्रीन पटाखे इस बार की दिवाली से पहले आम लोगों को मिल पाएंगे या नहीं ये बात अभी भी अधर में लटकी हुई है. भारत के तमिलनाडु के सिवाकाशी को देश में पटाखा उत्पादन का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है.

पहले पटाखों में गन पाउडर का इस्तेमाल किया जाता था

सबसे पहले पटाखों में गन पाउडर का इस्तेमाल किया जाता था. इसी के चलते प्रदूषण फैलाने में पटाखों की अहम भूमिका रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग एक तय समय में बहुत ज्यादा पटाखे जलाते हैं. साथ ही थोड़ी सी जगह में ढेर सारे पटाखे जलाए जाते हैं जिससे निकलने वाला धुंआ सीधा शरीर के अंदर प्रवेश करता है. पटाखों से निकलने वाले धुएं की वजह लोगों को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है. से अक्यूट अस्थमा का अटैक आ सकता है, निमोनिया के मामले बढ़ सकते हैं, फेफड़ों से संबंधित गंभीर बीमारी हो सकती है, सांस लेने में तकलीफ होने लगती है.

पटाखों की बिक्री और इसे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री और इसे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में लोगों की भावनाएं और प्रकृति के हालात के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. कोर्ट ने अपने आदेश में पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि इसके लिए कुछ शर्ते भी लगाई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि केवल उन्हीं पटाखों को बेचने की अनुमति होगी जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो. सुप्रीम कोर्ट ने सेफ और ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक, ये पटाखे एक तय समय में तय किए गए एरिया में ही बेचे जाएंगे. अपने मन से आप कहीं भी पटाखों की बिक्री नहीं कर सकते.

दिवाली के दिन सिर्फ दो घंटे के लिए ही पटाखे जला पाएंगे

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दिवाली को आप सिर्फ दो घंटे के लिए ही पटाखे जला पाएंगे. इसके लिए तय समय है राम 8 से 10 बजे तक. इसके अलावा क्रिसमस और नए साल के मौके पर फायरक्रैकर्स रात 11.55 से रात 12.30 तक ही छोड़े जा सकते हैं. पटाखें कोई भी नहीं बेच सकता है. पटाखे बेचने के लिए आपके पास लाइसेंस होना अनिवार्य है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ऑनलाइन माध्यमों पर पटाखे नहीं बेचे जा सकेंगे. इसका मतलब हुआ कि आप ई-कॉमर्स वेबसाइटों से पटाखे नहीं खरीद पाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में धार्मिक जलसों में भी पटाखे जलाने पर बैन लगा दिया है. कोर्ट ने कहा है कि पटाखे से जुड़े आदेश दूसरे धर्म पर भी लागू हों.

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