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सुप्रीम कोर्ट चाहे कुछ भी कहे, खाप ऐसी ही रहेगी!

कुछ साल पहले भीड़ गुस्से में हत्याएं करती थी, अब लोग हत्या करते हैं भीड़ सही ठहराती है

Updated On: Feb 06, 2018 05:55 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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सुप्रीम कोर्ट चाहे कुछ भी कहे, खाप ऐसी ही रहेगी!

अंतरजातीय और सगोत्रीय विवाह के खिलाफ फरमान सुनाने वाली खाप पंचायतों और ऐसे दूसरे संगठनों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार को कड़े कदम उठाने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो बालिग अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं, इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है.

सवाल उठता है कि क्या खाप पंयायतें या सरकारें इस दिशा में कोई कदम उठाएंगी. संभावना कम है. वैचारिक रूप से खाप जितनी भी अप्रासंगिक और कन्फ्यूज़ हो जाए, देश के बदलते राजनीतिक तौरतरीकों में उसकी पकड़ मजबूत हो रही है. दक्षिणपंथ के कट्टरपंथी दलों और सेनाओं को छोड़ दीजिए, 'आम आदमी' अरविंद केजरीवाल और लोकतंत्र की खूबसूरती की बात करने वाले योगेंद्र यादव भी घुमा-फिराकर खाप का समर्थन करते रहे हैं.

1500 साल पुरानी व्यवस्था

खाप वाले अपनी व्यवस्था को रामायण और भगवान शिव से जोड़कर देखते हैं. उनके हिसाब से राम की वानर सेना अलग-अलग गोत्रों की खाप थी. शिव की पत्नी सती के मरने के बाद दक्ष को सबक सिखाने वाले खाप ही थे. मगर इतिहासकार खाप को थानेसर के राजा हर्षवर्धन से जोड़ते हैं.

हर्ष की के गोत्र को लेकर इतिहासकारों की राय अलग-अलग है मगर इसबात को लेकर सभी सहमत हैं कि सर्वखाप पंचायत की स्थापना हर्ष ने की थी.

हर्ष को भारत के सबसे महान शासकों में एक माना जाता है. उनके समय में बहुत कुछ ऐसा हुआ जिसपर भारत और भारतीयों को गर्व होना चाहिए. मगर हर्ष के शासन को खत्म हुए लगभग 1500 साल हो चुके हैं. इन 15 शताब्दियों में दुनिया काफी बदल गई, मगर खाप वालों के विचार नहीं बदले. इसके साथ ही वो दुनिया को भी अपनी पंचायत और फरमानों के बीच बांधे रखना चाहते हैं. अक्सर इसके पीछे समाज और विज्ञान की खोखली दलीले होती हैं.

खोखले हैं खाप के तर्क

मसलन खाप वाले सगोत्रीय विवाह के खिलाफ हैं. मनोज और बबली की हत्या सबको याद होगी. खाप ने उनके हत्यारों के लिए हर घर से 10 रुपए जमा किए थे. खाप का तर्क होता है कि विज्ञान के अनुसार एक गोत्र में शादी करने से लोगों में जेनेटिक्स की बीमारियां होती हैं. इसलिए सगोत्रीय विवाह खराब है. विज्ञान की ये आधी-अधूरी दलील है. एक ही वंश में शादी करने से जेनेटिक्स का खतरा ज्यादा होता है. लेकिन एक वंश को आप कहां तक गिनेंगे? 4-5 पीढ़ी तक या अनंतकाल तक? इस लिहाज से देखें तो हम सब एक ही जीव से पैदा हुए हैं. या एक धर्म के लोगों के पूर्वज एक ही हैं. तो अगल धर्म, जाति और देश के लोगों से शादी करना बेहतर ऑप्शन है. मगर खाप को हर उस चीज़ से दिक्कत है जो 600 सालों से जरा भी आगे बढ़ती दिखती है.

मसलन कुछ साल पहले खाप ने फरमान जारी किया था कि 40 साल से कम उम्र की औरतें बाजार न जाएं. लड़कियां मोबाइल न रखें. ये फरमान ठीक वैसे ही हैं. जैसे हम दुनिया के कुछ सबसे दकियानूसी देशों में देखते हैं. इसके साथ ही ये भी याद रहे कि खाप ये सारी बातें जहां कहती हैं वहां लड़कियां कई-कई बार बेची जा रही हैं. भ्रूण हत्या हो रही है.

दिक्कत ये है कि खाप का असर पिछले कुछ सालों में अनचाहे तरीकों से बढ़ा है. मसलन पिछले कुछ समय में हुई ऑनर किलिंग की घटनाओं में बदलाव को देखिए. आज से दशक भर पहले की ऐसी हत्याओं में भीड़ पागल होकर फैसला देती थी. तमाम ऐसी हत्याओं में भीड़ थी, जिसकी अगुवाई कुछ लोग करते थे. या फिर वो नीतीश कटारा जैसे हत्याकांड को 'ताकतवर' वर्ग अंजाम देता था.

अब अंकित, अखलाक, अफराजुल जैसे हत्याकांड उन लोगों ने अंजाम दिए हैं जो न ताकतवर हैं, न भीड़ के मुखिया. हां ऐसे लोगों को विश्वास है कि भीड़ उनके समर्थन में आएगी, उन्हें नायक बनाएगी. ऐसा होता भी है. वैसे भी जिस देश में मुख्यमंत्री साल भर के पुलिस एनकाउंटर की गिनती को अपनी उपलब्धि बताते हों, वहां अपराध को परंपरा के नाम पर सर माथे पर रखना कोई बड़ी बात नहीं.

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