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कोर्ट कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग-वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए या नहीं, आज SC देगा फैसला

कोर्ट ने 24 अगस्त को इस मुद्दे पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. बेंच कोर्ट में भीड़भाड़ को कम करने के लिए ‘ओपन कोर्ट’ की परिकल्पना ला रही है

Updated On: Sep 26, 2018 09:24 AM IST

FP Staff

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कोर्ट कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग-वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए या नहीं, आज SC देगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने निर्णय सुनाने वाला है. इन मामलों में अदालती कार्यवाही का सीधे प्रसारण यानी लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए या नहीं, ये भी शामिल है.

काफी वक्त से बहस है कि कोर्ट की कार्यवाही को सार्वजनिक परिप्रेक्ष्य में लाया जाना चाहिए या नहीं. इस पर कोर्ट की कार्यवाही को लाइव स्ट्रीम किए जाने और वीडियो रिकॉर्डिंग बनाए जाने की मांग उठती रही है.

आज यानी बुधवार को कोर्ट अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण या वीडियो रिकार्डिंग दिखाने की अनुमति देने संबंधी विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुना सकता है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम एम खानविल्कर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने 24 अगस्त को इस मुद्दे पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. बेंच का कहना है कि वह अदालतों में भीड़भाड़ को कम करने के लिए ‘खुली अदालत यानी ओपन कोर्ट’ की परिकल्पना को लागू करना चाहती है.

केंद्र की ओर से पेश पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक अहमियत रखने वाले मुद्दों पर सुनवाई की कार्यवाहियों पर लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने  इसके लिए गाइडलाइंस भी सुझाई थी.

वेणुगोपाल ने कहा था कि इस प्रोजेक्ट की सफलता-असफलता से ही ये तय होगा कि सुप्रीम कोर्ट और देश भर के कोर्ट की कार्यवाहियों की लाइवस्ट्रीमिंग होनी चाहिए या नहीं.

उन्होंने ये भी कहा था कि लाइव स्ट्रीमिंग को 70 सेकेंड की देरी से शुरू किया जाना चाहिए ताकि अगर वकील गलत व्यवहार करता है या मामला संवेदनशील है तो बेंच स्ट्रीमिंग का साउंड म्यूट कर सके.

बेंच ने कहा था कि 'हमें लाइव स्ट्रीमिंग में कोई दिक्कत नहीं है. चलिए इसे शुरू करते हैं और देखते हैं कि कैसा जाता है. हम अभी पायलट प्रोजेक्ट ही शुरू कर रहे हैं और अभी कोई फैसला नहीं दे रहे हैं. वक्त के साथ देखेंगे. हम सब कुछ एक साथ नहीं कर सकते.' कोर्ट ने इस मांग को वक्त की जरूरत बताया था.

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सीनियर लॉयर इंदिरा जयसिंह, लॉ स्टूडेंट स्नेहिल त्रिपाठी और सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज एनजीओ की ओर से दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

सुनवाई के दौरान इस एनजीओ का पक्ष रख रहे वकील विराग गुप्ता ने सुझाव दिया कि कोर्ट की कार्यवाही को लाइव स्ट्रीम करने या कोई चैनल लाने की बजाय वीडियो रिकॉर्डिंग कर कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर डाला जाए.

केंद भी इसके पहले कह चुका है कि संवैधानिक मामलों की कोर्ट की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रायल बेस पर करवाई जा सकती है.

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