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दो सीनियर जजों ने की चीफ जस्टिस से पूर्ण अदालत बुलाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट की परंपरा के अनुसार पूर्ण अदालत की बैठक में सभी जज शामिल होते हैं. इस तरह की बैठक सीजेआई आम तौर पर न्यायपालिका से संबंधित सार्वजनिक महत्व के मामलों पर चर्चा के लिए बुलाते हैं

FP Staff Updated On: Apr 25, 2018 07:39 PM IST

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दो सीनियर जजों ने की चीफ जस्टिस से पूर्ण अदालत बुलाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट के दो सबसे सीनियर जजों जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने न्यायपालिका के सामने खड़े संस्थागत मुद्दों पर चर्चा के लिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से पूर्ण अदालत की बैठक बुलाने का अनुरोध किया है.

यह पत्र प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस को राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के खारिज करने के एक दिन पहले लिखा गया था.

ऐसा समझा जाता है कि पत्र में उठाए गए मुद्दों पर सोमवार को चाय पर बुलाई गई बैठक में चर्चा हुई थी. इस बैठक में सभी न्यायाधीशों ने हिस्सा लिया था. इसकी वजह से अदालत की कार्यवाही 15 मिनट की देरी से शुरू हुई थी.

सूत्रों ने बताया कि जस्टिस गोगोई और जस्टिस लोकुर ने 22 अप्रैल को दो लाइन के संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर किए. इसमें उन्होंने 'पूर्ण अदालत' की बैठक बुलाने की बात कही थी.

इसी मुद्दे को 21 मार्च को जस्टिस जे चेलमेश्वर ने पहली दफा उठाया था. इसके बाद जस्टिस कुरियन जोसफ ने नौ अप्रैल को इसी तरह का पत्र लिखा था. उन्होंने शीर्ष अदालत से संबंधित मुद्दों पर विचार करने के लिए सात सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीशों की पीठ बनाने की मांग की थी.

जस्टिस जोसेफ ने बताया कि जस्टिस गोगोई और जस्टिस लोकुर द्वारा लिखे गए संक्षिप्त पत्र में सीजेआई से सांस्थानिक मुद्दों और शीर्ष अदालत के 'भविष्य' पर चर्चा करने के लिये न्यायिक पक्ष की तरफ से पूर्ण अदालत की बैठक बुलाने का अनुरोध किया गया.

सुप्रीम कोर्ट की परंपरा के अनुसार पूर्ण अदालत की बैठक में सभी जज शामिल होते हैं. इस तरह की बैठक सीजेआई आम तौर पर न्यायपालिका से संबंधित सार्वजनिक महत्व के मामलों पर चर्चा के लिए बुलाते हैं.

दो अक्टूबर को रिटायर होंगे जस्टिस दीपक मिश्रा

सोमवार की सुबह चाय पर बैठक नायडू द्वारा महाभियोग नोटिस को खारिज करने की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद बुलाई गई थी. सूत्रों ने बताया कि सीजेआई ने बैठक के नतीजे और खासतौर पर पूर्ण अदालत की बैठक के संबंध में कुछ भी नहीं कहा.

हालांकि, जस्टिस गोगोई और जस्टिस लोकुर की राय थी कि महाभियोग के मुद्दे को पीछे छोड़कर आगे बढ़ा जाना चाहिए और सर्वोच्च न्यायपालिका के समक्ष मुद्दों का हल निकालने के लिए न्यायाधीशों के बीच चर्चा होनी चाहिए. बता दें कि चीफ जस्टिस मिश्रा दो अक्तूबर को रिटायर होने वाले हैं और उनके बाद जस्टिस गोगोई अगले CJI हो सकते हैं.

एक न्यायाधीश को पदोन्नत करने और एक वरिष्ठ महिला वकील की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति किए जाने के संबंध में कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देने में सरकार की ओर से विलंब से नाराज जस्टिस जोसफ ने सीजेआई को पत्र लिखकर दावा किया था कि संस्थान का अस्तित्व खतरे में हैं और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत है. उन्होंने सीजेआई से नियुक्ति के मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए सात सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीशों की पीठ गठित करने का अनुरोध किया था.

सभी जजों को 21 मार्च को भेजे गए अपने पत्र में जस्टिस चेलमेश्वर ने सीजेआई से न्यायपालिका में कार्यपालिका के कथित हस्तक्षेप के मुद्दे पर चर्चा के लिए पूर्ण अदालत की बैठक बुलाने का अनुरोध किया था.

(साभार: न्यूज़18)

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