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गरीबों के शोषण पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने नाराजगी के साथ सरकार की ओर से वकील से जानना चाहा, 'क्या गरीब जनता के प्रति भारत सरकार का यही रवैया है.'

Updated On: May 01, 2018 11:01 PM IST

Bhasha

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गरीबों के शोषण पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि उसने निर्माण मजदूरों के कल्याण से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत के निर्देशों के पालन के लिए समयसीमा तय करने के लिए समिति गठित की है. कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई. सरकार के रवैये की तीखी आलोचना करते हुए कोर्ट ने कहा, 'बहुत हो गया. यह तो गरीबों का शोषण है.'

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने नाराजगी के साथ सरकार की ओर से वकील से जानना चाहा, 'क्या गरीब जनता के प्रति भारत सरकार का यही रवैया है.'

पीठ ने सवाल किया, 'समयसीमा निर्धारित करने के लिए आपने एक समिति गठित की है? यह हो क्या रहा है? हमारे मुताबिक आप बीस से पच्चीस हजार करोड़ रुपये पर बैठे हुए हैं. क्या देश की गरीब जनता के प्रति भारत सरकार का यही रवैया है?'

बेंच ने आगे कहा, 'बहुत हो गया. यह गरीबों का शोषण है.' इसके साथ ही पीठ ने सरकार से जानना चाहा कि निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए रखी इतनी बड़ी रकम का उसने क्या किया.

यह भी संयोग है कि अदालत ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर इतनी सख्त टिप्पणियां कीं. सुप्रीम कोर्ट ने श्रम मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया कि वह सात मई को सुनवाई के दौरान न्यायालय में मौजूद रह कर बताएं कि उसके आदेशों और इस विषय पर संसद द्वारा बनाए गए दो कानूनों पर अमल के बारे में क्या हो रहा है.

कुछ राज्यों का प्रतिनिधि कर रहे वकील ने पीठ से जब कहा कि उन्होंने कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन किया है तो पीठ ने पलट कर तल्खी से कहा, 'आपने वाशिंग मशीनें और लैपटॉप खरीदने के अलावा क्या किया है.'

नाराजगी जाहिर करते हुए पीठ ने कहा, 'यह हैरान करने वाला है. क्या यह मजाक है? ये निर्माण मजदूर वे लोग हैं जिनके पास कोई शिक्षा नहीं है, धन नहीं है और भवन निर्माता उनका शोषण करते हैं और भारत सरकार कह रही है कि वह कुछ नहीं करेगी.'

इससे पहले, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि निर्माण मजदूरों के कल्याण के निमित्त धन का बड़ा हिस्सा लैपटॉप और वाशिंग मशीनें खरीदने पर खर्च किया गया और मुख्य काम पर तो दस फीसदी से भी कम रकम खर्च किया गया है.

न्यायालय ने 19 मार्च को केन्द्र से कहा था कि वह निर्माण मजदूरों की शिक्षा, स्वास्थ, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे मुद्दों के लिए 30 सितंबर तक एक मॉडल योजना तैयार करे.

न्यायालय ने कहा था कि मजदूरों के लाभ के लिये 37,400 करोड़ रुपये से अधिक धन एकत्र किया गया लेकिन करीब 9,500 करोड़ रूपये ही उनकी भलाई के लिए खर्च किए गए.

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