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18 राज्यों ने गौरक्षकों और मॉब लिंचिंग पर नहीं पेश की रिपोर्ट, SC ने दी चेतावनी

कोर्ट ने मॉब लिंचिंग और गौरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों पर कदम उठाने के आदेश पर राज्यों की ओर से रिपोर्ट न पेश किए जाने पर नाराजगी जताई है

Updated On: Sep 07, 2018 01:50 PM IST

FP Staff

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18 राज्यों ने गौरक्षकों और मॉब लिंचिंग पर नहीं पेश की रिपोर्ट, SC ने दी चेतावनी
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मॉब लिंचिंग और गौरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों पर कदम उठाने के आदेश पर राज्यों की ओर से रिपोर्ट न पेश किए जाने पर नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की आलोचना की कि 29 राज्यों और सात केंद्रशासित प्रदेशों में से केवल 11 ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और गोरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों में कदम उठाने के कोर्ट के 17 जुलाई के आदेश के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट पेश की है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ऐसा नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी कि अगर उन्होंने एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट पेश नहीं की तो उनके गृह सचिवों को कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा.

इस मामले की सुनवाई के दौरान, केंद्र ने बेंच को सूचित किया कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के मुद्दे पर कोर्ट के फैसले के बाद मॉब लिंचिंग के बारे में कानून बनाने पर विचार के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया है.

कोर्ट कांग्रेस के नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में राजस्थान में 20 जुलाई को डेयरी किसान रकबर खान की कथित तौर पर पीट-पीटकर हुई हत्या के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदेश के पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की मांग की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को कहा था कि 'भीड़तंत्र की भयावह हरकतों' को कानून पर हावी नहीं होने दिया जा सकता. इसके साथ ही गोरक्षा के नाम पर हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने सरकार से ये भी कहा था कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निबटने के लिए वह नया कानून बनाने पर विचार करे.

कोर्ट ने राज्य सरकारों को नोडल ऑफिस में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस से ऊपर की किसी रैंक के बराबर का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नियुक्त करने को कहा था, जिसे डीएसपी असिस्ट करेंगे. इन दोनों अधिकारियों मॉब हिंसा और लिंचिंग को रोकने की जिम्मेदारी होगी. ये दोनों अधिकारी एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाएंगे जो हेट स्पीच और फेक न्यूज के जरिए ऐसे अपराध करने वाले संभावित संदिग्धों पर नजर रखेगी.

कोर्ट ने राज्यों को ऐसे जगहों की पहचान करने को कहा था, जहां पिछले पांच सालों में लिंचिंग और मॉब हिंसा की घटनाएं हुई हैं. राज्यों के गृह सचिवों को को कहा गया था कि वो नोडल ऑफिसरों को ये निर्देश जारी करें कि पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सावधान और तैयार रहें.

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