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संविधान पीठ करेगी CJI के खिलाफ महाभियोग याचिका पर सुनवाई

पंजाब से कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और गुजरात से अमी हर्षदराय याज्ञनिक ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज करने के राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी

FP Staff Updated On: May 07, 2018 09:39 PM IST

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संविधान पीठ करेगी CJI के खिलाफ महाभियोग याचिका पर सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ का गठन किया है. इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एके गोयल शामिल हैं, जो मंगलवार सुबह 10.30 बजे इस मामले की सुनवाई करेंगे.

यहां गौर करने वाली एक और अहम बात यह है कि इस याचिका को वरिष्ठता क्रम में दूसरे से पांचवें स्थान पर आने वाले जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के सामने सूचीबद्ध नहीं किया गया. ये वहीं न्यायाधीश हैं, जिन्होंने 12 जनवरी को विवादित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर कई आरोप लगाए थे.

दरअसल पंजाब से कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और गुजरात से अमी हर्षदराय याज्ञनिक ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज करने के राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनसे कहा था कि वे कल (मंगलवार को) उसके सामने आएं, तभी इस मुद्दे को देखेंगे.

राज्यसभा के सभापति नायडू ने यह कहते हुए नोटिस खारिज कर दिया था कि जस्टिस मिश्रा के खिलाफ किसी तरह के कदाचार की पुष्टि नहीं हुई है. सभापति की इसी व्यवस्था को विपक्ष के दो सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में शामिल वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस एसके कौल की पीठ से तत्काल सुनवाई के लिए यचिका को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था.

पीठ ने मास्टर ऑफ रोस्टर के संबंध में संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए सिब्बल और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण से कहा था कि वह तत्काल सुनवाई के लिए याचिका प्रधान न्यायाधीश के सामने रखें.

सिब्बल ने कहा कि मास्टर ऑफ रोस्टर के संबंध में संविधान पीठ का फैसला उन्हें पता है, लेकिन महाभियोग नोटिस प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ होने के कारण शीर्ष अदालत का वरिष्ठतम जज तत्काल सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध कर सकता है.

सिब्बल ने कहा, 'मुझे प्रक्रिया की जानकारी है, लेकिन इसे किसी अन्य के समक्ष नहीं रखा जा सकता. एक व्यक्ति अपने ही मुकदमे में न्यायाधीश नहीं हो सकता. मैं सिर्फ तत्काल सुनवाई का अनुरोध कर रहा हूं, मैंने कोई अंतरिम राहत नहीं मांगी है.'

उन्होंने कहा कि प्रधान न्यायाधीश सूचीबद्ध करने का आदेश नहीं दे सकते हैं, ऐसी स्थिति में इस न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही कुछ आदेश देना होगा, क्योंकि यह संवैधानिक महत्व का मामला है.

सिब्बल के मुताबिक, पहले कभी ऐसे हालात पैदा नहीं हुए और अदालत को आदेश देना चाहिए कि मामले की सुनवाई कौन करेगा और कैसे करेगा.

उधर सिब्बल के साथ पेश हुए वकील भूषण ने कहा कि नियमों के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश कोई भी आदेश देने में अक्षम हैं और सिर्फ वरिष्ठतम न्यायाधीश ही मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश दे सकता है.

इनकी मांग पर जस्टिस चेलामेश्वर और जस्टिस कौल ने आपस में विचार किया और सिब्बल व भूषण से कहा कि वे कल उनके सामने आएं, ताकि इस मुद्दे पर गौर किया जा सके.

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने के संबंध में विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस को 23 अप्रैल को खारिज कर दिया था. ऐसा पहली बार हुआ है जब मौजूदा प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया गया था.

(साभार: न्यूज18)

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