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महाराष्ट्र के मेडिकल कॉलेज को SC ने दिए निर्देश, 19 छात्रों को दें 20-20 लाख रुपए जुर्माना

शीर्ष अदालत ने कॉलेज से कहा कि वह तीन महीने के भीतर प्रवेश नियंत्रण समिति (पी एन एस) के पास पैसा जमा करे

Updated On: Jun 24, 2018 08:05 PM IST

Bhasha

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महाराष्ट्र के मेडिकल कॉलेज को SC ने दिए निर्देश, 19 छात्रों को दें 20-20 लाख रुपए जुर्माना
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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के एक मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि वह उन सभी 19 छात्रों को 20-20 लाख रुपए का जुर्माना दे जिन्हें छह साल पहले प्रवेश देने से अवैध और गलत तरीके से मना कर दिया गया था.

शीर्ष अदालत ने कॉलेज से कहा कि वह तीन महीने के भीतर प्रवेश नियंत्रण समिति (पी एन एस) के पास पैसा जमा करे. पी एन एस राज्य सरकार द्वारा गठित एक समिति है जो मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों और इनके नियमन से जुड़े काम देखती है.

कॉलेज ने 19 छात्रों को 2012-13 शैक्षिक वर्ष में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में एडमिशन देने से अवैध और गलत तरीके से मना कर दिया था. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने डा. उल्हास पाटिल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जलगांव महाराष्ट्र को मान्यता रद्द किए जाने से बख्श दिया और बम्बई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ के आदेश को कमतर तथा दरकिनार कर दिया क्योंकि संस्थान छात्रों को जुर्माना अदा करने को सहमत हो गया.

मान्यता और संबद्धता खत्म करना उचित नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा, क्योंकि कॉलेज ने 19 छात्रों को भुगतान करने की इच्छा जताई है, जिन्हें दाखिले से वंचित कर दिया गया था, इस तथ्य पर विचार करते हुए कि कई साल गुजर चुके हैं और बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज से पास हो चुके हैं तथा वहां बहुत से छात्र शिक्षा अर्जित कर रहे हैं, ऐसे में एक बार अर्थ दंड लगाए जाने के बाद मान्यता और संबद्धता खत्म करना उचित नहीं होगा.

इसने मान्यता और संबद्धता खत्म करने तथा अवमानना संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देश को कमतर और दरिकनार कर दिया. पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि यदि पी एन एस के पास तीन महीने में जुर्माना जमा नहीं किया जाता है और शीर्ष अदालत को अनुपालन रिपोर्ट दायर नहीं की जाती है तो उच्च न्यायालय का 27 मार्च का आदेश जस का तस बरकरार रहेगा.

उच्च न्यायालय ने 27 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि संबंधित मेडिकल कॉलेज ने 19 योग्य छात्रों को दाखिला देने से अवैध और गलत तरीके से मना कर दिया और मुनाफाखोरी के लिए उनकी जगह कम योग्य छात्रों को दाखिला दे दिया.

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