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प्रेग्नेंसी के चलते कम अटेंडेंस हो फिर भी एग्जाम में बैठने की अनुमति नहीं: SC

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की एलएलबी की 27 साल की छात्रा को कम अटेंडेंस की हालत में कोई रियायत देने से इनकार दिया

Updated On: May 23, 2018 05:07 PM IST

FP Staff

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प्रेग्नेंसी के चलते कम अटेंडेंस हो फिर भी एग्जाम में बैठने की अनुमति नहीं: SC

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी की एलएलबी की 27 साल की छात्रा को कम अटेंडेंस की हालत में कोई रियायत देने से इनकार दिया. इस छात्रा को कम अटेंडेंस के चलते फिलहाल चल रहे सेमेस्टर एग्जाम में भाग लेने से मना कर दिया गया था. डीयू की कानून की दूसरे टर्म की स्टूडेंट अंकिता मीणा ने परीक्षा के चौथे सेमेस्टर में शामिल होने और अटेंडेंस में छूट के लिए कोर्ट में अपील किया था.

मीणा गर्भवती होने के चलते दो महीने कॉलेज अटेंड नहीं कर पाई थीं. कम अटेंडेंस के चलते कॉलेज की तरफ से उन्हें चौथे सेमेस्टर के एग्जाम में बैठने की इजाजत नहीं दी गई थी, जिसके चलते मीणा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कोई राहत नहीं दी तो मीणा सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में आखिरी फैसला सुना दिया है.

इस केस की सुनवाई जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने किया. मीणा के वकीलों आशीष वीरमानी और हिमांशु धूपर ने कहा कहा कि मीणा का पक्ष काफी मजबूत है क्योंकि वो अपनी प्रेग्नेंसी और चाइल्डबर्थ से पैदा हुई स्वास्थ्य समस्याओं के चलते कॉलेज नहीं आ सकी थीं.

मीणा के केस पर 18 मई को दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने उपस्थिति में किसी प्रकार की छूट देने से इंकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि भले ही एलएलबी पाठ्यक्रम के चौथे सेमेस्टर के क्लास में शामिल नहीं होने की वजह सही हो लेकिन बार काउन्सिल आफ इंडिया के कानून की शिक्षा के नियमों के प्रावधानों और पहले के फैसलों को देखते हुए मीणा को राहत नहीं दी जा सकती.

अंकिता मीणा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि उन्हें 16 मई से शुरू हुई एलएलबी के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने दिया जाए.

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