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SC ने योगी सरकार से पूछा- क्या है आपकी ताजमहल पॉलिसी?

अचानक ताज ट्रैपिजियम ज़ोन में चमड़ा उद्योग और होटल की गतिविधियां बढ़ने का कोई खास कारण है क्या

Updated On: Feb 08, 2018 01:48 PM IST

FP Staff

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SC ने योगी सरकार से पूछा- क्या है आपकी ताजमहल पॉलिसी?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश जारी किया है कि चार हफ्तों में ताज महल के संरक्षण के लिए विजन दस्तावेज कोर्ट में दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ताज महल के आस पास के इलाके में होने वाली गतिविधियों के अचानक बढ़ जाने का कारण और ताज ट्रैपिजियम ज़ोन में नए चमड़ा उद्योग और होटल खुलने की वजह भी पूछी है.

ताज ट्रैपिजियम ज़ोन में उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा जिला और राजस्थान के भरतपुर जिले का कुल 10,400 किलोमीटर का क्षेत्र आता है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने सरकार की तरफ से सॉलिलिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, कि अचानक ताज ट्रैपिजियम ज़ोन में चमड़ा उद्योग और होटल की गतिविधियां बढ़ने का कोई खास कारण है क्या. कोर्ट कई दफा उत्तर प्रदेश सरकार को कह चुका है कि आपके पास ताजमहल को संरक्षित रखने का कोई लॉन्ग टर्म प्लान नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट पर्यावरणविद् एम सी मेहता की दायर की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. एम सी मेहता का कहना है कि ताज ट्रैपिजियम ज़ोन पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, और सरकार को ताज के संरक्षण के लिए एक व्यापक नीति पेश करनी चाहिए.

इसी बीच राज्य सरकार ने आगरा शहर में पानी की आपूर्ती के लिए पाइपलाइन बिछाने के लिए 234 पेड़ों को काटने का आवेदन किया है. हालांकि कोर्ट ने इस पर चार हफ्ते बाद सुनवाई को कहा है.

पर्यटन स्थल की बुकलेट में नहीं किया ताज का जिक्र

योगी आदित्यनाथ की सरकार पहले भी 1631 में बने इस मकबरे के लिए चर्चा में आ चुकी है. बीते दिनों यूपी के पर्यटन विभाग ने राज्य के दर्शनीय पर्यटन स्थलों की एक बुकलेट जारी की थी. 32 पन्नों की इस बुकलेट में मथुरा, अयोध्या, देवीपाटन गोरखपुर और चित्रकूट जैसे हिंदू धार्मिक महत्व के स्थलों के बारे विस्तृत जानकारी मौजूद थी. लेकिन यूपी ही नहीं बल्कि पूरे भारत में सबसे ज्यादा पर्यटकों को लुभाने वाले ताजमहल की तस्वीर इस बुकलेट से नदारद थी. मुद्दा गरमाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्री सफाई देते नजर आए थे. योगी सरकार की ताज महल से इस बेरुखी के बाद उनकी बहुत किरकिरी हुई थी.

ताज के पास पार्किंग बनाने की बात पर भी खा चुके हैं फटकार

पिछले साल नवंबर महीने में भी सुप्रीम कोर्ट ताज महल के पास निर्माण कार्य को लेकर योगी सरकार को फटकार लगा चुका है. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ताज संरक्षित क्षेत्र में मल्टी लेवल पार्किंग बनाने के लिए 11 पेड़ काटने की इजाजत मांगी थी. जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'ताजमहल एक ही है. एक बार ये नष्ट हो गया, तो फिर दोबारा नहीं बनेगा.' कोर्ट ने कहा कि ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में गाड़ियों के चलने पर प्रतिबंध जारी रहेगा.

ताज महोत्सव के भगवाकरण का भी लगा है आरोप

हाल ही में योगी सरकार और ताज से उनके संबंध चर्चा में आए जब योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान होने वाले पहले ताज महोत्सव की थीम को बदला गया. इस बार 18 फरवरी को शुरू होने वाले ताज महोत्सव में मुगल हरिटेज के दर्शन नहीं होंगे, बल्कि राम लीला का मंचन होगा. जिस पर विपक्ष का कहना है कि बीजेपी सालों से चली आ रही परंपरा का भगवाकरण कर रही है.

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