विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- क्या जजों की सैलरी बढ़ाना भूल गए हैं?

सातवां वेतन आयोग लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी के हिसाब से जजों का वेतन बढ़ाने की बात थी लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हुआ है

FP Staff Updated On: Nov 01, 2017 05:18 PM IST

0
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- क्या जजों की सैलरी बढ़ाना भूल गए हैं?

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र में एक बार फिर ठन सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक सवाल पूछा है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है, 'क्या केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की सैलरी बढ़ाना भूल गई है?'

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस जे चेलेश्वर की बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान बताया कि जजों की सैलरी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद नौकरशाहों से भी कम है.

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल पी नरसिम्हा राव से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन के बारे में क्या विचार है?

जस्टिस नजीर और जस्टिस चेलेश्वर की बेंच एपेक्स कोर्ट के स्टाफ और अधिकारियों के लिए वॉशिंग अलाउंस (धुलाई भत्ता) देने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, तब जजों ने सातवें वेतन आयोग के तहत जजों के वेतनमान पर सवाल उठाया.

बता दें कि सातवां वेतन आयोग लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी के हिसाब से जजों का वेतन बढ़ाने की बात थी. इस प्रस्ताव को मार्च में ही केंद्रीय सरकार की ओर से स्वीकार कर लिया गया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई है.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद से नौकरशाही के सबसे ऊंचे स्तर पर बैठे कैबिनेट सचिव की सैलरी 2.5 लाख हर महीने है लेकिन हैरानी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की सैलरी इसकी आधी भी नहीं है. चीफ जस्टिस की सैलरी 1 लाख रुपए प्रति माह है.

इसके साथ ही केंद्र सरकार के अंडर काम कर रहे सीनियर अधिकारियों को कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं. चीफ जस्टिस को एचआरए और दूसरे भत्ते कुल मिलाकर भी इन अधिकारियों के भत्तों के आगे कम हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों को 90 हजार प्रति माह और हाईकोर्ट के जजों को 80 हजार प्रतिमाह मिलता है.

जजों की सैलरी को घटाना-बढ़ाना केंद्र के ही हाथ में होता है. जजों की सैलरी बढ़ाने के लिए संसद में बिल पास कराया जाता है इसके बाद ही कोई संशोधन होता है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi