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बिलकिस बानो केस: SC ने गुजरात सरकार से पूछा, दोषियों पर कार्रवाई हुई?

एक विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा दी थी

Updated On: Nov 24, 2017 02:52 PM IST

Bhasha

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बिलकिस बानो केस: SC ने गुजरात सरकार से पूछा, दोषियों पर कार्रवाई हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को यह बताने के लिए शुक्रवार को छह हफ्तों का समय दिया कि साल 2002 के बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में दोषी ठहराये गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है या नहीं?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की एक पीठ ने राज्य सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुशार मेहता के उस आग्रह पर विचार किया कि मामले में संबंधित अधिकारियों को निर्देश के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए.

पीठ ने मामले की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते में निर्धारित की है. पीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि बिलकिस बानो को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाए जाने संबंधी एक अलग याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर को भी राज्य सरकार को यह बताने के लिए समय दिया था कि बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है या नहीं.

बंबई हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में चार मई को 12 लोगों की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था जबकि पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों समेत सात लोगों को बरी किए जाने के फैसले को खारिज कर दिया था.

बिलकिस बानो से मार्च 2002 में सामूहिक बलात्कार किया गया और उस समय वह गर्भवती थी. उसे गोधरा ट्रेन जलाए जाने की घटना के बाद के घटनाक्रम में अपने परिवार के सात सदस्यों को खोना पड़ा था.

पीठ ने IPC की धारा 218 के तहत अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने और सबूतों से छेड़छाड़ (धारा 201) पर पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों समेत सात लोगों को दोषी ठहराया था.

2002 में हुआ था बिलकिस बानो से रेप

दोषी पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों में नरपत सिंह, इदरिस अब्दुल सैयद, बीकाभाई पटेल, रामसिंह भाभोर, सोमभाई गोरी, अरुण कुमार प्रसाद (डॉक्टर) और संगीता कुमार प्रसाद (डॉक्टर) शामिल हैं.

एक विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा दी थी. इसके बाद इन लोगों ने खुद को दोषी ठहराए जाने को चुनौती देते हुए बंबई हाईकोर्ट का रुख किया और निचली अदालत के फैसले को खारिज किए जाने का आग्रह किया.

सीबीआई ने भी होईकोर्ट में एक अपील दायर कर इस आधार पर तीन दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का आग्रह किया कि वे इस मामले में मुख्य अपराधी हैं. अभियोजन पक्ष के अनुसार तीन मार्च, 2002 को अहमदाबाद के निकट रंधिकपुर गांव में बिलकिस बानो के परिवार पर एक भीड़ ने हमला किया था और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी.

अहमदाबाद में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. हालांकि बिलकिस बानो के गवाहों को नुकसान पहुंचाए जाने और सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंकाएं जताए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगस्त 2004 में मुंबई स्थानांतरित कर दिया था.

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