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सुप्रीम कोर्ट ने दी आर्नल्ड कियारी सिंड्रोम से ग्रस्त भ्रूण के अबोर्शन की अनुमति

इस मामले में पहली महिला 29 सप्ताह से गर्भवती थी जबकि दूसरी महिला का गर्भ 30 सप्ताह का था

Updated On: Oct 09, 2017 10:28 PM IST

Bhasha

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सुप्रीम कोर्ट ने दी आर्नल्ड कियारी सिंड्रोम से ग्रस्त भ्रूण के अबोर्शन की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने दो महिलाओं को गर्भावस्था के अग्रिम चरण में आर्नल्ड कियारी सिंड्रोम से ग्रस्त भ्रूण के अबोर्शन की अनुमति प्रदान कर दी. आर्नल्ड कियारी सिंड्रोम ऐसी अवस्था है जिसमे भ्रूण की शारीरिक संरचना त्रुटिपूर्ण होती है जिसकी वजह से उसका मस्तिष्क अविकसित होता है और रीढ़ में विकृति आ जाती है.

जस्टिस ए के सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मुंबई स्थित जे जे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर दोनों महिलाओं को अबोर्शन की अनुमति प्रदान की. अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने इन महिलाओं का मेडिकल परीक्षण करने के बाद उनके भ्रूण में एक जैसी विसंगतियां पायीं थीं जिनकी वजह से गर्भावस्था जारी रहने से उनके स्वास्थ पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

कानून में 20 सप्ताह बाद अबोर्शन की अनुमति नहीं है

इस मामले में पहली महिला 29 सप्ताह से गर्भवती थी जबकि दूसरी महिला का गर्भ 30 सप्ताह का था.

पीठ ने कहा कि इस याचिका में मेडिकल अबोर्शन की अनुमति प्रदान की जाती है.

मुंबई निवासी दोनों महिलाओं ने भ्रूण में गंभीर विकृतियां होने के आधार पर अबोर्शन की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी क्योंकि मेडिकल अबोर्शन कानून की धारा 3 (2) (बी) के अंतर्गत गर्भावस्था के 20 सप्ताह बाद अबोर्शन की अनुमति नहीं है.

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