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सुंजवान हमला: पाकिस्तान को उसकी भाषा में कब जवाब देगा भारत

ये पहली बार नहीं है कि सेना या सुरक्षा बल के कैम्प पर आतंकी हमला हुआ है. सवाल पहल करने का है

Prakash Katoch Updated On: Feb 10, 2018 04:57 PM IST

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सुंजवान हमला: पाकिस्तान को उसकी भाषा में कब जवाब देगा भारत

एक बार फिर से सेना के कैम्प पर हमला हुआ है. इस बार आतंकियों के निशाने पर था सुंजवान का सेना का कैम्प. जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी दस फरवरी को तड़के सेना के कैम्प में घुस गए. वो सीधे जूनियर कमीशन्ड अफसरों के रिहाइशी इलाकों में जा घुसे. सुबह पांच बजे ही आतंकियों और सेना के जवानों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई थी.

सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी. सैनिकों की और टुकड़ियां मंगाई गईं. भाग-दौड़ और अफरा-तफरी की तस्वीरें हमने टीवी चैनलों पर देखीं. खबरों में आया कि गृह मंत्री ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से बात की. सेना ने रक्षा मंत्री को हमले की जानकारी दी. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री ने रिपब्लिक चैनल को बताया कि गृह मंत्री ने इस हमले की जानकारी विदेश दौरे पर गए प्रधानमंत्री को दी है. उन्होंने बताया कि सेना इस हमले को नाकाम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है. सेना अपने हिसाब से इस हमले की जवाबी कार्रवाई करेगी. हमने ये भी सुना कि जरूरत पड़ी तो एक और सर्जिकल स्ट्राइक सरहद के पार की जा सकती है. ऐसी ही और भी बातें खबरों में आईं. कहा गया कि पाकिस्तान की एटमी धमकी से सख्ती से निपटा जाएगा.

रिपोर्टर सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर आतंकी सेना के कैंप के इतने भीतर कैसे घुस गए. यूं लग रहा है कि ऐसा पहली बार हुआ. ये सवाल यूं है जैसे कि पठानकोट तो एकदम सरहद के करीब है. कुछ पत्रकारों ने ये भी कहा कि पाकिस्तान, भारत से सीधे युद्ध में नहीं जीत सकता, इसलिए आतंकवादी भेजकर हमले कराता है. कुछ ने कहा कि पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से दबाव में है. पाकिस्तान का ये छद्म युद्ध पूरी तरह से बेपर्दा हो गया है. कुछ ने कहा कि ये आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद के अफजल गुरू स्क्वॉड के हैं. जिला प्रशासन ने हमले के बाद सेना के कैम्प के 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी स्कूल बंद करा दिए.

रुटीन प्रक्रिया ही दोहराई जाएगी.

India's CRPF personnel carry a coffin containing a body of their colleague, who was killed during a gun battle with suspected militants at CRPF training centre, in Lethpora in south Kashmir’s Pulwama district

अब तक की खबरों के मुताबिक सेना का एक जवान इस हमले में शहीद हो गया है. जबकि एक जेसीओ की बेटी समेत 6 लोग जख्मी हैं. कहा जा रहा है कि गोलीबारी तो सुबह 6 बजे के बाद ही बंद हो गई थी. लेकिन अब तक किसी आतंकवादी के मारे जाने की खबर नहीं है. सूत्र बता रहे हैं कि आतंकवादी कैम्प के भीतर ही कहीं छुपे हो सकते हैं. अब उन्हें जिंदा पकड़ने की कोशिश हो रही है. (ऐसा न ही हो तो अच्छा). यानी सुरक्षा बलों का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है. इसमें अभी और वक्त लग सकता है. इसमें सुरक्षाबलों को नुकसान भी होने का डर है. गृह मंत्री इस हमले के बाद शायद पाकिस्तान को एक बार फिर से चेतावनी दें. पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा शायद जैश के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के साथ इस हमले की कामयाबी का जश्न मनाएं. शायद वो तोहफे में मसूद अजहर और उसके साथियों को कुछ और बकरियां दें.

अब तक की खबरों से ऐसा लगता है कि ऑपरेशन खत्म होने के बाद जांच में ये पता लगाया जाएगा कि आखिर आतंकी इतने भीतर तक कैसे घुस गए. वो सीमा पार करके कैसे आ गए. इतनी दूरी उन्होंने कैसे तय की. उनकी मदद किसने की.

विपक्षी दल ये कहकर शोर मचाएंगे कि देश सुरक्षित नहीं रहा. विपक्षी दल ये भूल जाएंगे कि 2013 में जब पाकिस्तान के पीएम निजी यात्रा पर भारत आए थे, तो तब के विदेश मंत्री उनसे मिलने के लिए दौड़े-दौड़े राजस्थान गए थे. जबकि उसके ठीक पहले पाकिस्तान ने हमारे एक सैनिक का सिर काट लिया था. पाकिस्तान के उन्हीं प्रधानमंत्री ने बाद में अपनी संसद में भारत विरोधी प्रस्ताव पारित कराया था.

एक बात तय है. टीवी चैनल दीवानों जैसा बर्ताव करते हुए इस खबर को जोर-शोर से उछालेंगे. कुछ चैनलों पर पाकिस्तान से वही घिसे-पिटे चेहरे बुलाए जाएंगे. जो देश की दुविधा का मजाक उड़ाएंगे.

ये पहली बार नहीं है कि सेना या सुरक्षा बल के कैम्प पर आतंकी हमला हुआ है. सवाल पहल करने का है. क्योंकि जब आप सैनिकों पर बार-बार एहतियात बरतने का दबाव बनाते हैं. गोली चलाने पर उनके खिलाफ एफआईआऱ करते हैं, तो इससे आतंकियों के हौसले बुलंद होते हैं. हालांकि इन आतंकियों से बहुत प्रभावित होने की जरूरत नहीं. ये चूहे हैं, जिन्हें ड्रग देकर झूठ-मूठ का बहादुर बनाया गया है. वो नशे में हमले करते हैं. इसीलिए उन्हें रिहाइशी इलाकों मे घुसकर निहत्थे बच्चों और महिलाओं को मारने से भी गुरेज नहीं.

ये कोई पहली बार नहीं हुआ. क्या आपको याद है कि कालूचक में सेना के कैम्प पर ऐसा ही हमला हुआ था? 2002 में कालूचक से दस किलोमीटर की दूरी पर ही बस पर आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में सेना के 22 जवानों समेत 34 लोगों की जान गई थी. मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी थे. भारत का उस वक्त भी जवाब ठीक वैसा ही था. भूल जाने वाला. हमारे नीति-नियंताओं को ये समझना होगा कि पाकिस्तान ये संदेश देना चाहता है कि भारत बार-बार ऐसे हमले बर्दाश्त करता है. पाकिस्तान बार-बार ऐसे हमलों की साजिश फिर से रचता है. ये हमला खास तौर से पीएम मोदी के विदेश दौरे को ध्यान में रखकर किया गया है.

लाख टके का सवाल ये है कि हम कब ऐसे हमलों से निपटेंगे? ऐसे हमले रोक पाएंगे? हमारे देश के हुक्मरानों को पहले ये समझना होगा कि महज गोलीबारी और एक-दो सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान नहीं सुधरने वाला. दूसरी बात ये समझने वाली है कि पाकिस्तान से बातचीत की वकालत करने वाले पाकिस्तान के पैसे खाने वाले एजेंट हैं. इसके बावजूद दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत जारी है. जबकि हमें पता है कि पाकिस्तान से किसी भी तरह की बातचीत का कोई मतलब नहीं. तीसरी बात ये कि हम सिर्फ कूटनीति से ऐसे हमले नहीं रोक पाएंगे. हमें ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी, जो ऐसे गैरपरंपरागत युद्ध से निपट सके.

स्पेशल फोर्सेज़ को मिले और छूट

Republic Day Parade rehearsal

हमें अपनी स्पेशल फोर्सेज की ताकत का और इस्तेमाल करना चाहिए. उसका ऐसे हमले रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को ऐसी बातों पर ध्यान देना चाहिए. ये बात सिर्फ पाकिस्तान के संदर्भ में लागू नहीं होती, बल्कि हमारे सारे सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए सोचनी और अमल में लानी चाहिए. यकीन जानिए चीन ने अपने सैनिकों और स्पेशल कमांडोज को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से लेकर मालदीव और दूसरे कई तक तैनात कर रखा है. ताकि उसके हितों को नुकसान न हो. वहीं हम अब भी ऑपरेशन कैक्टस 2.0 के बारे में सोच ही रहे हैं.

चौथी बात ये कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ इकतरफा मामला न रहे. हमें उसी वक्त पाकिस्तान को सूद समेत इसका जवाब दे देना चाहिए. तभी पाकिस्तान को बात समझ में आएगी, जब उसे नुकसान होगा. इसमें बिना किसी राजनैतिक दखलंदाजी के सेना को एक्शन लेने की पूरी छूट दी जानी चाहिए.

पांचवीं बात ये कि हमें ऐसे हमलों से निपटने की ठोस रणनीति बनानी होगी. जिस तरह पाकिस्तान अपना पल्ला झाड़ लेता है. उसी तरह हमें भी करना चाहिए. अगर पाकिस्तान उरी में हमारे सैनिकों को जला सकता है. तो हमें भी नापाम, फॉस्फोरस और दूसरी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए.

छठी बात ये कि जब पाकिस्तान ये कहता है कि ये आतंकवादी उसके नहीं हैं, तो हमारे राजनेता फौरन एक सुर से ये कहते हैं कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता. तो हम ऐसे आतंकियों का सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार क्यं नहीं करते. क्या केंद्र सरकार के पास इसकी इच्छाशक्ति है?

लब्बो-लुबाब ये कि इस प्रॉक्सी वार को हमें दुश्मन के इलाके में ले जाना होगा. जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, हमें ऐसे ही आतंकी हमले झेलते रहने होंगे. हमें दुश्मन की गिरेबां पकड़नी होगी. उसकी कमजोर नस दबानी होगी. सीमा पर गोलीबारी से कुछ नहीं होने वाला. हम दुश्मन को नहीं, खुद को मूर्ख बना रहे हैं. पाकिस्तान के आतंकवाद से अफगानिस्तान बुरी तरह प्रभावित है. ईरान भी इसको झेल रहा है. पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग भले हो, उसको हमेशा भारत, ईरान और अफगानिस्तान के साथ जोड़कर ही देखा जाता है.

हमें इन दोनों देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान ने कूटनैतिक, सामरिक और आर्थिक तरीके से निपटना चाहिए. परंपरागत तरीकों से अलावा भी हमें दूसरे विकल्प खोलने होंगे. दोस्त देशों के साथ जानकारी का तालमेल बढ़ाकर हम पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा सकते हैं. हमें इसके लिए ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है. दुश्मन दस सिरों वाला है. उसका सिर काटने वाली सर्जरी हमें बार-बार, लगातार करनी होगी. इसके लिए जम्मू-कश्मीर में आतंकियों पर लगातार दबाव बनाए रखना होगा.

सभी सरकारें हैं जिम्मेदार

Mufti Mohammad Sayed

जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़ने के लिए सभी सरकारें जिम्मेदार हैं. यूपीए 2 के गृह मंत्री ने जम्मू में 4 हजार रोहिंग्या शरणार्थी बसा दिए. जबकि धारा 370 के तहत ऐसा नहीं होना चाहिए. लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमीशन की आड़ में उन्होंने ऐसा किया. आज जम्मू में चन्नी हिम्मत स्थित पुलिस लाइन के पास 734 रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं. जबकि सुंजवान स्थित सेना के कैंप के करीब 206 रोहिंग्या रह रहे हैं. 40 शरणार्थी सेना की 16वीं कोर के नगरोटा स्थित मुख्यालय पर रह रहे हैं. रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने के लिए कब्रिस्तानों तक का इस्तेमाल हो रहा है. सवाल ये है कि आखिर एनडीए की सरकार ने इन शरणार्थियों को अब तक जम्मू-कश्मीर के बाहर के किसी रिफ्यूजी कैम्प में क्यों नहीं भेजा है?

देशद्रोही फिर चाहे वो दिल्ली की लुटिएंस जोन के ही क्यों न हों, उनसे सख्ती से ही निपटना होगा. हमें ये समझना होगा कि दुश्मन ने हमारे सुरक्षा के सिस्टम तक में घुसपैठ बना ली है. चीन और पाकिस्तान पानी की तरह पैसे बहाकर ऐसे देशद्रोहियों को बढ़ावा दे रहे हैं. यही वजह है कि चंदन नंदी और प्रवीण स्वामी जैसे लोगों को पाकिस्तान की लिखी हुई स्क्रिप्ट को जस का तस छाप देने से गुरेज नहीं. ताकि पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को सजा देने में आसानी हो.

ऐसा हमारे देश में अभिव्यक्ति की आजादी की आड़़ में हो रहा है. कहावत यही है कि कुछ लोग अपनी रखैल को तोहफा देने के लिए अपनी मां के गर्भ को भी गिरवी रख देते हैं.

तो, क्या हमारे देश के हुक्मरान ये बात सुन और समझ रहे हैं? भारत में दिक्कत यही है कि जब सियासी दल आपसी खींच-तान में उलझे हैं, तो हमारी सरकार आड़े-तिरछे हमलों से सीधे रास्ते से निपटना चाह रही है. 2002 के हमले का जवाब भी हमने ऐसे ही दिया था. कांग्रेस और बीजेपी, दोनों की सरकारों को भूलने की बीमारी लगी है. चीन और पाकिस्तान को ये बात अच्छे से पता है. सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान से आई खबर कि भारत ने 400 मुसलमान युवक अफगानिस्तान भेजे हैं, को किनारे रखें, तो भी हकीकत सब को पता है.

पाकिस्तान ने भारत पर इतने आतंकी हमले किए हैं कि अब गिनती भी भूल चुकी है. देश की अर्थव्यवस्था सुधारने का ये मतलब नहीं कि बाकी दुनिया की नजर हम पर नहीं.

(लेखक पूर्व सैन्य अफसर हैं)

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