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सुकमा हमला: क्या बस्तर के माओवादी भरी-पूरी ‘रेड आर्मी’ खड़ी कर रहे हैं?

माओवादी अतिवादी अपने हथियारबंद कैडर को एक सेना के रूप में तब्दील कर रहे हैं

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Apr 26, 2017 12:08 PM IST

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सुकमा हमला: क्या बस्तर के माओवादी भरी-पूरी ‘रेड आर्मी’ खड़ी कर रहे हैं?

क्या माओवादी हिंसा की चपेट में आए बस्तर के रेड कॉरिडोर में वामपंथी अतिवादी अपनी एक भरी-पूरी सेना खड़ी करने की कोशिश में हैं?

बीते सोमवार को हुआ हमला और उसके बाद का घटनाक्रम इस बात की तस्दीक करते हैं कि माओवादी अतिवादी अपने हथियारबंद कैडर को एक सेना के रूप में तब्दील कर रहे हैं.

सोमवार की दोपहर सुकमा के बुरकापाल में माओवादी ने घात लगाकर हमला बोला. इस हमले में 25 जवानों की जान तो गई ही, माओवादी लड़ाकों की ताकत में भी इजाफा हुआ. हमलावरों ने सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारुद और साजो-सामान को लूटकर अपना जखीरा बढ़ा लिया है.

सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों से हासिल जानकारी के मुताबिक बस्तर में सक्रिय माओवादी अतिवादियों के पास अब 15 से 16 यूबीजीएल (अंडर बैरेल ग्रेनेड लांचर) हैं. इससे वाममंथी अतिवादियों के हथियारबंद जत्थों को और ज्यादा ताकत मिली है.

मामले से जुड़े एक सूत्र का कहना है, 'पहले माओवादी लड़ाकों के पास 9 से 10 यूबीजीएल थे. अतिवादियों ने मुठभेड़ में मारे गए जवानों से ये यूबीजीएल लूटे थे. अब उनके पास यूबीजीएल की तादाद बढ़कर 15-16 हो गई है. उनके मोर्टार का जखीरा भी दोगुना हो गया है.

एक आकलन के मुताबिक माओवादी लड़ाकों के पास अब 120 से ज्यादा शेल्स हैं. इससे माओवादी हथियारबंद जत्थे और भी ज्यादा घातक हो उठे हैं क्योंकि एक शेल से 20 से 25 लोगों की जान ली जा सकती है. माओवादी लड़ाके इन हथियारों का इस्तेमाल सुरक्षा-बलों के खिलाफ कर रहे हैं.'

माओवादियों ने लूटे कौन-कौन से हथियार

Maoist Loot 01

सुकमा हमले में नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल हुए गोले-बारुद की तस्वीर

सड़क खुलवाने के काम में लगी सीआरपीएफ की एक टुकड़ी पर नक्सली उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया. इसके तुरंत बाद दोनों के बीच भारी गोलीबारी हुई. गोलीबारी में हताहत हुए जवानों से नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियार लूट लिए.

मौके पर मौजूद सूत्रों का कहना है कि इस बार माओवादियों ने लड़ रहे कुछ जवानों से भी हथियार छीने.

मौके से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक माओवादियों ने सैन्य साजो-सामान और गोला-बारुद के अलावा 22 हथियार लूटे हैं. लूटे गए हथियारों की सूची इस प्रकार है:

हथियार, गोला-बारुद और साजो-सामान

• एके-47 (इनमें पांच में यूबीजीएल लगे हैं) — 12

• एकेएम – 04

• इन्सास एलएमजी – 02

• इन्सास राइफल —03

• स्पेयर बैट्री के साथ वायरलेस सेट्स — 05

• बायनाक्यूलर्स -- 02

• बुलेट प्रूफ जैकेट — 22

• डीप सर्च मेटल डिटेक्टर – 01

• एक-47 मैगजिन्स – 59

• एककेएम मैगजिन्स—16

• इन्सास एलएमजी मैगजिन्स—16

• इन्सास राइफल मैगजिन्स —15

• एके-47 और एकेएम के गोला-बारुद — 2820 राउंड

• इन्सास के बुलेटस् — 600 राउंड

• अंडर बैरेल ग्रेनेड लांचर(यूबीजीएल) शेल्स— 62

क्या हथियारों की लूट फौज खड़ी करने की कवायद है?

सूत्रों के मुताबिक पहली बार ऐसा हुआ है कि नक्सलियों ने बुलेट प्रूफ जैकेट लूटा. सोमवार के हमले की योजना माओवादी लड़ाकों के कमांडर हिडमा ने बनाई और हमले में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ने तकरीबन हर मुठभेड़ में अपने हथियार गंवाए हैं और इन हथियारों के जरिए पूरे रेड कॉरिडोर में अतिवादी वामपंथी जत्थे मजबूत हुए हैं.

Maoist loot 03 Unexploded grenade

सुकमा हमले में नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल हुए गोले-बारुद की तस्वीर

सुरक्षा मामलों के विश्लेषक ब्रिगेडियर(रिटायर्ड) नरेन्द्र कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, 'अगर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ने हथियार और साजो-सामान इसी रफ्तार से गंवाना जारी रखा तो माओवादी अपनी एक छोटी-मोटी रेड आर्मी खड़ी कर लेंगे. यह एक खतरनाक चलन है और इसपर अंकुश लगाने की जरूरत है.

सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन को खोए हुए हथियार वापस लाने का काम सौंपा जाना चाहिए. सीआरपीएफ के साधारण दस्ते को इस काम में कोबरा बटालियन की मदद के लिए लगाया जाना चाहिए.

कोई राष्ट्र इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सकता कि हथियारबंद गिरोह, ठग या आतंकवादी उसके सैनिकों के अस्त्र-शस्त्र लूट ले जाएं. माओवादियों की इस खुली बर्बरता का एकमात्र जवाब है पूरी ताकत और तैयारी के साथ उनके ऊपर हमला. इसके साथ ही साथ कई मोर्चों से सहयोगी उपाय किए जाने चाहिए.

बगावती तेवर वाली हिंसा की काट के अभियान की तैयारी शहरों में बैठकर रिमोट कंट्रोल के जरिए नहीं की जा सकती. जवानों को पर्याप्त प्रशिक्षण और नेतृत्व के जरिए मकसद को हासिल करने का जोश जगाते हुए असरदार अभियान के लिए तैयार करना होगा.

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