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पंजाब, हरियाणा में पराली जलाना हुआ कम, पर्यावरण पर भी होगा असर

दिल्ली और एनसीआर में पराली जलाने को वायु प्रदूषण के लिए एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है, विशेष रूप से दो महीने के फसल के मौसम के दौरान जब किसान गर्मियों की फसलों को काटते हैं

Updated On: Dec 23, 2018 12:04 PM IST

FP Staff

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पंजाब, हरियाणा में पराली जलाना हुआ कम, पर्यावरण पर भी होगा असर

लक्ष्य से कम होने के बाद भी हरियाणा और पंजाब ने 2017 में खेत में पराली जलाने की घटनाओं में 29% से अब 11% की गिरावट दर्ज की है जो कि सर्दियों में दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्त्रोत माना जाता है. राज्यों ने 2017 की तुलना में इस वर्ष ऐसे मामलों की संख्या में 14% की गिरावट दर्ज की है. परिणामस्वरूप, मशीनों के लिए सेंट्रल फंडिंग और राज्य की मदद के बाद किसानों को बस जमीन को खाली करने के लिए इसे स्थापित करने के बजाय पराली काटने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इससे लक्ष्य में 40 से 50% की कमी हो जाती है लेकिन एक अभ्यस्त आदत को बदलने के लिए एक शुरुआत जरूरी है.

दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने को प्रदूषण का कारण माना जाता है

रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा ने पहले वर्ष में पंजाब की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. किसानों को सब्सिडी द्वारा समर्थित विकल्प चुनने में मदद करने के लिए सरकार के प्रत्यक्ष और सक्रिय हस्तक्षेप को चिह्नित भी किया गया. दिल्ली और एनसीआर में पराली जलाने को वायु प्रदूषण के लिए एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है. विशेष रूप से दो महीने के फसल के मौसम के दौरान (30 सितंबर - 30 नवंबर) जब किसान गर्मियों की फसलों को काटते हैं. मुख्य रूप से धान, गेहूं और सरसों जैसी सर्दियों की फसलों की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करते हैं.

2 वर्षों के लिए 1151 करोड़ रुपए से अधिक का परिव्यय निर्धारित किया है

इस समस्या को रेखांकित करते हुए, केंद्र ने 2018-19 और 2019-20 की अवधि के दौरान राज्यों की मदद के लिए दो वर्षों के लिए 1,151 करोड़ रुपए से अधिक का परिव्यय निर्धारित किया है. वहीं राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वह किसानों को फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए अनुदानित मशीनें खरीदने में मदद करें. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के साथ राज्यों द्वारा साझा किए गए 30 सितंबर - 30 नवंबर की अवधि के लिए पराली जलाने वाले मामलों के अंतिम आंकड़ों के अनुसार हरियाणा ने 2017 में 13,085 की तुलना में इस साल पराली जलाने के 9,232 मामलों की सूचना दी जिसमें की 29% की गिरावट दर्ज की गई.

पंजाब में बड़ी संख्या में पराली जलाई जाती है

दूसरी ओर, पंजाब में पिछले साल 67,079 की तुलना में इस साल 59,695 मामलों में 11% की कमी आई है. पंजाब में बड़ी संख्या में पराली जलाई जाती है जो कि एक बड़ी समस्या है और जिससे निपटने की आवश्यकता है. हरियाणा कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुरेश गहलावत ने कहा- हालांकि हम अपेक्षित लक्ष्य (40-50% की कमी) पर नहीं पहुंचे हैं लेकिन यह एक अच्छी शुरुआत है. यहां तक कि लगभग एक तिहाई की गिरावट भी एक उपलब्धि है. हमने पंजाब से अच्छा प्रदर्शन किया है.

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